सरोज खान की महज़ तीन साल की उम्र में ही शुरू हो गई थी फिल्म जर्नी, ये था असल नाम

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बॉलीवुड में वैसे तो बहुत से नामी कोरियोग्राफर आए, मगर इन सभी के बीच एक ऐसी कोरियोग्राफर भी थीं, जिन्होंने डांसर्स और डांसिंग की दुनिया को एक अलग आयाम दिया। जी हां, हम बात कर रहे हैं मशहूर बॉलीवुड कोरियोग्राफर सरोज खान की, जिनकी आज 73वीं बर्थ एनिवर्सरी है। सरोज ने हिंदी फिल्मों की हर बड़ी अभिनेत्री को अपने इशारों पर नचाया। कई ब्लॉकबस्टर फिल्मों में अपनी कोरियोग्राफी का जादू दिखाने वाली सरोज खान की निजी जिंदगी संघर्ष से भरी रही। सरोज ने अपने फिल्मी कॅरियर में 2000 से भी ज्यादा गानों को कोरियोग्राफ किया था। उन्होंने अपने से उम्र में तीन गुना बड़े शख्स से शादी की और इस्लाम धर्म भी अपनाया। इस ख़ास मौके पर जानिए उनके जीवन के बारे में कुछ अनसुने किस्से…

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बॉलीवुड की कई नामी एक्ट्रेस को सिखाया डांस

श्रीदेवी-माधुरी से लेकर ऐश्वर्या-करीना तक को अपने इशारों पर नचाने वाली सरोज खान का जन्म 22 नवंबर, 1948 को हिंदू परिवार में हुआ था। पार्टीशन के बाद सरोज का परिवार पाकिस्तान से भारत आ गया था। उनका असली नाम निर्मला नागपाल है। स्कूल जाने की उम्र में ही सरोज खान ने 43 साल के डांसर सोहनलाल से शादी कर ली थी, तब वो सिर्फ 13 साल की थीं।

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फिल्म ‘नजराना’ से करियर की शुरूआत की

उन्होने महज 3 साल की उम्र में बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट फिल्म ‘नजराना’ से अपने करियर की शुरूआत की थी। वहीं 30 साल पहले आई फिल्म ‘तेजाब’ के गाने ‘एक दो तीन’ ने उन्हें काफी पहचान दिलाई थी। इसी गाने की वजह से फिल्मफेयर ने अपने अवॉर्ड्स की कैटेगरी में बेस्ट कोरियॉग्राफी की कैटेगरी भी जोड़ी थी। जिसका अवॉर्ड सरोज ने ही अपने नाम किया था।

इसके बाद सरोज खान ने पीछे मुड़ कर नहीं देखा और लगातार उन्होंने कई गानों की बेहतरीन कोरियोग्राफी की। सरोज खान को सबसे पहले सफलता फिल्म मिस्टर इंडिया में श्रीदेवी के ऊपर फिल्माए गए गाने ‘हवा-हवाई’ से मिली थी। वहीं साल 2002 में आई देवदास, 2006 में ‘श्रृंगारम’ और 2007 में ‘जब वी मेट’ में कोरियोग्राफी के लिए उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से भी नवाजा गया।

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कास्टिंग काउच पर बयान देकर ट्रोल हुई

हाल ही सरोज खान अपने कास्टिंग काउच पर दिए गए बयान को लेकर बुरी तरह ट्रोल हुई थीं। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था कि कास्टिंग काउच इंडस्ट्री के लिए कोई नई बात नहीं है, बल्कि यह तो बाबा आदम के जमाने से होता चला आया है। हालांकि, इंडस्ट्री में दुष्कर्म के बाद लड़कियों को छोड़ नहीं दिया जाता, उन्हें काम और रोजी-रोटी भी दी जाती है।

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