वेडिंग इंश्योरेंस : शादी के खर्चों को करें सुरक्षित ताकि ना हो आगे परेशानी

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शादियों का सीजन एक बार फिर शुरू होने वाला है। शहनाईयां बजने के लिए तैयार हैं और शादी से जुड़ी तैयारियां जोर शोर से चल रही हैं। जिनके घरों में शादी है, वे सभी चाहते हैं कि शादी बिना विघ्न अच्छे से निपट जाए। लेकिन परिस्थितियों का कुछ कहा नहीं जा सकता। कई बार शादी के दौरान नुकसान उठाना पड़ जाता है, जिससे परिवार को काफी नुकसान झेलना पड़ता है। ऐसे में यदि वेडिंग इंश्योरेंस करवा लिया जाए तो बहुत हद तक रुपयों की मार को कम किया जा सकता है।

शादी के खर्चे बढ़ रहे हर साल

शादी में डेकोरेशन, गार्डन, भव्यता, खाना, आतिशबाजी, कपड़े, फोटोग्राफी जैसे विभिन्न कामों पर लाखों खर्चा किया जाता है। पिछले कुछ समय में शादियों का बजट लगातार बढ़ता जा रहा है। अब शादियों के खर्चे 10 लाख से लेकर दो करोड़ तक के हो रहे हैं। ऐसे में यदि कोई अनहोनी घटना हो जाए तो सीधे—सीधे परिवार वालों को इतना बड़ा नुकसान उठाना पड़ता है। इस समस्या से बचने के लिए कई बीमा कम्पनियां वेडिंग इंश्योरेंस कर रही हैं ताकि आकस्मिक होने वाले नुकसान से सुरक्षित रहा जा सके।

इसलिए है जरूरी इंश्योरेंस

भारत में शादी समारोह में जमकर पैसा खर्च किया जाता है। दूल्हे-दूल्हन की महंगी ड्रेस से लेकर ज्वैलरी का भी लाखों का बजट होता है। इसके अलावा कार्ड छपने, समारोह स्थल की बुकिंग, हलवाई, डेकोरेटर और ट्रैवल बुकिंग आदि पर भी भारी भरकम रकम खर्च होती है। अगर शादी समारोह में कोई अप्रिय घटना घट जाती है तो वेडिंग इश्योरेंस होने पर इसका मुआवजा मिल जाता है। हालांकि, यह इस बात पर निर्भर करता है कि कितनी राशि का बीमा कराया गया है। इसके अलावा अगर किसी कारणवश आपकी शादी की डेट बढ़ गई है या रद्द हो गई है, तो इसका दावा भी आप कर सकते हैं।

कम प्री​मियम, ज्यादा फायदा

शादी समारोह को सुरक्षित बनाने के लिए बहुत कम खर्च पर वेडिंग को इंश्योर किया जा सकता है। बीमा से जुड़े लोगों के अनुसार कुल खर्च का कवर पर प्रीमियम 0.75 फीसदी से एक फीसदी तक ही बैठता है। अगर कोई 10 लाख रुपये खर्च का कवर लेता है तो उसका प्रीमियम 8,000 रुपये से 15,000 रुपये के बीच आता है। आईसीआईसीआई लोम्बार्ड, एचडीएफसी एर्गो, बजाज ऑलियांज जैसी कंपनियां वेडिंग इंश्योरेंस देती हैं।

हर बिल रखें संभालकर

यदि आपने इंश्योरेंस करवाने का डिसीजन लिया है तो सबसे पहले अपने सभी बिलों को संभालकर रखना शुरू कर दें। यदि कोई अप्रिय घटना घटित होती है तो बीमा क्लेम के लिए आपको एफआईआर की कॉपी के साथ सभी बिलों को दिखाना होगा।
पॉलिसी लेते समय कंपनियां समारोह स्थल, कार्यक्रमों की सूची, दूल्हा और दुल्हन की जानकारी, करीबी रिश्तेदारों के परिचय आदि जैसी जानकारियां लेती हैं।

आपसी झगड़े से हुआ नुकसान नहीं होगा कवर

शादी समारोह के बीच झगड़े से होने वाले नुकसान या शादी रद्द होने पर कवर नहीं मिलता है। इसके अलावा लापरवाही और आपराधिक छेड़छाड़ की घटनाओं से शादियां रद्द होने पर भी कवर नहीं मिलेगा।
बीमा लेने वाले व्यक्ति की न्यूनतम आयु 18 वर्ष और अधिकतम आयु 40 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए। वह भारत का नागरिक हो।

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