लताजी की म्यूजिक एकेडमी में हुई थी लक्ष्मीकांत की अपने जोड़ीदार प्यारेलाल से पहली मुलाकात

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हिंदी सिनेमा के प्रसिद्ध संगीतकार लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल की जोड़ी ने कई दशकों तक श्रोताओं के दिलों पर राज किया। इस जोड़ी ने बॉलीवुड संगीत की दुनिया में एक स्वर्णिम युग की शुरुआत की। वर्ष 1963 में शुरू हुआ यह सफर तीन दशक से ज्यादा समय तक कायम रहा। इन दोनों की जोड़ी में से एक लक्ष्मीकांत की 25 मई को 23वीं पुण्यतिथि है। ऐसे में इस खास अवसर पर जानते हैं उनके जीवन के बारे में…

एक बेहद गरीब परिवार में हुआ था जन्म

संगीतकार लक्ष्मीकांत का पूरा नाम लक्ष्मीकांत शांताराम कुदलकर था। लक्ष्मीकांत का जन्म 3 नवंबर, 1937 को महाराष्ट्र के मुंबई में हुआ था। उनका परिवार आर्थिक रूप से बेहद कमजोर था। बहुत छोटी उम्र में अपने पिता को खो देने के बाद उनके घर की पूरी जिम्मेदारी लक्ष्मीकांत के कंधो पर आ गई थी, जिसके कारण उन्हें अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी।

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बचपन से ही संगीत में था रूझान

लक्ष्मीकांत की बचपन से ही संगीत में बड़ी दिलचस्पी थी। संगीत के प्रति उनके रूझान को देखते हुए उनके पिता के एक संगीतकार मित्र ने उन्हें मेंडोलिन सीखने की सलाह दी थी। इसके बाद उन्होंने मशहूर सारंगी वादक हुसैन अली से संगीत की प्रारंभिक शिक्षा ली।

लक्ष्मी कांत को ऐसे मिला पहला ब्रेक

लक्ष्मीकांत ने महज 10 साल की छोटी उम्र में ही घर की जरूरतों को पूरा करने के लिए कॉन्सर्ट शो में जाना शुरू कर दिया था। ये उस वक्त की बात है जब लता मंगेशकर के कोलाबा में आयोजित हो रहे एक शो में लक्ष्मीकांत मेंडोलिन बजा रहे थे। उनकी मेंडोलिन बजाने की शैली से लताजी इतनी प्रभावित हुई कि उन्होंने लक्ष्मीकांत को अपनी म्यूजिक एकेडमी का हिस्सा बना लिया।

फिल्म ‘पारसमणि’ से जोड़ी ने बॉलीवुड में डेब्यू किया

लताजी की म्यूजिक एकेडमी में लक्ष्मीकांत की मुलाकात प्यारेलाल से हुई। लक्ष्मीकांत अपने जोड़ीदार प्यारेलाल से उम्र में 3 साल बड़े थे। धीरे-धीरे इन दोनों अजनबियों के बीच दोस्ती गहरी होती गई और देखते ही देखते दोनों पक्के दोस्त बन गए। वर्ष 1963 में इस जोड़ी ने फिल्म ‘पारसमणि’ से बॉलीवुड में डेब्यू किया। फिल्म में लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने ‘हंसता हुआ नूरानी चेहरा’ गाना गया, जो श्रोताओं के बीच जबरदस्त हिट साबित हुआ। इसी के साथ संगीत की दुनिया में इस जोड़ी के सफर की शुरुआत हुई।

लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल की जोड़ी ने बेहतरीन नगमे दिए

लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल की जोड़ी ने हिंदी सिनेमा को कई बेहतरीन गीत दिए, जिनमें ‘जब याद आये बहुत याद आये’ (पारसमणि), ‘वो हैं जरा खफा-खफा’ (शागिर्द), ‘ढल गया दिन हो गयी शाम’ (हमजोली), ‘सावन का महीना पवन करे सोर’ (मिलन), ‘मुझे तेरी मुहब्बत का सहारा मिल गया होता’ (आप आये बहार आई), ‘बदरा छाए कि झूले पड़ गए हाए’ (आया सावन झूम के), ‘झिलमिल सितारों का आंगन होगा’ (जीवन-मृत्यु),’ अच्छा तो हम चलते हैं’ (आन मिलो सजना), ‘ये दिल तुम बिन कहीं लगता नहीं’ (इज्जत), ‘महबूब मेरे, ‘क्या कहता है ये सावन’ (मेरा गांव मेरा देश) जैसे प्रमुख गीत शामिल हैं।

इनके अलावा इस जोड़ी ने ‘महबूब मेरे तू है तो दुनिया कितनी हंसी है’ (पत्थर के सनम), ‘दिल की बातें दिल ही जाने, (रूप तेरा मस्ताना), ‘इक प्यार का नग़मा है’ (शोर), ‘हम तुम एक कमरे में बंद हों’ (बॉबी), ‘ढफली वाले ढफली बजा’ (सरगम), ‘मुहब्बत है क्या चीज’ (प्रेम रोग), ‘हम बने तुम बने एक दूजे के लिए’ (एक दूजे के लिए), ‘प्यार करने वाले कभी डरते नहीं’ (हीरो), ‘तेरा नाम लिया तुझे याद किया’ (राम लखन) समेत कई सुपरहिट गीत दिए हैं। प्रसिद्ध संगीतकार लक्ष्मीकांत का निधन 25 मई, 1998 को मुंबई में हुआ।

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