एक बार फिर टाटा समूह की हो सकती है एयर इंडिया, जानें पूरी कहानी

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घाटे में चल रही भारतीय एयरलाइन्स एयर इंडिया को 88 साल बाद फिर से टाटा समूह, सिंगापुर एयरलाइन्स के साथ मिलकर खरीदने का मानस बना रहा है। खबरों के मुताबिक, टाटा समूह अपने अंतिम निर्णय की ओर पहुंच चुका है और इसकी डील के प्रारूप पर काम चल रहा है।

दरअसल मौजूदा एयर इंडिया की स्थापना करीब 88 साल पहले टाटा समूह ने ही की थी। वर्ष 1932 में टाटा एयर सर्विसेज के तौर पर इसकी शुरुआत की थी। वर्ष 1947 में इसका राष्ट्रीयकरण कर दिया गया और इसका नाम बदलकर एयर इंडिया कर दिया गया।

बता दें टाट संस और सिंगापुर एयरलाइन्स दोनों साथ मिलकर एयर विस्तारा का परिचालन कर रहे हैं। एयर एशिया इंडिया में 51% हिस्सेदारी टाटा संस की है और बाकी 49% मलेशियाई कारोबारी टोनी फर्नांडिस के पास है। टाटा ग्रुप ने एयर इंडिया एक्स्प्रेस के अधिग्रहण की प्रक्रिया में शामिल होने के लिए टोनी फर्नांडिस की मंजूरी मांगी है। एयर एशिया के लिए हुए समझौते के अुनसार टाटा संस किसी बजट एयरलाइन्स में 10 फीसदी से ज्यादा हिस्सेदारी तब तक नहीं ले सकता, जब तक कि इसके लिए टोनी फर्नांडिस अनुबंध की शर्तों में ढील देने के लिए तैयार न हो जाए।

एयर इंडिया की स्थापना और उसका इतिहास

एयर इंडिया की स्थापना ब्रिटिश हुकूमत के शासन काल में अप्रैल 1932 में उद्योगपति जेआरडी टाटा ने की थी। इसका प्रारम्भिक नाम टाटा एयरलाइंस था। टाटा एयरलाइंस की पहली व्यावसायिक उड़ान 15 अक्टूबर को भरी थी। वे खुद पायलट थे। उन्होंने सिंगल इंजन वाले ‘हैवीलैंड पस मोथ’ हवाई जहाज को अहमदाबाद से होते हुए कराची से मुंबई ले गए थे।

इस पहली उड़ान में सवारियां नहीं थीं बल्कि 25 किलो पत्र थे। फिर नियमित रूप से डाक लाने ले-जाने का सिलसिला शुरू हुआ। टाटा एयरलाइंस को कोई ब्रिटिश सरकार की ओर से कोई आर्थिक सहायता नहीं दी गई थी।

प्रारम्भिक दौर में टाटा एयरलाइंस का कार्यालय मुंबई के जुहू के पास स्थित एक मिट्टी के मकान में था। वहीं मौजूद एक मैदान को ‘रनवे’ के रूप में इस्तेमाल किया जाने लगा।

मात्र दो हवाई जहाज से शुरू की कंपनी

टाटा ने ‘टाटा एयरलाइंस’ कंपनी की शुरूआत दो छोटे सिंगल इंजन वाले हवाई जहाज़, दो पायलट और तीन मैकेनिकों के साथ की थी। टाटा एयरलाइंस का 1933 पहला व्यावसायिक वर्ष रहा और इस वर्ष ‘टाटा संस’ की दो लाख की लागत से स्थापित कंपनी ने 155 यात्रियों और लगभग 11 टन डाक को पहुंचाने का काम किया। टाटा एयरलाइंस को 29 जुलाई 1946 को ‘पब्लिक लिमिटेड’ कंपनी का रूप दिया गया और उसका नाम बदलकर ‘एयर इंडिया लिमिटेड’ रखा गया। भारत की आजादी के बाद ही वर्ष 1947 में भारत सरकार ने एयर इंडिया में 49 प्रतिशत की भागेदारी लेकर कंपनी को विस्तार दिया।

1953 में सरकार ने एयर कॉरपोरेशन ऐक्ट पारित किया, तो इसी के साथ एअर इंडिया के अधिकांश शेयर उसके पास आ गए। ठीक इसी वक्त (उसी कानून के तहत) सरकार ने इंडियन एयर लाइन्स का गठन किया।

‘महाराजा’ है एयर इंडिया का शुभंकर

वैसे तो ‘महाराजा’ भारतीय इतिहास में राजाओं को कहा जाता था, परंतु जब एयर इंडिया को कोई नाम नहीं सूझा तो अपने शुभंकर को ‘महाराजा’ कहा। जो कुलीन वंश का प्रतीक न होकर एक सामान्य व्यक्तित्व है।

महाराजा के बारे में कल्पना करने वाले बॉबी कूका ने कहा है कि उसका रक्त नीला नहीं है (वह किसी कुलीन वंश से नहीं है)। वह एक कुलीन लग सकता है, लेकिन वह कुलीन नहीं हैं।’

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यह सुंदर जाना पहचाना शुभंकर एयर इंडिया में पहली बार 1946 में दिखाई दिया था, जब एयर इंडिया के व्यापार निदेशक बॉबी कूका और जे. वॉल्टर थॉम्पसन लिमिटेड, मुम्बई, में कार्यरत आर्टिस्ट उमेश राव ने मिलकर महाराजा की रचना की थी।

महाराजा की तीन खासियत उसे दुनिया में अलग एवं विशिष्ट पहचान देती है, उसकी विनम्रता में हमेशा बंद रहने वाली आंखें, सिर पर पगड़ी और पैर हमेशा जमीन से उठे हुए। वास्तव में उसने एयर इंडिया के लिए प्रचार में व्यंग्य और वास्तविकता के लिए कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय अवॉर्ड भी जीते हैं।

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