यूरोपीय संघ के 27 देशों में बीस साल बाद सिर्फ इलेक्ट्रिक कारें ही चलेंगी, कड़े होंगे उत्सर्जन मानक

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यूरोपीय संघ (ईयू) के तहत आने वाले 27 देशों ने हाल में प्रस्ताव रखा कि अगले 20 साल में पेट्रोल-डीजल कारों की बिक्री पूरी तरह से बंद कर देंगे। इनकी जगह इलेक्ट्रिक कारें लेंगी। ईयू ने यह प्रस्ताव जलवायु परिवर्तन रोकने को लेकर बनाया है और संसद द्वारा पारित करने पर इसे लागू कर दिया जाएगा। यूरोपीय संघ के जलवायु परिवर्तन मामलों पर बने आयोग के प्रस्ताव के मुताबिक, वर्ष 2035 से ही कारों पर उत्सर्जन मानक इतने कड़े कर दिए जाएंगे कि इनका इस्तेमाल करना आर्थिक लिहाज से बेहद मुश्किल हो जाएगा। वहीं, वर्ष 2030 तक कार्बन उत्सर्जन को मौजूदा स्तर से 37 प्रतिशत कम करने का जो लक्ष्य था, उसे भी बढ़ाकर 65 प्रतिशत किया जाएगा।

कई कंपनियों ने पहले ही इलेक्ट्रिक कारों में किया भारी निवेश

दरअसल, यूरोपीय संघ के इस कदम का अनुमान कुछ वर्षों पहले से ही लगाया जाने लगा था। यहां की कई कार निर्माता कंपनियों ने पहले ही बदलाव पर काम करना शुरू कर दिया। जानकारी के अनुसार, विश्व की चौथी बड़ी कार निर्माता कंपनी स्टेलांटिस ने 3.57 लाख करोड़ रुपए साल 2025 तक निवेश करके अपनी अधिकतर कारें बिजली की मोटर से चलने वाली तकनीक पर बनाने का निर्णय लिया है। कंपनी वर्तमान में भी बहुत से नए इलेक्ट्रिक मॉडल बाजार में लगातार उतारे जा रहे हैं।

यूरोप में अभी 9 में से एक कार इलेक्ट्रिक खरीद रहे लोग

कोरोना महामारी के दौरान यूरोप में कारों की बिक्री में तेजी से गिरावट आई। लेकिन इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री बढ़ी। मौजूदा आंकड़ों के अनुसार, यहां बिक रही हर नो में से एक कार इलेक्ट्रिक है। हालांकि, पब्लिक चार्जिंग स्टेशनों की कमी से फिलहाल लोग इन्हें खरीदने को लेकर संशय में हैं। वहीं संशय दूर करने के लिए कई सरकारों ने निवेश की घोषणा की है। इलेक्ट्रिक कार कंपनियां भी चार्जिंग स्टेशनों के लिए सरकार से ही निवेश करवाने पर तुली है। लेकिन विशेषज्ञ का मानना है कि निजी क्षेत्र को स्टेशनों पर भी काम करना होगा। यूरोप में लाखों इलेक्ट्रिक कारों के लिए हजारों जगह बनाना अकेले सरकार के लिए संभव नहीं दिखता है।

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