रिपोर्ट: बैंकिंग ट्रोजन से बचें आप, 8 लाख से ज्यादा इंडियन हो चुके हैं शिकार

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डिजिटल युग में लोगों के लिए सुविधाओं की आसानी से उपलब्धता तो बढ़ी है लेकिन इसके कई नुकसान भी साथ में झेलने पड़ रहे हैं। हालिया वर्षों में मोबाइल इंटरनेट ने लोगों की ज़िंदग़ी और आसान कर दी है। अब एक मोबाइल एप्लीकेशन के जरिए घंटों के काम मिनटों में निपटाए जा सकते हैं। हालांकि अब लोगों को इसके नुकसान भी समझ आने लगे हैं। ख़ासतौर पर भारतीय मोबाइल यूजर्स को इंटरनेट यूजेज और मालवेयर के ख़तरों का इल्म नहीं है। यही कारण है कि हैकर्स भारतीयों के साथ आसानी से ठगी कर लेते हैं। भारत में पिछले साल 8 लाख से ज्यादा लोग बैंकिंग ट्रोजन का शिकार हुए हैं। ऐसे में आइए जानते हैं क्या होता है यह बैंकिंग ट्रोजन..

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क्या होता है बैंकिंग ट्रोजन?

ट्रोजन या ट्रोजन होर्स एक प्रकार का कम्प्यूटर प्रोग्राम ही होता है। लेकिन यह कंप्यूटर या मोबाइल के महत्वपूर्ण डाटा को चुरा या मिटा सकता है। हैकर ट्रोजन की मदद से किसी भी कंप्यूटर को कंट्रोल कर सकता है। हैकर इसका इस्तेमाल पासवर्ड तोड़न के लिए करते हैं। यह हार्ड डिस्क के सारे डेटा और प्रोग्राम को मिटा सकता है। इसकी मदद से हैकर दूसरे कंप्यूटर्स पर नियंत्रण कर सकता है। बैंकिंग ट्रोजन यूजर के डिवाइस में घुसकर यूजर की सारी बैंकिंग इंफॉर्मेशन को हैकर तक पहुंचाने का काम करता है। साइबर अपराधियों द्वारा यह मालवेयर बैंकिंग वेबसाइट और इंटरनेट बैंकिंग यूजर को अपना टारगेट बनाता है।

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एक साल में बैंकिंग ट्रोजन अटैक 15.9 फीसद बढ़ा

सायबर सिक्योरिटी फर्म कास्परस्की लैब की हालिया रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है कि साल 2018 में 4 प्रतिशत इंडियन बैंकिंग ट्रोजन से प्रभावित हुए थे। रिपोर्ट के अनुसार, साल 2018 में करीब 8 लाख 89 हजार इंडियन यूजर्स को बैंकिंग ट्रोजन का सामना करना पड़ा। इससे पहले वर्ष 2017 में यह आंकड़ा 7 लाख 67 हजार तक पहुंचा था। पिछले दो वर्षों की तुलना की जाए तो पता चलता है कि 2017 की तुलना में 2018 में बैंकिंग ट्रोजन अटैक 15.9 फीसद बढ़ा है।

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ऑनलाइन ट्रांजेक्शन करते समय सावधानी बरतें

कास्परस्की लैब के सिक्योरिटी एक्सपर्ट ओलेग कुप्रीव का कहना है कि व्यक्तिगत यूजर्स की बात करें तो 2018 में उन्हें फाइनेंशियल खतरों से कोई बड़ी राहत नहीं मिली है। रिपोर्ट के मुताबिक़ कई बैंकर्स पैसे कमाने के लिए डाटा के अनुसार अपना शिकार ढूंढ रहे हैं जिन पर वो साइबर हमला कर पैसों की चोरी कर सके। इनमें से एक आरटीएम बैंकिंग ट्रोजन भी है, जिसके कारण 2018 में प्रभावित लोगों की संख्या में बढ़ोतरी हुई। कुप्रीव ने यूजर्स को सलाह देते हुए कहा कि हम यूजर्स से आग्रह करते हैं कि अपने कम्प्यूटर से ऑनलाइन ट्रांजेक्शन करते समय पूरी सावधानी बरतें। साइबर क्रिमिनल्स को कम आंकने और अपने कम्प्यूटर को असुरक्षित छोड़ेंने की भूल महंगी साबित हो सकती है।

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फाइनेंशियल फिशिंग के मामलों में आई गिरावट

पिछले कई वर्षों से यूएस, रूस, जर्मनी, वियतनाम, इटली और चाइना के बैंकिंग यूजर्स को गोजी, स्पायआई, जीबोट जैसे बैंकिंग मालवेयर अटैक का सामना करना पड़ रहा है। जानकारी के अनुसार, फिलहाल बैंकिंग मालवेयर के मामले में गोजी और जीबोट सबसे ज्यादा फैले हुए मालवेयर हैं। हालिया रिपोर्ट बताती हैं कि जीबोट दुनिया के 26 फीसद, गोजी 20 प्रतिशत और स्पायआई 15.6 फीसद बैंकिंग यूजर्स को अपना टारगेट बना चुके हैं। हालांकि फाइनेंशियल फिशिंग के मामले में थोड़ी राहतभरी ख़बर आई है। अब फाइनेंशियल फिशिंग के मामले 53.85 प्रतिशत से घटकर 44.7 फीसद तक पहुंच गए हैं। उल्लेखनीय है कि ऑनलाइन यूजर्स के लिए इन मालवेयर और एक्सपर्ट हैकर्स से निपटाना आसान नहीं होता है ऐसे में यूजर्स को अपनी खुद की सावधानी बरतनी चाहिए।

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