अब आप क्या चाहते हैं पत्रकार हाथ में छुरा या बंदूक लेकर प्रधानमंत्री का इंटरव्यू ले

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समाचार एजेंसी एएनआई की संपादक स्मिता प्रकाश ने हाल ही देश के प्रधानमंत्री का इंटरव्यू लिया है जिसे लेकर घमासान मचा हुआ है। इंटरव्यू खत्म होने के बाद बुद्धिजीवियों का एक बड़े तबके ने इंटरव्यू को फिक्स करार दे दिया और पत्रकार के लिए शब्दों की गरिमा को भी तार तार कर दिया गया। पूरा इंटरव्यू देखने के बाद ना तो स्मिता प्रकाश मोदी के सामने असहज नजर आईं और ना ही मोदी उनके सवालों से कहीं असहज हुए। पहली बार ऐसा हुआ है कि पीएम से विपक्ष की नेता की तरह स्मिता प्रकाश ने उन्हें उन सभी मामलों पर घेरा जो संसद और सभाओं में विपक्षी करते हैं। जानने की बात तो ये है कि एक पत्रकार से लोग और क्या उम्मीद करते हैं कि क्या अब उन्हें हाथ में छुरा या बंदूक की नोंक पर पीएम से सवाल करने चाहिए। एक पत्रकार को भी पीएम पद की गरिमा का उतना ही खयाल रखना पड़ता है जितना की खुद पीएम को।

मोदी का ये इंटरव्यू भी देश के लिए बहुत जरूरी था क्योंकि काफी समय से उन पर विपक्ष हमले कर रहा है और लोग भी उनको सुनना चाह रहे थे। मीडिया ही एक ऐसा जरिया है जो ये सब मुमकिन बनाता है। स्मिाता प्रकाश ने राफेल, नोटबंदी, बेरोजगारी और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे सभी मुद्दों पर पीएम से सवाल किए जिसके जवाब भी पीएम द्वारा दिए गए। पत्रकार का काम केवल सवाल करना है हां ये जरूर है कि जो व्यक्ति जवाब दे रहा है शायद उसकी बात से आप संतुष्ट हो सकते हो या नहीं भी। इस लेख में हम मोदी की वकालत नहीं कर रहे बल्कि पूरे भारतीय मीडिया को एक लाठी से आंक रहे हैं।

वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने भी स्मिता के इस इंटरव्यू की खूब तारीफ की और राहुल गांधी के बयान की आलोचना की है। सरदेसाई के अलावा काफी वरिष्ठ पत्रकार भी स्मिता के साथ सहमति रखते हैं वहीं उन्हें अभी भी एक—एक कर अपने आलोचकों को जवाब देना पड़ रहा है। इस समस्या की जड़ भी पिछले लोकसभा चुनावों के वक्त से शुरू हो गई थी जहां लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहे जाने वाले हमारा मीडिया दो धड़ों में बंटना शुरू हो गया था। अगर किसी को जरा सी भी समझ हो तो ये महज एक इंटरव्यू था ना कि कोई डिबेट जिसमें आजकल पत्रकार तिली लगा देता है और उसके बाद में पार्टी प्रवक्ता बिना सिर पैर की बहस करने लग जाते हैं। खैर कुल मिलाकर कहें तो नरेन्द्र मोदी का अब तक का ये सबसे अच्छा और संवाद से भरा इंटरव्यू माना जा सकता है हां इस पर मोदी के जवाबों पर किसी भी तरह की प्रतिक्रिया आना स्वभाविक है किसी पत्रकार को जिम्मेदार ठहराना किसी भी तरह से ठीक नहीं है।

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