तिरंगे के अपमान के कारण मिली थी जॉनी लीवर को यह सज़ा, बेहद मुफ़लिसी में बीता था बचपन

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हिंदी फिल्मों के मशहूर और भारत के पहले स्टैंड-अप कॉमेडियन जॉनी लीवर का जन्म आज ही के दिन यानि 14 अगस्त, 1957 को हुआ था। जॉनी का जन्म आंध्र प्रदेश राज्य के कानिगिरी कस्बे के एक तेलुगु क्रिश्चियन परिवार में हुआ। उनका वास्तविक नाम जॉन प्रकाश राव जानूमला था। हिंदुस्तान लीवर में काम करने के कारण उनका नाम जॉनी लीवर पड़ गया। हालांकि, इससे पीछे भी एक पूरी कहानी है। जॉनी का बचपन बेहद मुफ़लिसी (गरीबी) में बीता था। उनके घर के हालात इतने खराब थे कि फीस न भर पाने के कारण उन्‍हें स्‍कूल से बाहर कर दिया था। इसके बाद उन्होंने लंबा संघर्ष कर खुद अपना मुक़ाम बनाया। ऐसे में आइए जानते हैं आज 62वां जन्मदिन मना रहे जॉनी लीवर के बारे में कई दिलचस्प बातें..

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आर्थिक तंगी के कारण 7वीं में छोड़ दी थी पढ़ाई

जॉनी लीवर के पिता प्रकाश राव जानूमला हिंदुस्तान लीवर लिमिटेड प्लांट में काम करते थे। वहीं, उनकी मां करूणाम्मा जानूमला गृहणी थीं। जॉनी आंध्र एजुकेशन सोसायटी इंग्लिश हाई स्कूल में पढ़ने जाते थे, उनके परिवार की आर्थिक हालात ठीक नहीं होने कारण उन्होंने सातवीं क्लास में स्कूल छोड़ने का फैसला लिया और काम के सिलसिले में मुंबई के किंग्स सर्किल एरिया, धारावी आकर रहने लगे। यहां उन्होंने रेलवे स्टेशन और गलियों में पैन बेचने का काम शुरू कर दिया था।

इस दौरान वह बॉलीवुड कलाकारों और गानों की नकल किया करते थे। उनकी कॉमेडी टाइमिंग इतनी ग़ज़ब थी कि लोग पैन लेने की बजाय उनकी कॉमेडी देखने के लिए रुक जाया करते थे। यही से जॉनी लीवर का यूनीक कॉमिक अंदाज और टाइमिंग लोगों को पसंद आने लगा। इसके बाद लोग उन्हें मैरिज और अन्य फंक्शन में बतौर कॉमेडियन बुलाने लगे।

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हिंदुस्तान लीवर कंपनी में मजदूर की नौकरी तक की

जॉनी लीवर पैन बेचकर और स्टैंड-अप कॉमेडी कर गुज़ारा कर रहे थे, लेकिन उन्हें लगा कि परिवार पालने के लिए यह काफ़ी नहीं है। इसके बाद वह मुंबई में मशहूर कंपनी हिंदुस्तान लीवर में मजदूर की नौकरी करने लगे। इस दौरान जॉनी अपने मस्तमौला अंदाज और कॉमेडी से आस-पास के लोगों को हंसाया करते थे। इस वजह से फ्री टाइम में उनके पास कॉमेडी सुनने वाले की भीड आ जाया करती थी। इस कारण से कंपनी का मैनेजर उनसे ख़ासा नाराज भी रहता था। लेकिन इसी कंपनी से जॉनी की किस्मत बदल गई।

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हुआ यूं कि एक दिन कंपनी में यूनियन का कोई समारोह था और इसमें जॉनी ने स्टेज पर जाकर अपनी कॉमेडी का जादू समारोह में मौजूद लोगों पर बिखेरा। इस दौरान उन्होंने मजदूरों के बीच कंपनी के बड़े अधिकारियों की इस तरह से नकल करके बताई कि उनका यह अंदाज कंपनी अधिकारियों को बेहद पसंद आया। उन्होंने जॉनी की तारीफ़ की और उन्हें सराहा भी। इसके बाद उनके नाम में कंपनी लीवर का नाम जोड़ बुलाया जाने लगा, इस तरह उन्हें उनका पॉपुलर नाम जॉनी लीवर मिला।

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इसके बाद जब कल्याण जी ने जॉनी लीवर के इस ख़ास हुनर से परिचित हुए तो वो शो के लिए जॉनी को साथ ले जाने लगे। शोज के दौरान की गई जॉनी की मिमिक्री लोगों को बेहद भाने लगी थी। अब लोग उन्हें शोज कराने के लिए बुलाने लगे। एक बार शत्रुघ्न सिन्हा की मिमिक्री करने के बाद खुद वह उनसे मिलने आए। ऐसे ही सुनील दत्त ने जॉनी को शो पर देखा और तुरंत स्टेज पर जाकर जॉनी को अपनी अगली फिल्म ‘दर्द का रिश्ता’ में काम करने का ऑफर दे दिया था। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। जॉनी की कॉमेडी और टाइमिंग समय के साथ निख़रती गई और वह बॉलीवुड इंडस्ट्री के नामी कॉमेडियन बन गए।

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जॉनी लीवर को सुनाई गई थी सात दिन की सज़ा

गोविंदा जैसे कलाकारों के साथ बेहतरीन कॉमिक जोड़ी बनाकर जॉनी लीवर कॉमेडी का नया पर्याय बने। बॉलीवुड फिल्मों का एक दौर तो ऐसा आया जब किसी कॉमेडी फिल्म की कल्पना तक उनके बिना नहीं की जाती थी। असल ज़िंदग़ी में बेहद संजीदा इंसान और मशहूर कॉमेडिशन जॉनी लीवर का भी विवाद से नाता रहा।

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दरअसल, वर्ष 1999 में एक निजी समारोह में भारतीय फ्लैग तिरंगे का अपमान करने के कारण जॉनी लीवर को सात दिन की सज़ा सुनाई गई थी। हालांकि, बाद में जॉनी ने माफ़ी मांगी और उनकी सज़ा घटाकर एक दिन कर दी गई थी। बता दें, जॉनी लीवर करीब 400 से ज्यादा फिल्मों में काम कर चुके हैं। फिल्म ‘दीवाना मस्ताना’ (1998) और ‘दुल्हे राजा’ (1999) के लिए उन्हें फिल्मफेयर बेस्ट कॉमेडियन अवॉर्ड से सम्मानित किया जा चुका है।

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