पाठक है तो खबर है। बिना आपके हम कुछ नहीं। आप हमारी खबरों से यूं ही जुड़े रहें और हमें प्रोत्साहित करते रहें। आज 10 हजार लोग हमसें जुड़ चुके हैं। मंजिल अभी आगे है, पाठकों को चलता पुर्जा टीम की ओर से कोटि-कोटि धन्यवाद।

यह बीमारी बनीं परवीन बाबी की मौत का कारण, जानिए पूरी घटना

0 minutes read

अपने समय की मशहूर दिवंगत बॉलीवुड अभिनेत्री परवीन बाबी का आज 70वां जन्मदिन है। उनकी गणना बॉलीवुड की सबसे कामयाब अभिनेत्रियों में की जाती है। परंतु बाबी की जिंदगी बहुत उतार—चढ़ाव से भरी रही। परवीन फिल्म निर्माता महेश भट्ट से प्यार करती थी और उनके साथ ‘लिव—इन—रिलेशन’ में रहती थी। लेकिन दोनों की प्यार भरी जिन्दगी काफी दुखद अंत हुआ, क्योंकि परवीन को पेरानोइडल सीजोफ्रेनिया नामक रोग था, जो उनकी मौत का कारण बना।

क्या होता है सीजोफ्रेनिया

सीजोफ्रेनिया Schizophrenia एक मानसिक बीमारी है। इस रोग से पीड़ित व्यक्ति वास्तविक और काल्पनिक वस्तुओं को समझने में भूल कर बैठता है। कई बार रोगी खुद में ही खोया-खोया रहता है। कई सामाजिक अवसरों पर वह तय नहीं कर पाता/पाती कि उसे क्या प्रतिक्रिया देनी है।

क्या हैं इस बीमारी के लक्षण

  • सीजोफ्रेनिया बीमारी से पीड़ित अलग-अलग व्यक्तियों में संकेत भी अलग-अलग होते हैं। इसमें लोगों के भीतर सिंपटम धीरे-धीरे महीनों या कई वर्षों में नजर आने लगते हैं।
  • इसमें रोगी को कुछ ऐसा देखना और सुनना जो वाकई वहां मौजूद न हो।
  • उसको ऐसा लगता हो जैसे लोग उसे छिप कर देख रहे हैं।
  • रोगी को लगता है की उसके परिजन उसके शत्रु बन गए हैं जो अलग—अलग प्रकार से उसे प्रताड़ित करते हैं या मारना चाहते हैं।
  • लिखते या बोलते समय कुछ मामलों में अजीबोगरीब प्रकार से उलझ जाना।
  • शरीर को बेढंगे तरीके से रखना।
  • हर महत्वपूर्ण मौके पर अलग तौरतरीके से रिएक्ट करना।
  • पढ़ाई-लिखाई से एकदम से अनमना हो जाना।
  • व्यक्तित्व में बदलाव।
  • अपने नजदीकी और प्यार करने वालों से कटा-कटा रहना।
  • सोने या फिर ध्यान केन्द्रित करने में दिक्कतें आना।
  • रहस्यमयी चीजों या फिर धर्म से अनावश्यक जुड़ाव रखना।

आज पूरी दुनिया की जनसंख्या के एक फीसद लोग Schizophrenia से पीड़ित हैं।

यूं रहा परवीन बाबी का बॉलीवुड का सफर

परवीन बाबी का जन्म 4 अप्रैल, 1949 को सौराष्ट्र के जूनागढ़ के एक मध्यम वर्गीय मुस्लिम परिवार में हुआ था। परवीन (Parveen Babi) सिनेमाई पर्दे पर वह सब कुछ 70 के दशक में कर रही थीं, जो अपनी चाहत, आधुनिकता और आत्म निर्भरता के नाम पर महिलाएं आज करना चाहती हैं।

परवीन बाबी का बॉलीवुड में फिल्म कॅरियर के तीन दशक से ​भी अधिक रहा। इस दौरान उन्होंने कई महत्त्वपूर्ण भूमिकाएं जो आज भी लोगों को याद आती हैं।

जब भारतीय सिनेमा में अभिनेत्रियां सलवार सूट और साड़ी पहन कर ही अभिनय करती थी, उस जमाने में परवीन हीे एक ऐसी अभिनेत्री थी जो पूरी तरह पाश्चात्य रंग-ढंग में नजर आती थी।

 

परवीन बाबी को फिल्म निर्देशक बीआर इशारा ने पहली बार क्रिकेटर सलीम दुर्रानी के साथ 1973 में फिल्म ‘चरित्र’ में मौका दिया। फिल्म तो फ़्लॉप हो गई, लेकिन परवीन बाबी का जादू सर चढ़कर बोलने लगा।

