क्यों कहा चुनाव आयोग ने पूर्व चुनाव आयुक्त को- कार्रवाई आपने नहीं की, जिम्मेदार हमें क्यों ठहरा रहे हो?

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हाल में दिल्ली विधानसभा चुनावों में प्रचार के दौरान जिस तरह के नफरत भरे भड़काउ भाषण दिए गए थे। इस तरह के भाषणों पर चुनाव आयोग पर पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस वाई कुरैशी ने आरोप लगाए हैं कि आयोग ने दिल्ली विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान नफरत भरे भाषणों के मामले में उचित तरीके से सजा नहीं दी। वहीं आयोग ने इन आरोपों पर कहा कि जब कुरैशी आयोग की अगुवाई कर रहे थे तो जनप्रतिनिधित्व कानून और आईपीसी के तहत नेताओं के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई।

पूर्व चुनाव आयुक्त कुरैशी ने इंडियन एक्सप्रेस एक आलोचनातमक लेख लिखा जिस पर चुनाव आयोग ने उन्हें पत्र भेजा है। इस पत्र को सीनियर डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर डॉ. संदीप सक्सेना ने लिखा। दिल्ली चुनाव के दौरान नफरत वाले भाषण देने वाले नेताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं कराने को लेकर पूर्व सीईसी एसवाई कुरैशी की ओर से सवाल उठाए गए।

क्यों नहीं दर्ज की भड़काउ भाषण देने वालों पर एफआईआर

आयोग ने पत्र में उन्होंने पूर्व चुनाव आयुक्त को स्मरण करवाया कि जब आप मुख्य चुनाव आयुक्त थे, तब हुए चुनावों में आयोग द्वारा आदर्श आचार संहिता के तहत जारी नोटिसों और कार्रवाई की सूची संलग्न है। उन्होंने कहा, ‘आप कृपा करके इसे पढ़ सकते हैं। संलग्न सूची से देखा जा सकता है कि तत्कालीन आयोग ने इस अवधि में जनप्रतिनिधित्व कानून 1951 की धाराओं 123 और 125 के तहत तथा आईपीसी (भारतीय दण्ड संहिता) की धारा 153 के तहत कोई कार्रवाई नहीं की।’

इसमें कहा गया कि कार्रवाई तो आपके समय भी नहीं की गई, फिर हमें क्यों जिम्मेदार ठहरा रहे हो। आयोग की ओर से भेजे गए पत्र के साथ उनके लेख की प्रति भी अटैच की गई है। कुरैशी भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त जुलाई 2010 से जून 2012 तक रहे।

कुरैशी ने कहना था कि दिल्ली चुनाव में प्रचार के समय कई नेताओं द्वारा खूब भड़काउ भाषण दिए गए। उनके खिलाफ चुनाव आयोग को एफआईआर दर्ज करने के आदेश देने चाहिए थे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

चुनाव आयोग 11 फरवरी, 2020 से पहले कराए गए आम चुनाव और विधानसभा के दौरान आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ की कार्रवाई पर एक रिपोर्ट प्रकाशित करने की योजना बना रहा है।

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