शरणार्थियों के लिए भारत की सीमाओं को खोलने के प्रयास सराहनीय: यूएनएचसीआर

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संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त कार्यालय (यूएनएचसीआर) ने शरणार्थियों के लिए भारत द्वारा किए गए प्रयासों को प्रशंसनीय बताया है। यूएनएचसीआर की सहायक उच्चायुक्त गिलियन ट्रिग्स ने शरणार्थियों के लिए भारत की सीमाओं को खोलने के प्रयासों की खूब सराहना की। उन्होंने कहा कि जो लोग अपने घरों से भागने के लिए मजबूर हैं या विस्थापित हैं, उनके साथ सम्मान के साथ व्यवहार करने की आवश्यकता है। अपनी चार दिवसीय यात्रा पर भारत आई ट्रिग्स ने राष्ट्रीय गांधी संग्रहालय में चरखा प्रदर्शनी के उद्घाटन के मौके पर तिब्बतियों और श्रीलंकाई तमिलों की सुरक्षा के लिए भारत के प्रयासों को सराहनीय बताया।

भारत का शरणार्थियों की मदद का लंबा इतिहास

यूएनएचसीआर सहायक उच्चायुक्त गिलियन ट्रिग्स ने कहा कि भारत का शरणार्थियों की मदद का एक लम्बा इतिहास रहा है, इसकी वजह से ही वह यहां आना चाहती थीं। उन्होंने कहा कि भारत अपनी सीमाओं को खोलकर कई सदियों से दुनिया के लोगों की रक्षा कर रहा है। ट्रिग्स ने महात्मा गांधी के चरखे के उपयोग को आत्मनिर्भरता से जोड़ते हुए कहा कि जो लोग अपने घरों से भागने के लिए मजबूर होते हैं, जिन्हें विस्थापित किया गया है, उनके साथ सम्मान का व्यवहार होना चाहिए और सम्मान की खोज ही आत्मनिर्भरता है।

जरूरतमंद लोगों की सुरक्षा में भारत का अहम योगदान

ट्रिग्स ने आगे कहा, ‘मैं समझ सकती हूं कि चरखा चलाने के पीछे महात्मा गांधी का उद्देश्य आत्मनिर्भर बनना था।’ उन्होंने राष्ट्रीय गांधी संग्रहालय में चरखा प्रदर्शनी के उद्घाटन कार्यक्रम में अपने भाषण में कहा कि वह जरूरतमंद लोगों की सुरक्षा में भारत के योगदान की प्रशंसा करती हैं। हाल ही में अफगानिस्तान और म्यांमार के लोगों के लिए भारत ने दरियादिली दिखाई थी।

आपको जानकारी के लिए बता दें कि पड़ोसी देश अफगानिस्तान में तालिबान के सत्ता में आने के बाद हालत बदल गए और देश के अल्पसंख्यक जिसमें हिंदू और सिख शामिल हैं, को भारत ने शरण दीं। इसके अलावा अफगानिस्तान के हजारों नागरिकों को भारत ने अपने यहां शरण दी है। भारत ने अफगानिस्तान को मदद स्वरूप 50 हजार मीट्रिक टन गेहूं भेजने का वादा किया है। इसमें से हजारों टन अनाज अफगान भेजा भी जा चुका है।

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