परवीन को पहली सफलता 1974 में ‘मजबूर’ फिल्म से मिली, जिसमें उनके हीरो अमिताभ बच्चन थे। टाइम के कवर पर जगह पाने वाली पहली बॉलीवुड कलाकार परवीन बाबी थीं।

फिल्मी कॅरियर में वो जितनी कामयाब हुईं, परंतु अपने उन्हें अपने निजी जीवन काफी उतार—चढाव देखने को मिले।

सबसे उनका अफेयर डैनी के साथ चला। डैनी ने फ़िल्मफ़ेयर को दिए एक इंटरव्यू में बताया था कि परवीन बाबी (Parveen Babi) और उनका साथ तीन-चार साल का रहा था, इसके बाद दोनों के रास्ते अलग हो गए थे।

डैनी के बाद परवीन बाबी की जिन्दगी में कबीर बेदी आये।

परवीन बाबी ने ‘द इलस्ट्रेटेड वीकली ऑफ इंडिया’ में अपना एक संस्मरण लिखा था – “मेरा करियर इससे बेहतर कभी नहीं रहा। मैं नंबर एक की रेस में हूं। बंबई में कोई ऐसी फिल्म नहीं बन रही है, जिसमें परवीन बाबी ना हो। लोग मेरी इस कामयाब वापसी से चकित हैं। कई लोग इसे मेरा लक बता रहे हैं, लेकिन मैं आपको बताना चाहती हूं कि इसमें लक की कोई बात नहीं है, ये बिल्कुल पसीना और आंसू है जो टूटे दिल के साथ कठिन मेहनत से आई है।”

कबीर बेदी के साथ ब्रेकअप को अपने जीवन का टर्निंग प्वाइंट बताने वाली परवीन बाबी इसके बाद महेश भट्ट के रोमांस में पड़ीं। दोनों का रोमांस 1977 के आखिर में शुरू हुआ था।

महेश भट्ट के साथ रोमांस के दौरान ही परवीन बाबी को मानसिक बीमारी शुरू हुई थी जिसे महेश भट्ट ने अपने कई इंटरव्यू में पैरानायड सीजोफ्रेनिया बताया है। हालांकि परवीन बाबी ने खुद को कभी इस बीमारी की चपेट में नहीं बताया। उन्होंने ये जरूर माना था कि आनुवांशिक मानसिक बीमारी ने उन्हें चपेट में ले लिया था।

1983 में परवीन बाबी ने बॉलीवुड को छोड़ दिया और वे कुछ समय तक वह बैंगलोर में रहीं। यहां से वे इलाज के लिए अमरीका चली गईं, पर उन्हें मानसिक बीमारी का कोई इलाज नहीं मिला।

अपनी बीमारी के दौरान ही उन्होंने अमिताभ बच्चन सहित दुनिया के नामचीन लोगों से अपनी जान को खतरा बताया था। 1989 में परवीन बाबी भारत लौट आईं और 2005 तक मुंबई में रहीं।

मानसिक बीमारी और सनक की हद तक अपनी शर्तों पर जीने वाली शकमिज़ाजी के बाद भी परवीन बाबी अपने जीवन के अंतिम दिनों तक आत्मनिर्भर बनी रहीं, किसी की मोहताज नहीं रहीं।

करीब एक दशक तक का स्टारडम और क़रीब 50 फिल्में उनके जीवन के सूनेपन को भर नहीं पाईं, यही अकेलापन उन्हें आखिरी समय तक सालता भी रहा। ऐसे में परवीन बाबी का साल 2005 में निधन हो गया।

COMMENT

Chaltapurza.com, एक ऐसा न्यूज़ पोर्टल जो सबसे पहले, सबसे सटीक की भागमभाग के बीच कुछ अलग पढ़ने का चस्का रखने वालों का पूरा खयाल रखता है। हम देश-विदेश से लेकर राजनीतिक हलचल, कारोबार से लेकर हर खेल तो लाइफस्टाइल, सेहत, रिश्ते, रोचक इतिहास, टेक ज्ञान की सभी हटके खबरों पर पैनी नजर रखने की कोशिश करते हैं। इसके साथ ही आपसे जुड़ी हर बात पर हमारी “चलता ओपिनियन” है तो जिंदगी की कशमकश को समझने के लिए ‘लव यू जिंदगी’ भी कुछ अलग है। हमारी टीम का उद्देश्य आप तक अच्छी और सही खबरें पहुंचाना है। सबसे अच्छी बात यह है कि हमारे इस प्रयास को निरंतर आप लोगों का प्यार मिल रहा है…।

Copyright © 2018 Chalta Purza, All rights Reserved.