प्यारेलाल ने अपने जोड़ीदार के साथ सात बार जीता सर्वश्रेष्ठ संगीतकार का फिल्मफ़ेयर पुरस्कार

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संगीतकार लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल की जोड़ी अपने समय में बेहद लोकप्रिय और सफ़ल रहीं। वर्ष 1998 में अपने जोड़ीदार लक्ष्मीकांत के निधन के बाद प्यारेलाल ने संगीत देना बंद कर दिया था। इस मशहूर संगीतकार का आज 82वां जन्मदिन है। उनका जन्म 3 सितंबर, 1940 को महाराष्ट्र के मुंबई में प्रसिद्ध तुरही वादक पंडित रामप्रसाद शर्मा के घर में हुआ था। प्यारेलाल का बचपन से ही संगीत के प्रति लगाव रहा और वह बड़े होकर संगीतकार बनना चाहते थे। उन्होंने संगीत की प्रारंभिक शिक्षा अपने पिता पंडित रामप्रसाद से हासिल की थी। बाद में वो गोवा आ गए और यहां एंथोनी गोंजालविस से वॉयलिन सीखा। ऐसे में इस ख़ास मौके पर जानते हैं उनके जीवन के बारे में…

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परिवार की आर्थिक मदद करने के लिए बजाया वॉयलिन

गोवा में वॉयलिन सीखने के बाद अपने परिवार की आर्थिक मदद करने के लिए प्यारेलाल ने रणजीत स्टूडियो में वॉयलिन बजाना शुरू कर दिया था। इस दौरान एक बार उन्हें लता मंगेशकर के संगीत कार्यक्रम में हिस्सा लेने का मौका मिला। लताजी ने लक्ष्मीकांत और प्यारेलाल के टैलेंट को पहचाना। उन्होंने संगीतकार शंकर जयकिशन, एस.डी.बर्मन और सी.रामचंद्र को सहायक के लिए लक्ष्मीकांत व प्यारेलाल के नाम का सुझाव दिया। इसके बाद लक्ष्मीकांत और प्यारेलाल ने जोड़ीदार के रूप में बॉलीवुड कॅरियर की शुरुआत संगीतकार कल्याणजी-आनंदजी के असिस्टेंट के तौर पर की थी।

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लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने असिस्टेंट के तौर पर ‘सट्टा बाजार’, ‘छलिया, ‘दिल भी तेरा हम भी तेरे’ और ‘मदारी’ जैसी कई फिल्मों में काम किया। काम के सिलसिले में उनकी मुलाक़ात भोजपुरी फिल्मों के निर्माता के. परवेज से हुईं, जिन्होंने लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल की जोड़ी को चार फिल्मों में संगीत देने का प्रस्ताव दिया था। लेकिन, दुर्भाग्यवश इनमें से किसी भी फिल्म में उन्हें म्यूजिक देने का मौका नहीं मिला।

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‘पारसमणि’ से चर्चा में आई लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल की जोड़ी

संगीतकार लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल की जोड़ी को पहली बड़ी सफ़लता निर्माता-निर्देशक बाबू भाई मिस्त्री की क्लासिक फिल्म ‘पारसमणि’ से मिली थी। एक से बढ़कर गीत-संगीत और अभिनय से सज़ी इस फिल्म की कामयाबी ने लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल की जोड़ी को संगीतकार के रूप में बॉलीवुड में स्थापित कर दिया था। ऐसा कहा जाता है कि फिल्म ‘पारसमणि’ में लता मंगेशकर से गवाने के लिए लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल की जोड़ी ने अपनी जेब से कुछ पैसे भी दिए थे। इस फिल्म को मिली अपार सफ़लता के बाद लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल की जोड़ी ने फ़िर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। दोनों से कई दशकों तक बेहतरीन म्यूजिक देकर संगीत प्रेमियों का दिल जीत लिया।

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‘अमर अकबर एंथनी’ के गानों ने दिलाया बड़ा सम्मान

अपने संगीत कॅरियर में बॉलीवुड को सैंकड़ों हिट देने वाली लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल की जोड़ी को वर्ष 1977 में आई फिल्म ‘अमर अकबर एंथनी’ के संगीत ने बड़ा सम्मान दिलाया। इस फिल्म के सभी गाने सुपरहिट साबित हुए। फिल्म का एक गाना ‘हमको तुमसे हो गया है प्यार’ को बॉलीवुड संगीत जगत की सबसे अमूल्य धरोहर के रूप में याद किया जाता है। इस गाने को पहली और अंतिम बार लता मंगेशकर, मोहम्मद रफ़ी, मुकेश और किशोर कुमार जैसे सुप्रिसिद्ध पार्श्वगायकों ने आवाज़ दी थी। इसके बाद प्यारेलाल ने फिल्म ‘अमर अकबर एंथोनी’ के सॉन्ग ‘माई नेम इज एंथनी गोंजालविस’ के जरिए अपने संगीत शिक्षक एंथनी गोंजालविस को श्रद्धांजलि दीं।

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बॉलीवुड की सबसे सफ़ल जोड़ियों में से एक

लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल की संगीतकार जोड़ी बॉलीवुड की अब तक की सबसे सफ़ल जोड़ियों में से एक मानी जाती हैं। इन दोनों की जोड़ी को सात बार सर्वश्रेष्ठ संगीतकार के फिल्म फेयर पुरस्कार से नवाज़ा गया। साल 1998 में लक्ष्मीकांत की मृत्यु के साथ ही यह जोड़ी हमेशा के लिए टूट गईं। अपने जोड़ीदार लक्ष्मीकांत की अचानक मौत से प्यारेलाल को गहरा सदमा लगा। इसके बाद उन्होंने फिल्मों में संगीत देना छोड़ दिया। संगीतकार प्यारेलाल का जीवन के प्रति फ़लसफ़ा उनके द्वारा तैयार किए गए एक गीत की इन पंक्तियों में नज़र आता है। गीत है.. ‘आदमी मुसाफ़िर है, आता है जाता है.. आते जाते रास्ते में यादें छोड़ जाता है।’

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