अभिनेत्री सुचित्रा सेन का शादी के कुछ वर्षों बाद शुरू हुआ था सिनेमाई सफ़र

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ऐसा कहा जाता है कि भारतीय सिनेमा में अभिनेत्री सुचित्रा सेन का दूर-दूर तक कोई सानी नहीं। उन्हें पहली ऐसी अभिनेत्री के रूप में देखा जाता है जिन्होंने अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर अपना एक अलग मुकाम हासिल किया। सुचित्रा ने अपने फिल्मी कॅरियर में कई फिल्में की और कई किरदारों को अपने अभिनय कौशल से जीवंत कर दिया। उन्होंने बंगाली सिनेमा के जरिये हिंदी सिनेमा में एंट्री ली और अपनी अदाकारी का लौहा मनवाया। 6 अप्रैल को अभिनेत्री सुचित्रा सेन का 91वीं जयंती है। ऐसे में इस खास मौके पर जानते हैं उनके जीवन के बारे में दिलचस्प बातें…

17 साल की उम्र में हो गई थी शादी

सुचित्रा सेन का जन्म 6 अप्रैल, 1931 को अविभाजित भारत के बंगाल प्रांत स्थित पवना (अब बांग्लादेश) में हुआ था। उनका वास्तविक नाम रोमा दासगुप्ता था। उनके पिता करूणोमय दासगुप्ता स्कूल में हेड मास्टर हुआ करते थे। सुचित्रा अपने माता-पिता की पांच संतानों में तीसरी नंबर की थीं। उनकी प्रारंभिक शिक्षा पवना में ही हुई। पढ़ाई पूरी होने के बाद 17 साल की उम्र में उनका विवाह बंगाल के जाने-माने उद्योगपति अदिनाथ सेन के पुत्र दीबानाथ सेन से हो गया था।

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बांग्ला फिल्म ‘सारे चतुर’ से किया डेब्यू

सुचित्रा सेन ने उस दौर में खुले विचार रखने वाले परिवार में जन्म लिया और उनकी शादी भी एक ऐसे ही परिवार में हुई। यही वजह रही कि शादी के बाद भी सुचित्रा के फिल्मों में काम करने पर किसी को आपत्ति नहीं हुई। उन्होंने वर्ष 1952 में बांग्ला फिल्म ‘सारे चतुर’ से फिल्मी दुनिया में डेब्यू किया। इस फिल्म में सुचित्रा ने अभिनेता उत्तम कुमार के साथ स्क्रीन साझा की थी।

‘पारो’ के किरदार से दिल जीतने में रही कामयाब

बंगाली सिनेमा में पहचान बनाने के बाद सुचित्रा सेन ने बॉलीवुड की तरफ रुख किया। उन्होंने वर्ष 1955 में शरत चंद्र के मशहूर बंगला उपन्यास ‘देवदास’ पर बनी फिल्म से हिंदी सिनेमा में डेब्यू किया। विमल राय के निर्देशन में बनी इस फिल्म में उन्हें पहली बार दिलीप कुमार के साथ काम करने का अवसर मिला। फिल्म में सुचित्रा ने ‘पारो’ का किरदार निभाया, जिसके जरिये वे दर्शकों का दिल जीतने में कामयाब रहीं। इसी के साथ उनकी बॉलीवुड में धमाकेदार शुरुआत हो गई थी। उन्होंने बॉलीवुड में ‘मुसाफ़िर’, ‘बंबई का बाबू’, ‘आंधी’ जैसी एक से बढ़कर एक बेहतरीन फिल्में कीं।

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‘सात पाके बांधा’ से मिली अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति

वर्ष 1963 में सुचित्रा सेन की एक फिल्म ‘सात पाके बांधा’ रिलीज़ हुई। फिल्म में उनके संजीदा किरदार ने एक बार फिर दर्शकों का दिल जीत लिया। इस फिल्म के लिए उन्हे मास्को फिल्म फेस्टिवल में ‘बेस्ट फिल्म एक्ट्रेस’ के अवॉर्ड से नवाजा गया। उल्लेखनीय है कि यह फिल्म जगत के इतिहास में पहली बार था जब किसी भारतीय अभिनेत्री को विदेश में पुरस्कार मिला। वर्ष 2014 में 17 जनवरी के दिन अभिनेत्री सुचित्रा सेन का पश्चिम बंगाल राज्य की राजधानी कोलकाता में निधन हो गया।

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