शिवराज सिंह चौहान ने संघ से जुड़ने के बाद आजीवन कुंवारे रहने का संकल्प ले लिया था, घरवालों ने मुश्किल से मनाया

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वरिष्ठ बीजेपी नेता, पार्टी राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व मध्य प्रदेश के वर्तमान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान 5 मार्च को अपना 63वां जन्मदिन मना रहे हैं। उनका जन्म वर्ष 1959 में मध्यप्रदेश के सीहोर जिले स्थित गांव जैत में प्रेम सिंह चौहान और सुंदर बाई चौहान के घर में हुआ था। उन्हें मध्य प्रदेश में बच्चों के ‘मामा’ और गांव के लोगों में ‘पांव-पांव वाले भैया’ उपनाम से भी जाना जाता है। शिवराज बरकतुल्लाह यूनिवर्सिटी, भोपाल से एमए फिलोसॉफी में गोल्ड मेडलिस्ट हैं। सादगी पसंद शिवराज सिंह चौहान एमपी के चौथी बार मुख्यमंत्री हैं। उन्होंने खुद को लोगों के बीच एक विकास पुरूष के साथ पेश किया है। ऐसे में इस खास मौके पर जानते हैं उनके राजनीतिक और निजी जीवन के बारे में..

‘मिट्टी के बेटे’ की छवि बनाने में कामयाब

मीठी बोली के लिए पहचाने जाने वाले नेता शिवराज सिंह चौहान ने अपनी राजनीतिक दृढ़ता से ‘मिट्टी के बेटे’ की छवि पर काम करते हुए आसानी से किसानों, ग्रामीणों और आम लोगों की सामाजिक-आर्थिक चिंताओं के साथ खुद को जोड़ा। उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी के साथ तुलना को नजरअंदाज करते हुए अपनी प्रोफ़ाइल को हमेशा कम बनाए रखा, लेकिन सांसदों पर पूरा ध्यान केंद्रित किया।

उन्होंने पिछले दो लोकसभा चुनाव में मध्य प्रदेश की लगभग सभी सीटों पर बीजेपी को ​जिताने में अहम भूमिका निभाई। हालांकि, वह साल 2018 के चुनाव में सरकार बनाने से मामूली सीटों के अंतर चूक गए थे। लेकिन कमलनाथ के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के गिरने के बाद वर्ष 2020 में उन्होंने एक बार फिर अपने नेतृत्व में भाजपा की सरकार बना ली और प्रदेश के चौथी बार मुख्यमंत्री बन गए।

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व्यापम घोटाला में सीबीआई ने क्लीन चिट दी

शिवराज सिंह चौहान के अपने कार्यकाल के दौरान खुद को एक शर्मीला, सरल और कमजोर राजनेता से एक कुशल नेता के रूप में बदल लिया। हालांकि, कांग्रेस ने शिवराज का नाम करोड़ों के व्यापमं घोटाले से जोड़ा। लेकिन सीबीआई ने शिवराज सिंह चौहान को क्लीन चिट दे दी थी।

गौरतलब है कि व्यापमं घोटाला प्रवेश और भर्ती परीक्षाओं में किया गया एक बड़ा घोटाला था जिसका खुलासा वर्ष 2013 में हुआ। इसमें कई राजनेता, वरिष्ठ सरकारी अधिकारी और व्यवसायी शामिल थे, जो पेपर लिखने के लिए परीक्षा हॉल बैठने की व्यवस्था में हस्तक्षेप करते थे। इस दौरान कथित रूप से अधिकारियों को रिश्वत देकर नकली पेपर लीक करने का मामला भी उजागर हुआ।

13 साल की उम्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े

शिवराज सिंह चौहान की राजनीतिक यात्रा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के साथ शुरू हुई। जब वह वर्ष 1972 में 13 साल की उम्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में शामिल हुए। साल 1975 में मॉडल हायर सेकंडरी स्कूल का छात्रसंघ अध्यक्ष चुने जाने पर उनके नेतृत्व कौशल को पहली बार देखा गया। उन्होंने आपातकाल के खिलाफ भूमिगत आंदोलन में भाग लिया और वर्ष 1976-77 के दौरान राजनीतिक आंदोलनों और प्रदर्शनों के कारण कई बार जेल गए थे। शिवराज सिंह चौहान ने 29 नवंबर, 2005 को बाबूलाल गौर की जगह लेकर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री का पद ग्रहण किया था।

