आख़िर क्यों रवि शास्त्री एक बार फिर टीम इंडिया का कोच बनने में सफ़ल रहे?

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क्रिकेट सलाहकार समिति (सीएसी) ने रवि शास्त्री को एक बार फिर से भारतीय क्रिकेट टीम का मुख्य कोच नियुक्त कर दिया है। यह वही नाम है जो लगभग पहले से ही तय माना जा रहा था। कपिल देव की अगुवाई वाली सीएसी में शांता रंगास्वामी और अंशुमन गायकवाड़ शामिल थे। कपिल देव ने कोच की नियुक्ति की घोषणा करने के बाद कहा कि रवि शास्त्री और माइक हेसन के बीच मुख्य कोच पद के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा थी। ऐसा कहा जा रहा है कि शास्त्री के फिर से कोच पद की रेस जीतने के पीछे उनका एक बयान था। शास्त्री ने सीएसी से साक्षात्कार के समय कहा कि विश्व कप सेमीफाइनल की हार को अगर छोड़ दिया जाए तो टीम इंडिया ने अच्छा प्रदर्शन किया है।

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सीएसी ने क्या इस वजह से फिर बनाया शास्त्री को कोच!

पूर्व भारतीय क्रिकेटर रवि शास्त्री लगातार दूसरी बार टीम इंडिया के कोच बनाए गए हैं। शास्त्री को वर्ष 2021 में होने वाले टी-20 विश्व कप तक मुख्य कोच पद की जिम्मेदारी दी गई है। इससे पहले उन्हें वर्ष 2017 में टीम इंडिया का मुख्य कोच नियुक्त किया गया था। अब वह 2021 टी-20 विश्व कप तक जिम्मेदारी संभालेंगे। इस दौरान आईसीसी के दो बड़े टूर्नामेंट्स आयोजित होने है, जिसमें 2020 में ऑस्ट्रेलिया और 2021 में भारत में होने वाला टी-20 विश्व कप शामिल हैं। माना जा रहा है कि कप्तान विराट कोहली की पसंद पर सीएसी ने यह फैसला लिया है। कोहली ने विंडीज दौरे पर जाने से पहले रवि शास्त्री को फिर से कोच बनाने का समर्थन किया था। सीएसी ने शास्त्री का स्काइप के जरिए इंटरव्यू लिया था, जिसमें उनसे कई सवाल पूछे गए।

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रवि शास्त्री को फिर से कोच नियुक्त किए जाने से रोहित शर्मा जरूर निराश होंगे। कथित तौर पर यह कहा जा रहा है कि जब तक रवि शास्त्री टीम इंडिया के कोच रहेंगे तब तक रोहित शर्मा को किसी भी फॉर्मेट की कप्तानी मिलना मुश्किल है। रवि शास्त्री और विराट कोहली की जुगलबंदी जगजाहिर है। ऐसे में कोच शास्त्री कभी नहीं चाहेंगे कि रोहित को विराट पर तरजीह दी जाए। जब भी विराट की कप्तानी पर कोई संकट आता दिखेगा, कोच शास्त्री विराट के साथ मज़बूती से खड़े रहेंगे।

बहरहाल, सीएसी का मानना है कि रवि शास्त्री भारतीय टीम को अच्छी तरह समझते हैं। वह पिछले दो साल से टीम इंडिया के साथ काम कर रहे हैं और आईसीसी के बड़े टूर्नामेंट्स को देखते हुए किसी और को कोच बनाना नुकसानदेय हो सकता है। ऐसे में रवि शास्त्री और विराट कोहली की जोड़ी टीम इंडिया को आगे ले जाने में निर्णायक साबित होगी। ख़ैर, यह भविष्य के गर्भ में है कि सीएसी का यह फैसला टीम इंडिया के लिए कितना सही साबित होगा।

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इन उपलब्धियों के दम पर शास्त्री ने फिर मारी बाज़ी?

57 वर्षीय रवि शास्त्री ने भारत के लिए 80 टेस्ट व 150 वनडे मैच खेले हैं। अगर अनुभव की बात करें तो वह वर्ष 2014 से 2016 तक टीम इंडिया के निदेशक रहे हैं। वर्ष 2017 में टीम के कोच अनिल कुंबले को विराट कोहली के कहने पर हटाने के बाद रवि शास्त्री को टीम इंडिया का मुख्य कोच बनाया गया। कोहली ने ही शास्त्री के नाम पर सहमति दी थी। रवि शास्त्री को साल 2017 में भारतीय टीम का मुख्य कोच बनाने के बाद रिकॉर्ड काफी अच्छा रहा था। इस दौरान पिछले साल टीम इंडिया ने ऑस्ट्रेलिया की सरजमीं पर पहली बार टेस्ट सीरीज जीतीं। शास्त्री के कोच रहते भारतीय टीम ने जुलाई 2017 से 21 टेस्ट में से 13 में जीत दर्ज की।

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टी-20 इंटरनेशनल की बात करें तो टीम इंडिया ने रवि शास्त्री की कोचिंग में 36 मैच खेले और उनमें से 25 में जीत दर्ज की। एकदिवसीय मुकाबलों में भी टीम का प्रदर्शन अच्छा कहा जा सकता है। टीम 60 वनडे मैचों में से 43 मुकाबले जीतने में कामयाब रही। यानि रवि शास्त्री के पहले कार्यकाल में टीम इंडिया ने 70 फीसदी मैचों में सफ़लता हासिल की है। इनमें दो एशिया कप खिताब, ऑस्ट्रेलिया में ऐतिहासिक टेस्ट सीरीज जीत जैसी कुछ बड़ी उपलब्धियां भी शामिल हैं। वहीं, टीम इंडिया इस वक़्त टेस्ट रैंकिंग में पहले नंबर पर है। हालांकि, शास्त्री और विराट की अगुवाई में भारतीय टीम कोई बड़ा टूर्नामेंट नहीं जीत सकी है। इसलिए कुछ सवालिया निशान भी हैं।

 

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