मिशन चंद्रयान-2 की सफल लॉन्चिंग, चांद के दक्षिणी ध्रुव पर होगी लैंडिंग

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22 जुलाई का दिन भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के इतिहास में सुनहरे पन्नों पर दर्ज हो गया है, क्योंकि इसरो ने अपना महत्वाकांक्षी मिशन चंद्रयान-2 की सफल लॉन्चिंग दोपहर 2 बजकर 43 मिनट पर की। इस मिशन को श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से लॉन्च किया गया, जिसे चंद्रमा तक पहुंचने में करीब 48 दिन का समय लगेगा। इस मिशन को पहले 15 जुलाई को लॉन्च किया जाता लेकिन अंतिम क्षणों पर तकनीकी खामियों के कारण टाल दिया गया।

चंद्रयान-2 की चांद पर जैसे ही सॉफ्ट लैंडिंग होगी भारत के लिए यह ऐतिहासिक दिन होगा क्योंकि वह ऐसा करने वाला दुनिया का चौथा देश बन जाएगा। बता दें कि अभी तक संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस और चीन को ही इस प्रकार की विशेषज्ञता हासिल है।

जीएसएलवी मार्क-।।। से द्वारा की जाएगी लॉन्चिंग

जिस रॉकेट से चंद्रयान-2 को चांद पर भेजा, उसकी वजन क्षमता 4 टन तक का भार (पेलोड) ले जाने के कारण ‘बाहुबली’ कहे जा रहे जीएसएलवी मार्क-।।। रॉकेट है। इससे इसरो ने जीसैट-29 और जीसैट-19 जैसे उपग्रहों का सफल प्रक्षेपण किया है।

इसरो के प्रमुख के. सिवन के अनुसार भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी द्वारा दिसंबर 2021 के लिए निर्धारित अपने मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम ‘गगनयान’ के लिए भी जीएसएलवी मार्क-।।। रॉकेट का प्रयोग करेगी।

13 पेलोड होंगे चंद्रयान—2 में

पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से निर्मित चंद्रयान-2 में कुल 13 पेलोड हैं। इसमें आठ ऑर्बिटर में, तीन पेलोड लैंडर ‘विक्रम’ और दो पेलोड रोवर ‘प्रज्ञान’ में हैं। लैंडर ‘विक्रम’ का नाम भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान कार्यक्रम के जनक डॉ. विक्रम साराभाई के नाम पर रखा गया है।

जीएसएलवी-एमके तृतीय चंद्रयान-2 को लॉन्चिंग के करीब 16 मिनट बाद पृथ्वी की कक्षा में स्थापित करेगा। इसरो चंद्रयान-2 को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतारेगा। इसरो के अनुसार, चंद्रयान-2 चंद्रमा के भौगोलिक वातावरण, खनिज तत्वों, उसके वायुमंडल की बाहरी परत और पानी की उपलब्धता की जानकारी एकत्र करेगा।

चांद पर पहुंचने पर यूं देगा चंद्रयान-2 अपने मिशन को अंजाम

चंद्रमा हमारी धरती का एक उपग्रह है। धरती से चंद्रामा की दूरी करीब 3 लाख 84 हजार किलोमीटर है। जब चंद्रयान-2 चांद पर पहुंचेगा और इसके माध्यम से लैंडर-विक्रम और रोवर-प्रज्ञान चंद्रमा की सतह पर उतरेंगे। चांद की सतह पर उतरने के 4 दिन पहले लैंडर ‘विक्रम’ उतरने वाली जगह का मुआयना करना शुरू करेगा। लैंडर यान से डिबूस्ट होगा।

लैंडर ‘विक्रम’ चांद की सतह के और नजदीक पहुंचेगा और वहां लैंडिंग वाली जगह को स्कैन करना शुरू करेगा। लैंडिंग की प्रक्रिया 6-8 सितंबर के बीच शुरू होगी। लैंडिंग के बाद लैंडर (विक्रम) का दरवाजा खुलेगा और वह रोवर (प्रज्ञान) को रिलीज करेगा, इसका वजन 27 किलो है। रोवर के निकलने में करीब 4 घंटे का समय लगेगा। फिर यह दो पेलोड की मदद से विभिन्न वैज्ञानिक परीक्षण करने के लिए चांद की सतह पर निकल जाएगा। इसके 15 मिनट के अंदर ही इसरो को लैंडिंग की तस्वीरें मिलनी शुरू हो जाएंगी।

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