डीआरडीओ ने क्यूआरएसएएम मिसाइल सिस्टम का किया सफ़ल परीक्षण, जानें क्या है इसकी ताकत

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भारत अपने रक्षा क्षेत्र में आधुनिकीकरण के लिए तेजी से काम कर रहा है। इसी के तहत रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन यानि डीआरडीओ ने सोमवार को क्विक रिएक्शन सरफेस एयर मिसाइल सिस्टम (क्यूआरएसएएम) का सफ़ल परीक्षण किया। इस मिसाइल सिस्टम की टेस्टिंग ओडिशा के समुद्री तट पर चांदीपुर रेंज में सुबह 11 बजकर 45 मिनट पर हुई। इसकी सबसे बड़ी ख़ासियत है कि यह मिसाइल जमीन से हवा में सटीक टार्गेट भेदने में सक्षम है। क्यूआरएसएएम सिस्टम में किसी सैन्य अभियान के तहत मिसाइल गतिशील रहते हैं। यह सिस्टम दुश्मन के विमान या ड्रोन पर निगरानी रखते हुए उसे तत्काल निशाना बनाता है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने टीम को दी बधाई

टेस्टिंग में क्यूआरएसएएम मिसाइल ने अपनी क्षमता को साबित करते हुए सफलतापूर्वक हवाई लक्ष्य को भेदा। इस मिशन के साथ हथियार प्रणाली के विकासात्मक परीक्षणों को सफलतापूर्वक पूरा किया गया। मिसाइल के वर्ष 2021 तक भारतीय सेना के लिए तैयार होने की उम्मीद है। सफ़ल परीक्षण के बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और सचिव, रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग एवं डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ. जी. सतीश रेड्डी ने क्यूआरएसएएम के विकास और उसके उड़ान परीक्षण में शामिल टीम को बधाई दीं। परीक्षण के दौरान महानिदेशक (मिसाइल एवं सामरिक प्रणाली) एमएसआर प्रसाद भी मौजूद थे।

पिछले हफ्ते ब्रह्मोस मिसाइल का किया था परीक्षण

इससे पहले भारत के डीआरडीओ ने हाल में 17 दिसंबर को ओडिशा के तट से ही ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का सफ़ल परीक्षण किया था। इस मिसाइल को एक एडवांस स्वदेशी तकनीक के साथ लॉन्च किया गया। मिसाइल ने एक जहाज को अपना निशाना बनाया था। अक्टूबर में भी इंडियन एयरफोर्स ने अंडमान निकोबार द्वीप समूह में त्राक द्वीप से सतह से सतह पर मार करने वाली 2 ब्रह्मोस मिसाइलों का टेस्ट किया था।

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भारतीय वायुसेना द्वारा 21 और 22 अक्टूबर को दागी गई दोनों मिसाइलें नियमित सामरिक प्रशिक्षण का एक हिस्सा थीं। मिसाइल ने लगभग 300 किलोमीटर दूर एक निर्धारित लक्ष्य को भेदा। दोनों मामलों में मिसाइलों ने अपने निर्धारित लक्ष्य को प्रत्यक्ष तौर पर भेद दिया। इस मिसाइल के प्रशिक्षण से किसी मोबाइल प्लेटफार्म से जमीनी लक्ष्य को सटीकता के साथ भेदने की भारतीय वायुसेना की क्षमता भी बढ़ी है।

 

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