अटलजी के बाद विदिशा से लगातार 5 बार सांसद रहे

शिवराज सिंह चौहान ने बीजेपी के महासचिव और पार्टी की मध्य प्रदेश राज्य इकाई अध्यक्ष के रूप में भी काम किया। बीजेपी नेता शिवराज ने वर्ष 1990 में पहली बार एमपी की बुधनी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा और राज्य विधानसभा के लिए चुने गए। साल 1991 में विदिशा लोकसभा क्षेत्र के तत्कालीन सांसद अटल बिहारी वाजपेयी ने अपनी सीट से त्यागपत्र दे दिया था। उनके बाद शिवराज सिंह चौहान पार्टी के टिकट पर विदिशा लोकसभा सीट पर उपचुनाव लड़े और जीतकर संसद पहुंचे। जब शिवराज पहली बार सांसद बने उस समय केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी। इसके बाद शिवराज लगातार चार बार वर्ष 1996, 1998, 1999 और 2004 के लोकसभा चुनाव में विदिशा संसदीय क्षेत्र से लोकसभा पहुंचे।

उन्होंने लगातार और अपना 5वां लोकसभा चुनाव 2,60,000 से अधिक मतों से जीता था। साल 1999 में हुए 13वें लोकसभा चुनाव के दौरान शिवराज चौथी बार सांसद बने थे। इस चुनाव के बाद केन्द्र में भाजपा समर्थित एनडीए सरकार सत्ता में आई। इस दौरान शिवराज सिंह केन्द्र सरकार द्वारा गठित विभिन्न कमेटियों के सदस्य भी रहे। वर्ष 2005 में शिवराज सिंह चौहान को मध्य प्रदेश भाजपा का अध्यक्ष बनाया गया। 29 नवंबर, 2005 को जब बीजेपी शासित एमपी के तत्कालीन सीएम बाबूलाल गौर ने अपने पद से इस्तीफा दिया तो शिवराज सिंह को पहली बार मुख्यमंत्री चुना गया। अगले साल शिवराज ने बुधनी विधानसभा सीट से उपचुनाव लड़ा और जीत दर्ज की।

शिवराज सरकार की योजनाओं को मिली सराहना

शिवराज सरकार की ‘लाडली लक्ष्मी योजना’, ‘मुख्यमंत्री कन्यादान योजना’, ‘मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना’, ‘स्कूल के बच्चों के लिए साइकिल योजना’, 1 रुपए प्रति किलोग्राम चावल और 2 रुपए प्रति किलोग्राम गेहूं वितरण योजना और संबल जैसी योजनाएं, जिसमें 200 रुपए में बिजली दी गई जिसे बाद में कई अन्य राज्यों ने भी अपनाया। शिवराज सरकार की कई योजनाओं को लोगों से सराहना भी मिलीं। शिवराज सिंह के नेतृत्व में मध्य प्रदेश राज्य बिजली सप्लाई में आत्मनिर्भर बना और गैर-कृषि उपभोक्ताओं को 24 घंटे व कृषि उपभोक्ताओं को 10 घंटे बिजली आपूर्ति के लिए के लिए जाना गया। उनके नेतृत्व में मध्य प्रदेश के 2 शहर इंदौर और भोपाल को ‘स्वच्छ भारत अभियान’ के तहत ‘स्वच्छतम शहर’ के लिए चुना गया।

इसके अलावा शिवराज सिंह ने मध्य प्रदेश की जीवन रेखा मानी जाने वाली नर्मदा नदी के संरक्षण के लिए ‘नमामि देवी नर्मदे यात्रा’ भी की। साल 2018 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी पूर्ण बहुमत के आंकड़े से थोड़ा पीछे रह गई और शिवराज को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था। यह चुनाव हारने के बाद शिवराज सिंह चौहान ने कहा ‘अब मैं आज़ाद हूं।’ उनके बारे में एक दिलचस्प बात यह है​ कि संघ से जुड़ने के बाद शिवराज ने आजीवन कुंवारे रहने का संकल्प ले लिया था, लेकिन सांसद बनने के बाद शादी के लिए परिवार वालों ने दबाब बढ़ाना शुरू कर दिया। आख़िरकार 6 मई, 1992 को वे शादी के बंधन में बंध गए। उन्होंने वर्ष 1992 में साधना सिंह से विवाह किया, जिनसे दो बेटे कार्तिकेय और कुणाल हैं।

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23 मार्च 2020 को शिवराज ने मध्यप्रदेश के सीएम के रूप में अतिरिक्त चार्ज लिया और इसके बाद हुए उपचुनाव में सरकार बनाने के लिए जरूरी बहुमत से ज्यादा सीटों पर जीत दर्ज कर अपनी लोकप्रियता को फिर साबित कर दिखाया।

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