भारत-चीन: अप्रैल-मई के बाद बनाए गए नए ढांचे को नष्ट करने पर बनीं सहमति

Views : 1113  |  3 minutes read
India-China-Army-Dialogue

भारत और चीन के बीच चल रहे सीमा विवाद को सुलझाने के लिए आठवें दौर की उच्च-स्तरीय सैन्य वार्ता में सैन्य और राजनयिक माध्यम से वार्ता बनाए रखने पर सहमति बनी है। इसके बाद नौवें दौर की वार्ता जल्द ही संभव है। जानकारी के अनुसार, आठवें दौर की वार्ता में दोनों देशों की सेनाएं लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर फिंगर इलाके में सैनिकों को पीछे हटाने पर सहमत हुई हैं। इसके साथ ही दोनों पक्षों ने पैंगोंग त्सो झील क्षेत्र में अप्रैल-मई के बाद से बनाए गए हर नए ढांचे को नष्ट करने पर सहमति जताई है। वहीं, फिंगर इलाकों में भारत-चीन दोनों देशों में से किसी भी पक्ष की ओर से पैट्रोलिंग गतिविधि भी नहीं होगी।

फिंगर-4 और 8 क्षेत्र के बीच नहीं होगी पैट्रोलिंग

मीडिया ख़बरों के अनुसार, एलएसी पर विवादित क्षेत्र फिंगर-4 और फिंगर-8 क्षेत्र के बीच भारत-चीन दोनों ही पक्षों की ओर से कोई पैट्रोलिंग गतिविधि भी नहीं होगी। कहा जा रहा है कि इस क्षेत्र में चीन अपने पुराने रुख से पीछे हट गया है। पहले वह इस क्षेत्र में एक निगरानी पोस्ट बनाने की बात कह रहा था और इस पर अड़ा हुआ था। वहीं, डेपसांग क्षेत्र को लेकर दोनों पक्षों के बीच अलग से चर्चा होगी। चीन ने यहां पर भारतीय सेना के कुछ पैट्रोलिंग बिंदुओं को रोक रखा है। इसके साथ ही भारतीय सेना के कुछ अन्य पैट्रोलिंग बिंदुओं को लेकर भी चर्चा होगी, जहां चीन ने अभी भी पूरी तरह से अपने सैनिकों को पीछे नहीं किया है।

तीन चरण वाली एक योजना पर दोनों देश सहमत

आपको जानकारी के लिए बता दें कि लद्दाख क्षेत्र में एलएसी पर तनाव घटाने के लिए छह नवंबर को चुशुल में आयोजित की गई दोनों देशों के बीच कॉर्प्स कमांडर स्तर की आठवें दौर की वार्ता में इस योजना पर चर्चा की गई थी। भारत-चीन की सेनाओं ने पूर्वी लद्दाख सेक्टर के कुछ हिस्सों से पीछे हटने पर सहमति व्यक्त की है, जिसके तहत वे इस साल अप्रैल-मई वाले स्थानों पर वापस लौट जाएंगे। खबरों के अनुसार, इस वार्ता में सैनिकों को पीछे हटाने के लिए दोनों देशों की सेनाओं के बीच तीन की चरण एक योजना पर सहमति बनी है।

पीएम मोदी ने JNU परिसर में विवेकानंद की प्रतिमा का किया अनावरण, युवाओं के लिए कही ये बात

COMMENT