सुचेता कृपलानी: एक स्वतंत्रता सेनानी, जो देश की पहली महिला मुख्यमंत्री बनीं

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sucheta kraplani

भारतीय स्वतंत्रता सेनानी और देश की पहली महिला मुख्यमंत्री सुचेता कृपलानी की 1 दिसंबर को 45वीं डेथ एनिवर्सरी हैं। उन्होंने देश की आजादी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। वह स्वतंत्रता सेनानी के साथ-साथ राजनीतिज्ञ भी थी और वर्ष 1963 से 1967 तक वह उत्तर प्रदेश राज्य की पहली महिला मुख्यमंत्री बनी थीं।

जीवन परिचय

सुचेता कृपलानी का जन्म 25 जून, 1908 को पंजाब के अंबाला (अब हरियाणा) में एक बंगाली ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनके पिता एक सरकारी डॉक्टर थे। उनके पिता का तबादला होता रहता था, इस वजह से उनकी प्रारंभिक शिक्षा कई विद्यालयों में हुई थी। बाद में उन्हें दिल्ली पढ़ने के लिए भेजा गया। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंट स्टीफेंस कॉलेज से इतिहास में मास्टर की डिग्री प्राप्त की।

उनकी बड़ी बहन सुलेखा की अचानक तबीयत खराब होने से मृत्यु हो गई और बाद में उनके पिता का भी देहांत हो जाने से वर्ष 1929 में उन पर परिवार की जिम्मेदारी आ गई। वह बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में इतिहास की प्रोफेसर बन गईं।

शादी का परिवार व गांधीजी ने किया विरोध

सुचेता बीएचयू में प्रोफेसर थी, तब जे बी कृपलानी भी वहीं इतिहास के प्रोफेसर थे। जे बी ने देश की आजादी में भाग लेने के लिए असहयोग आंदोलन के दौरान अपनी नौकरी छोड़ दी। जे बी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रमुख व्यक्ति थे। सुचेता ने भी नौकरी छोड़ी दी और गांधीजी के एक महिला संगठन से जुड़ गई। वर्ष 1934 के दौरान बिहार में भयंकर भूकंप आया तो बतौर राहत कार्यकर्ता के रूप में सुचेता और जे बी बिहार गए। इस दौरान दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ने लगी।

उन्होंने जे बी से वर्ष 1936 में शादी कर ली। जे बी सुचेता से बीस साल बड़े थे। उनकी शादी का दोनों परिवार वालों ने विरोध किया और साथ ही गांधीजी ने भी।

स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान

सुचेता कृपलानी बचपन से ही देशभक्ति से प्रेरित थी क्योंकि उनके पिता एक डॉक्टर होने के साथ देश की आजादी के लिए समर्पित थे। वह अपने पिता से काफी प्रभावित थी। बाद में आचार्य जे बी कृपलानी ने सुचेता को स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल होने के लिए प्रेरित किया था। सुचेता का परिचय भी उन्होंने ही करवाया था। वह भी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल हो गई। बाद में सुचेता भी 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान अरुणा आसफ अली, उषा मेहता और अन्य महिला नेताओं के साथ सबसे आगे रही थी। उन्हें कांग्रेस पार्टी के महिला विभाग की पहली प्रमुख होने का श्रेय भी जाता है।

स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान

सुचेता कृपलानी बचपन से ही देशभक्ति से प्रेरित थी क्योंकि उनके पिता एक डॉक्टर होने के साथ देश की आजादी के लिए समर्पित थे। वह अपने पिता से काफी प्रभावित थी। बाद में आचार्य जे बी कृपलानी ने सुचेता को स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल होने के लिए प्रेरित किया था। सुचेता का परिचय भी उन्होंने ही करवाया था। वह भी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल हो गई। बाद में सुचेता भी 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान अरुणा आसफ अली, उषा मेहता और अन्य महिला नेताओं के साथ सबसे आगे रही थी। उन्हें कांग्रेस पार्टी के महिला विभाग की पहली प्रमुख होने का श्रेय भी जाता है।

देश विभाजन के समय उन्होंने दंगों के दौरान महात्मा गांधी के साथ मिलकर काम किया। सुचेता वर्ष 1946 में गांधीजी के साथ नोआखली की यात्रा पर साथ गई थी।

वर्ष 1946 में उनका चुनाव संविधान सभा के सदस्य के रूप में हुआ। वर्ष 1949 में उन्हें संयुक्त राष्ट्र महासभा की प्रतिनिधि चुना गया था। सुचेता कृपलानी वर्ष 1952 में हुए पहले आम चुनाव में नई दिल्ली निर्वाचन क्षेत्र से निर्वाचित हुई। उन्होंने लघु उद्योग राज्यमंत्री के रूप में कार्य किया। पांच साल बाद उन्हें उसी निर्वाचन क्षेत्र से फिर चुना गया।

देश की पहली महिला मुख्यमंत्री बनी

सुचेता कृपलानी ने वर्ष 1962 में उत्तर प्रदेश विधानसभा के चुनाव लड़े और वह कानपुर निर्वाचन क्षेत्र से जीत गई। उन्हें श्रम, सामुदायिक विकास और उद्योग विभाग का कैबिनेट मंत्री बनाया गया। बाद में इसी साल उन्हें यूपी की मुख्यमंत्री बनाया गया। वर्ष 1967 में उन्होंने उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले से चौथी बार लोकसभा चुनाव लड़ कर जीत हासिल की। वर्ष 1971 में सुचेता कृपलानी ने राजनीति से संन्यास ले लिया।

निधन

राजनीति से संन्यास लेने के बाद सुचेता अपने पति के साथ दिल्ली में रहने लगी। उनके कोई संतान नहीं होने की वजह से अपनी सम्पत्ति लोक कल्याण समिति को दान कर दी। यहीं पर उन्होंने अपनी आत्मकथा ‘एन अनफिनिश्ड ऑटोबायोग्राफी’ लिखनी शुरू की, जो तीन भागों में में प्रकाशित हुई।

सुचेता कृपलानी 1 दिसंबर, 1974 को दिल का दौरा पड़ने के कारण निधन हो गया।

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