जानिए क्या है क्यूरेटिव पिटीशन जिसे अब ‘निर्भया’ केस के दोषी कोर्ट में दायर करेंगे?

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What is Curative petition?

दिसंबर 2012 के निर्भया दुष्कर्म मामले में दोषी अक्षय कुमार सिंह की पुनर्विचार याचिका बुधवार को उच्चतम न्यायालय ने खारिज कर दी है। देश की सर्वोच्च अदालत ने कहा कि अक्षय की पुनर्विचार याचिका में कोई नए तथ्य नहीं है, इसलिए कोर्ट यह याचिका खारिज करता है। वहीं, अक्षय के वकील एपी सिंह ने कहा कि वह इस मामले को लेकर जल्द ही सुप्रीम कोर्ट में क्यूरेटिव पिटीशन दायर करेंगे। ऐसे में जानिए क्या होता है क्यूरेटिव पिटीशन..

क्यूरेटिव पिटीशन है कानूनी शब्द

Curative Petition - Chalta Purza

क्यूरेटिव पिटीशन तब दाखिल किया जाता है जब किसी दोषी की राष्ट्रपति के पास भेजी गई दया याचिका और सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी जाती है। ऐसे में क्यूरेटिव पिटीशन उस मुजरिम के पास मौजूद आखिरी मौका होता है, जिसके द्वारा वह अपने लिए सुनिश्चित की गई सज़ा में नरमी बरतने की गुहार लगा सकता है। बता दें, क्यूरेटिव पिटीशन किसी भी मामले में कोर्ट में सुनवाई का अंतिम चरण होता है। इसमें फैसला आने के बाद दोषी के लिए किसी भी प्रकार की कानूनी सहायता के सभी रास्ते बंद हो जाते हैं।

मुजरिम कब कर सकता है क्यूरेटिव पिटीशन

देश की सर्वोच्च अदालत यानि सुप्रीम कोर्ट द्वारा किसी मामले में दोषी ठहराये जाने के बाद भी मुजरिम रिव्यू पिटीशन डाल सकता है। अगर रिव्यू पिटीशन भी खारिज कर दिया जाता है, तब सुप्रीम कोर्ट अपने ही द्वारा दिए गए न्याय के आदेश को गलत क्रियान्वन से बचाने के लिए या फिर उसे दुरुस्त करने लिए क्यूरेटिव पिटीशन के तहत सुनवाई कर सकता है।

क्यूरेटिव पिटीशन के नियम क्या हैं?

कोर्ट में याचिका लगाने वाले व्यक्ति को अपना क्यूरेटिव पिटीशन दायर करते समय ये बताना जरूरी होता है कि आखिर वो किस आधार पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को चुनौती दे रहा है। क्यूरेटिव पिटीशन किसी सीनियर वकील द्वारा सर्टिफाइड होना जरूरी होता है, जिसके बाद इस पिटीशन को उच्चतम न्यायालय के तीन सबसे वरिष्ठ न्यायाधीशों और जिन न्यायाधीशों ने फैसला सुनाया था उसके पास भी भेजा जाना जरूरी होता है। अगर इस बेंच के अधिकतर न्यायाधीश इस बात पर सहमति प्रकट करते हैं कि मामले की दोबारा सुनवाई होनी चाहिए, उस​ स्थिति में क्यूरेटिव पिटीशन को दूसरी बार उन्हीं न्यायाधीशों के पास भेज दिया जाता है।

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याकूब मेमन मामले में स्वीकार की थी क्यूरेटिव पिटीशन

वर्ष 1993 के मुंबई ब्लास्ट में दोषी रहे आतंकी याकूब मेमन की दया याचिका राष्ट्रपति द्वारा खारिज करने के बाद भी सुप्रीम कोर्ट ने क्यूरेटिव पिटीशन पर सुनवाई करने की मांग स्वीकार कर ली थी। उस दौरान सर्वोच्च न्यायालय ने आधी रात तक याकूब मेनन की फांसी की अंतिम याचिका पर सुनवाई की थी। हालांकि, इसके बाद भी याकूब की फांसी की सज़ा को सुप्रीम कोर्ट ने नहीं बदला था। उसे 30 जुलाई, 2015 को नागपुर में फांसी के फंदे पर लटकाया गया था।

 

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