बॉलीवुड की मशहूर कोरियोग्राफर सरोज खान का कार्डियक अरेस्ट से निधन

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बॉलीवुड की मशहूर कोरियोग्राफर सरोज खान का कार्डियक अरेस्ट से 72 साल की उम्र में निधन हो गया। सरोज को सांस लेने में शिकायत के बाद मुंबई के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां शुक्रवार रात करीब दो बजे उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया। उनके शव को रात में ही बांद्रा के अस्पताल में परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया। सरोज की बेटी सुकैना ने बताया कि आज सुबह सात बजे के करीब मलाड के कब्रिस्तान में सरोज खान को सुपुर्द-ए-खाक किया गया। उनके प्रति शोक प्रकट करने के लिए प्रार्थना सभा तीन दिन बाद रखी गई है।

20 जून को अस्पताल में भर्ती हुई थी सरोज

आपको जानकारी के लिए बता दें कि 20 जून को सांस लेने में तकलीफ के बाद कोरियोग्राफर सरोज खान को मुंबई के गुरुनानक अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जहां उनकी तबीयत में सुधार हो रहा था, लेकिन गुरुवार रात उनकी तबीयत अचानक बिगड़ी और उनका निधन हो गया। कुछ दिन पहले ही उनका कोरोना टेस्ट भी कराया गया था जो निगेटिव आया था। एक दिलचस्प बात ये है कि सरोज खान ने अपनी पहली शादी मास्टर बी. सोहनलाल से की थी। दोनों की उम्र में 30 साल का अंतर था। शादी के वक्त सरोज की उम्र मात्र 13 साल थी। उन्होंने इस्लाम धर्म अपना कर 43 साल के सोहनलाल से शादी की। सोहनलाल की ये दूसरी शादी थी।

पहली शादी से बी. सोहनलाल के चार बच्चे थे और उन्होंने ये बात सरोज से छिपाई थी। सरोज खान ने एक इंटरव्यू में बताया था कि ‘मैं उन दिनों स्कूल में पढ़ती थी, तभी एक दिन मेरे डांस मास्टर सोहनलाल ने गले में काला धागा बांध दिया और मेरी शादी हो गई थी।’  करीब चार साल बाद वर्ष 1965 में इन दोनों का तलाक हो गया था। इसके 10 साल बाद सरोज खान ने 1975 में बिजनेसमैन सरदार रोशन खान के साथ दूसरी शादी की।

विभाजन के बाद पाकिस्तान से भारत आया था परिवार

उल्लेखनीय है कि सरोज खान ने अपने फिल्मी कॅरियर में सैकड़ों गानों को कोरियोग्राफ किया था। उन्होंने माधुरी दीक्षित और श्रीदेवी सहित बॉलीवुड के कई कलाकारों को डांस सिखाया। बहुत ही कम लोग जानते हैं कि सरोज खान का असली नाम निर्मला नागपाल था। उनके पिता का नाम किशनचंद सद्धू सिंह और मां का नाम नोनी सद्धू सिंह था। भारत के विभाजन के बाद सरोज खान का परिवार पाकिस्तान से भारत आ गया था।

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सरोज खान ने महज तीन साल की बहुत छोटी उम्र में बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट फिल्मों में काम करना शुरू कर दिया था। उनकी पहली फिल्म ‘नजराना’ थी, जिसमें उन्होंने श्यामा नाम की एक छोटी बच्ची का रोल प्ले किया। उन्होंने पचास के दशक में बतौर बैकग्राउंड डांसर फिल्मों में काम करना शुरू कर दिया था। वर्ष 1974 में रिलीज हुई फिल्म ‘गीता मेरा नाम’ से सरोज एक फ्रीलांस कोरियोग्राफर की तरह जुड़ीं, हालांकि उनके काम को काफी समय बाद पहचान मिली। उन्होंने अपने ​लंबे कॅरियर में ‘मिस्टर इंडिया’, ‘चांदनी’, ‘नगीना’, ‘तेजाब’, ‘बेटा’ और ‘थानेदार’ जैसी बेहद पॉपुलर और सफल फिल्मों के लिए कोरियोग्राफ किया था।

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