वह देश जिसने हिंदी को अदालत की तीसरी आधिकारिक भाषा का दर्जा दिया

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वैसे तो हिंदी विश्व की सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषाओं में शुमार है और अब अन्य देशों में भी इस भाषा का वर्चस्व बढ़ रहा है। हाल में अबूधाबी में हिंदी को अदालत में आधिकारिक भाषा का दर्जा प्राप्त हुआ है, इससे पहले कनाड़ा ऐसा कर चुका है।

इस ऐतिहासिक फैसले के अनुसार अबुधाबी में हिंदी को अदालत में तीसरी आधिकारिक भाषा का दर्जा दिया गया है। यहां की अदालत में अरबी और अंग्रेजी भाषा को भी यहां आधिकारिक भाषा का दर्जा प्राप्त है। न्यायपालिका ने यह फैसला न्याय का दायरा बढ़ाने के लिए किया है।

अरबी, अंग्रेजी के बाद हिंदी को तीसरी आधिकारिक भाषा का दर्जा
अबुधाबी के न्याय विभाग ने शनिवार को कहा कि उसने श्रम मामलों में अरबी और अंग्रेजी के अलावा हिंदी भाषा में भी बयान, दावे और अपील दायर करने की शुरुआत की है।
उन्होंने आगे कहा कि हमारा लक्ष्य हिंदी भाषाई लोगों को मुकद्मों की प्रक्रिया सीखने में मदद करना है। इसके अलावा उनके अधिकारों और कर्तव्यों को भाषाई अड़चनों के बिना समझाना चाहते हैं। हिंदी भाषियों को अबुधाबी न्यायिक विभाग की आधिकारिक वेबसाइट के जरिए रजिस्ट्रेशन की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है।

अबुधाबी न्यायिक विभाग के अवर सचिव यूसुफ सईद अल आबरी ने कहा कि कई भाषाओं में याचिकाओं, आरोपों और अपीलों को स्वीकार करने के पीछे हमारा मकसद 2021 की भविष्य की योजना को देखते हुए सभी के लिए न्याय व्यवस्था को प्रसारित करना है। हम न्यायिक व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी बनाना चाहते हैं।

आबरी ने बताया कि शेख मंसूर बिन जायद अल नाह्यान, उप प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के मामलों के मंत्री और अबुधाबी न्यायिक विभाग के अध्यक्ष के निर्देेशों पर न्यायिक व्यवस्था में कई भाषाओं को शामिल किया गया।

द्विभाषी कानूनी व्यवस्था का पहला चरण नवंबर 2018 में लॉन्च किया गया था, इसके तहत सिविल और वाणिज्यिक मामलों में अगर वादी विदेशी हो तो अभियोगी केस के दस्तावेजों का अंग्रेजी में अनुवाद करना होता है।

सबसे बड़ा प्रवासी समुदाय है हिंदी भाषी लोग
संयुक्त अरब अमीरात की कुल जनसंख्या करीब 94 लाख, जिसमें से 26 लाख भारतीय प्रवासी हैं।
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, संयुक्त अरब अमीरात की आबादी का करीब दो-तिहाई हिस्से में प्रवासी लोग निवास करते हैं। भारतीय यूएई की जनसंख्या का 30 फीसदी हैं, जिनकी जनसंख्या 26 लाख है और यह देश का सबसे बड़ा प्रवासी समुदाय है।

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