गणित का प्रतिष्ठित सम्मान ‘फील्ड्स मेडल’ जीतने वाली पहली महिला थी मरियम मिर्जाखानी

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गणित का सबसे प्रतिष्ठित सम्मान ‘फील्ड्स मेडल’ पाने वाली दुनिया की पहली महिला मरियम मिर्जाखानी की आज 15 जुलाई को तीसरी पुण्यतिथि है। मरियम की स्तन कैंसर से लड़ते हुए 40 वर्ष की उम्र में मौत हो गई। ‘फील्ड्स मेडल’ सम्मान उन्हें ज्यामिति और डायनेमिकल सिस्टम के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रदान किया गया था।

मरियम मिर्जाखानी का जन्म 3 मई, 1977 को तेहरान, ईरान में हुआ था। उनकी गणित विषय के प्रति रूचि बचपन से ही थी। जब वह तेहरान में अपनी स्कूली पढ़ाई पूरी कर रही थीं, उस दौरान उनका देश कट्टरपंथी इस्लामी क्रांति और इराक के साथ लंबे युद्ध का सामना कर रहा था। इस तनाव वाली स्थिति में मरियम का साहित्य के प्रति गहरा अनुराग था और बड़ी होकर वह भी इसी क्षेत्र में कुछ करना चाहती थी।

हाई स्कूल से जूनियर और सीनियर कक्षा में उन्होंने ईरानी नेशनल ओलंपियाड में भाग लेकर गणित में स्वर्ण पदक जीता।

वर्ष 1994 में, मिर्ज़ाखानी ने हांगकांग में अंतर्राष्ट्रीय गणित ओलंपियाड में स्वर्ण पदक का स्तर हासिल किया और उन्होंने 42 में से 41 अंक हासिल किए। वह ऐसा करने वाली पहली ईरानी छात्रा थीं।

अगले वर्ष, 1995 में, वह परफेक्ट स्कोर हासिल करने वाली और टोरंटो, ओंटारियो, कनाडा में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय गणित ओलंपियाड में दो स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली ईरानी छात्रा बन गईं।

उन्होंने वर्ष 1999 में ईरान की शरीफ यूनिवर्सिटी ऑफ़ टेक्नोलॉजी से गणित और विज्ञान में ग्रेजुएशन की और 2004 में हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से गणित में पीएचडी की।

मिर्जाखानी वर्ष 2009 में अमेरिका के स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय के गणित विभाग में प्रोफेसर बनीं।

2009 के ब्लुमैंथल अवार्ड में गणित में रिसर्च के लिए और 2013 में अमेरिकन मैथेमैटिकल सोसाइटी का सेटर पुरस्कार भी जीता था।

मिर्जाखानी ने पहली बार महिला 2014 में इतिहास रचा था। ज्यामिति और डायनामिकल सिस्टम में अपने शानदार योगदान के लिए उन्होंने फ़ील्ड्स मेडल जीता। जिसको ‘गणित का नोबेल पुरस्कार’ भी कहा जाता है और इस मेडल को जीतने वाली वह पहली महिला थी और साथ ही पहली ईरानी भी थी। इस पुरस्कार को प्राप्त करने वाले की उम्र दो वर्ष से 40 वर्ष के बीच हो सकती है।

मिर्जाखानी का निधन

मरियम का 40 वर्ष की आयु में स्तन कैंसर से 15 जुलाई, 2017 कैंसर से निधन हो गया। स्तन कैंसर बढ़कर उनकी हड्डियों में भी फैल गया था।

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