सावन और आस्था : बेल पत्र तोड़ने और चढ़ाने के भी हैं कुछ नियम

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सावन का महीना शुरू हो चुका है। आज सावन का पहला सोमवार है। जगह जगह भगवान शिव की पूजा अर्चना हो रही है। शिव मंदिरों में विशेष आयोजन हो रही है। धार्मिक आधार पर शिव पूजा का एक विशेष स्थान होता है। भगवान शिव को चढ़ने वाले आंकड़े के फूल, धतूरे, बेलपत्र, दूध आदि का विशेष महत्व होता है। सावन के महीने में ​बेलपत्र की डिमांड काफी बढ़ जाती है। लेकिन क्या आपको पता है कि शिवजी को ​बेलपत्र क्यों चढ़ाया जाता है और इसके तोड़ने और चढ़ाने के भी कुछ नियम होते हैं। यदि नहीं तो आइए आपको कुछ बातें बताते हैं…।

— बेलपत्र को संस्कृत में ‘बिल्वपत्र’ कहा जाता है। यह भगवान शिव को बहुत ही प्रिय है।
— ऐसा कहा जाता है कि बेलपत्र और जल से शिवजी का मस्तक शीतल रहता है और यह चढ़ाने वे प्रसन्न होते हैं।
— श्रद्धालु महादेव को प्रसन्न करने के लिए सावन के महीने में दूध मिश्रित गंगाजल के साथ बेलपत्र भी चढ़ाते हैं।
— चतुर्थी, अष्टमी, नवमी, चतुर्दशी और अमावस्या को, सं‍क्रांति के समय और सोमवार को बेलपत्र नहीं तोड़ना चाहिए।
— शास्त्रों के अनुसार यदि बेलपत्र उपलब्ध ना हो तो किसी और श्रद्धालु के चढ़ाए बेलपत्र को धोकर भी पुन: इस्तेमाल किया जा सकता है।


— बेलपत्र हमेशा टहनी से चुन-चुनकर ही तोड़ना चाहिए, कभी भी पूरी टहनी नहीं तोड़ना चाहिए।
— पत्ते हमेशा इस तरह तोड़ना चाहिए कि पेड़ को कोई नुकसान ना हो।
— कहा जाता है कि बेलपत्र तोड़ने से पहले और बाद में पेड़ को नमन करना चाहिए।
— शिव​लिंग पर बेलपत्र हमेशा उल्टा चढ़ाना चाहिए। चिकना भाग शिवलिंग पर होना चाहिए।
— बेलपत्र में चक्र और वज्र नहीं होना चाहिए।
— बेलपत्र 3 से लेकर 11 भाग के होते हैं। जितने पत्ते हों, उसे उतना ही अच्छा माना जाता है।

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