पश्चिम बंगाल की दुष्कर्म पीड़िताएं टीएमसी कार्यकर्ताओं के खिलाफ पहुंचीं सुप्रीम कोर्ट

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पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद हुई राजनीतिक हिंसा और गुंडागर्दी के कारण भाजपा समर्थित हजारों लोगों को डर के कारण घर छोड़कर असम बॉर्डर की ओर जाना पड़ा। उस दौरान कथित तौर पर सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के कार्यकर्ताओं द्वारा कई महिलाओं का बलात्कार करने की भी खबरें मीडिया में आई थीं। ऐसे ही मामलों में टीएमसी कार्यकर्ताओं के जुल्म का शिकार हुई दो दुष्कर्म पीड़िताओं ने अब सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। एक 60 वर्षीय महिला और एक नाबालिग पीड़िता ने सर्वोच्च अदालत में याचिका दायर कर हिंसा और पुलिस की निष्क्रियता की जांच कोर्ट की निगरानी में एसआईटी से कराने की मांग की है।

पीड़िता ने कहा, उसकी और उसके को परिवार जान का खतरा

आपको जानकारी के लिए बता दें कि अनुसूचित जाति की एक 17 वर्षीय लड़की का नौ मई को तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कथित तौर पर सामूहिक दुष्कर्म किया था। स्थानीय स्तर पर इस घटना को लेकर आरोपियों पर कोई कार्रवाई नहीं होने के बाद पीड़िता ने सुप्रीम कोर्ट से मामले की जांच एसआईटी या सीबीआई से कराने तथा मामले की सुनवाई को पश्चिम बंगाल से बाहर हस्तांतरित करने की मांग की है। टीएमसी कार्यकर्ताओं द्वारा दुष्कर्म का शिकार हुई अनुसूचित जाति की नाबालिग पीड़िता का कहना है कि प्रदेश यानि पश्चिम बंगाल में उसकी और उसके परिवार को जान का खतरा बना हुआ है।

तृणमूल कांग्रेस के नेता ने घर आकर दी धमकी

नाबालिग लड़की का आरोप है कि न केवल उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया और जंगल में मरने के लिए छोड़ दिया गया, बल्कि अगले दिन स्थानीय तृणमूल कांग्रेस के नेता बहादुर एसके ने उनके घर पर आकर धमकी भी दी। इसके बाद पीड़िता और उसके परिजनों के मन में डर बैठ गया है। मालूम हो कि पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव परिणाम के बाद हुई हिंसा में कथित तौर पर कई भाजपा समर्थित लोगों की मौत हो गई थी। इस हिंसा के बाद कई परिवारों को रातों-रात भागना पड़ा और असम जाकर शरण लेनी पड़ी।

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