क्यों बनाना चाहती हैं आंध्र प्रदेश सरकार 3 राजधानियां, जानें इसकी वजह

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आंध्र प्रदेश विधानसभा ने 20 जनवरी को राज्य की तीन राजधानी की योजना के प्रस्ताव वाले विधेयक को मंजूरी दे दी है। इस विधेयक के अनुसार राज्य की विधायी राजधानी अमरावती होगी, जबकि विशाखापत्तनम कार्यकारी राजधानी और कुर्नूल को न्यायिक राजधानी होगी। जब विधानसभा ने यह विधेयक पास किया तो राज्य में सरकार के खिलाफ विरोध—प्रदर्शन शुरू हो गए। यही नहीं तेलगू देशम पार्टी के 17 विधायक को निलंबित कर दिया गया। वहीं पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प भी हुई जिसमें कई घायल भी हुए।

आखिर क्यों चाहती है आंध्र प्रदेश सरकार तीन राजधानियां और इसके पीछे उठने वाले विवाद की असली वजह क्या है? तो आइए जानते हैं—

यह है पूरा मामला

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने अपने नेतृत्व वाली सरकार ने सोमवार को विधानसभा में राजधानी से संबंधित विधेयक को मंजूरी मिली, जिसके मुताबिक राज्य की तीन राजधानियां होगी। जिन्हें कार्य के हिसाब से विभाजित किया गया है। इनमें जहां विशाखापट्टनम कार्यकारी राजधानी होगी तो अमरावती विधायी राजधानी और कुर्नूल न्यायिक राजधानी होगी। आपको बता दें कि आंध्र प्रदेश से पहले देश में महाराष्ट्र, हिमाचल प्रदेश और केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर की दो राजधानी हैं।

इस विधेयक के अनुसार, राजधानी विशाखापट्टनम में मुख्यमंत्री का कार्यालय, राजभवन और सचिवालय समेत कई सरकारी दफ्तर शिफ्ट होंगे। राजधानी कुर्नूल में उच्च न्यायालय स्थापित किया जाएगा। वहीं आंध्र प्रदेश विधानसभा अमरावती में रहेगी। तीन राजधानी वाली अवधारणा के पीछे आंध्र प्रदेश सरकार का तर्क है कि वह प्रदेश के तीनों क्षेत्रों- उत्तरी तट, दक्षिणी तट और रायलसीमा का समान विकास चाहती है।

विरोध का कारण

सरकार के इस नए प्रस्ताव का प्रमुख विपक्षी दल विरोध कर रहा है। इस पर विपक्ष का आरोप है कि वे अपने समुदाय (जाति) को ध्यान में रखकर राजधानी का चुनाव कर रहे हैं। दोनों पार्टी एक—दूसरे पर आरोप—प्रत्यारोप लगा रही ​है जिसके तहत जहां अमरावती में नायडू समुदाय की आबादी अधिक है, वहीं विजयवाड़ा-गुंटूर क्षेत्र में रेड्डी समुदाय की जनसंख्या ज्यादा है। पिछली सरकार ने अमरावती को प्रदेश की नई राजधानी बनाने के लिए 33 हजार करोड़ रुपये की राशि आवंटित की थी।

नया विधेयक विधानसभा से पास हुआ है इसे अभी विधान परिषद में पेश किया जाएगा। जहां पर सत्तारूढ़ वाईएसआर के पास बहुमत नहीं है। उच्च सदन में उसके केवल 9 सदस्य है। विधानसभा में सोमवार को प्रस्ताव पारित करने के दौरान हंगामा करने पर तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) के 17 विधायकों को एक दिन के लिए निलंबित कर दिया।

सरकार के नए प्रस्ताव से किसान भी नाराज

राजधानी को लेकर चल रहे गतिरोध पर न केवल विपक्ष बल्कि किसान भी सरकार के नए प्रस्ताव का विरोध कर रहे हैं। जिन किसानों ने अमरावती को ड्रीम कैपिटल बनाने के लिए 33 हजार एकड़ जमीन दी थी वे सरकार के तीन राजधानी वाले प्रस्ताव से खफा नजर आ रहे हैं। सरकार पहले से ही अमरावती पर 5500 करोड़ रुपये खर्च कर चुकी है लेकिन विवाद के बाद मेगा प्रॉजेक्ट से अधिकतर बाहरी फंडिंग वापस ली जा चुकी है।

राजधानी को लेकर लंबे समय से विवाद

आंध्र प्रदेश राज्य को राजधानी को लेकर लंबे समय से समझौता करना पड़ा है। जैसे ही इसकी सीमाएं बदलती है, राजधानी भी बदल जाती है। वर्ष 1953 में जब आंध्र प्रदेश अलग राज्य बना तो मद्रास (चेन्नई) तमिलनाडु में चला गया था। इसके बाद वर्ष 1956 में आंध्र प्रदेश गठित होने के साथ ही कुर्नूल, हैदराबाद में मिल गया जिससे एक बार फिर प्रदेश को राजधानी के रूप में कुर्नूल खोना पड़ा।

वर्ष 2014 में जब आंध्र प्रदेश से तेलंगाना को अलग राज्य बनाया गया तो हैदराबाद तेलंगाना राज्य में चला गया। जिसके बाद अमरावती को राज्य की राजधानी बनाए जाने की दिशा में काम जारी है।

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