15 हजार करोड़ वैल्यू वाले फिनोलेक्स ग्रुप के छाबड़िया ब्रदर्स में क्यों बढ़ी टेंशन?

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भारत की नामी वायर और केबल बनाने वाली कंपनी फिनोलेक्स को एक बड़ी टेंशन का सामना करना पड़ रहा है। दरसअल, इसका कारण फैमली टेंशन है। फिनोलेक्स केबल्स के एग्जिक्यूटिव चेयरमैन पद पर दीपक छाबड़िया के बने रहने के बाद मामला बॉम्बे हाई कोर्ट तक पहुंच गया है। यह मामला ग्रुप की स्थापना करने वाले स्वर्गीय प्रह्लाद छाबड़िया के बेटे प्रकाश छाबड़िया ने उठाया है। आइए जानते हैं 15000 करोड़ की वैल्यू वाले फिनोलेक्स ग्रुप के छाबड़िया भाईयों में टेंशन क्यों बढ़ गई है…

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फिनोलेक्स ग्रुप की दो बड़ी कंपनियां शेयर बाज़ार में लिस्टेड

स्व. प्रह्लाद छाबड़िया द्वारा 1958 में स्थापित फिनोलेक्स कंपनी आज देश का एक बड़ा ग्रुप है। वर्तमान में फिनोलेक्स ग्रुप की दो कंपनियां शेयर बाज़ार में लिस्टेड है। इसमें फिनोलेक्स इंडस्ट्रीज और फिनोलेक्स केबल्स शामिल हैं। इन दोनों ही कंपनियों की वैल्यूएशन करीब 15,000 करोड़ रुपए हैं। मीडिया में छपी ख़बरों के मुताबिक, प्रकाश छाबड़िया की ओर से अपने चचेरे भाई दीपक के खिलाफ बॉम्बे हाई कोर्ट में दायर याचिका दायर हुई है। याचिका में फिनोलेक्स केबल्स के एग्जिक्यूटिव चेयरमैन के तौर पर कार्य करने से रोकने के लिए ऑर्डर जारी करने को कहा गया है।

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4 अप्रैल को होगी हाई कोर्ट में मामले की सुनवाई

फिनोलेक्स कंपनी के मालिकों में से एक प्रकाश छाबड़िया की ओर से अपने चचेरे भाई दीपक के खिलाफ दायर हुई याचिका पर बॉम्बे हाई कोर्ट में 4 अप्रैल को सुनवाई होगी। दरअसल, इस पूरे मामले की शुरुआत बीती एजीएम से हुई थी। पिछली एजीएम में दीपक की दोबारा नियुक्ति का प्रपोजल पेश किया गया था। प्रकाश ने आरोप लगाया था कि दीपक को ऑर्बिट इलेक्ट्रिकल्स के ऑथराइज्ड सिग्नेटरी के तौर पर अपनी दोबारा नियुक्ति के खिलाफ वोट देने का निर्देश दिया गया था, लेकिन उन्होंने इसका पालन नहीं करते हुए नियम तोड़े हैं। इसके बाद के वोटिंग नतीजों के अनुसार, टाटा म्यूचुअल फंड, डीएसपी म्यूचुअल फंड, टॉरस म्यूचुअल फंड और यूनियन म्यूचुअल फंड ने दीपक छाबड़िया की दोबारा नियुक्ति वाले रिजॉल्यूशन के खिलाफ वोट दिया था। जबकि आदित्य बिड़ला सनलाइफ, एलएंडटी म्यूचुअल फंड, आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल और महिंद्रा वोटिंग से दूर रहे थे।

फिनोलेक्स केबल्स में ऑर्बिट इलेक्ट्रिकल्स की 32 फीसदी हिस्सेदारी

दीपक छाबड़िया की दोबारा नियुक्ति का विरोध करने वाले ज्यादातर म्यूचुअल फंड्स का कहना था कि दीपक की दोबारा नियुक्ति से दोनों परिवारों के बीच दरार बढ़ेगी और इससे कंपनी पर असर पड़ सकता है। गौरतलब है कि बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज की जानकारी के अनुसार फिनोलेक्स केबल्स में ऑर्बिट इलेक्ट्रिकल्स की 32 फीसदी साझेदारी है और कंपनी पर प्रकाश छाबड़िया का कंट्रोल हैं।

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इसके अलावा प्रकाश के मालिकाना हक वाली फिनोलेक्स इंडस्ट्रीज के पास फिनोलेक्स केबल्स में सिर्फ 15 फीसदी हिस्सेदारी है। जबकि दीपक की कंपनी में मात्र 8 फीसदी हिस्सेदारी है। फिनोलेक्स केबल्स में म्यूचुअल फंड्स का 19 फीसदी हिस्सा बताया जाता है। अब इस मामले के हाई कोर्ट में जाने से छाबड़िया बंधुओं के बीच तकरार और बढ़ सकती है। जिससे कंपनी को आने वाले दिनों में बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है।

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