राजस्थान: वरिष्ठ भाजपा नेत्री व राजसमंद विधायक किरण माहेश्वरी का निधन

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Kiran-Maheshwari-Death

राजस्थान की वरिष्ठ भाजपा नेत्री व राजसमंद विधानसभा क्षेत्र से विधायक किरण माहेश्वरी का 59 साल की उम्र में गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में निधन हो गया। जानकारी के अनुसार, कुछ दिनों पहले उनकी रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई थी, जिसके बाद उन्हें मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उनका पिछले कुछ दिनों से इलाज चल रहा था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भाजपा विधायक किरण माहेश्वरी के निधन पर शोक जताया और कहा कि उन्होंने हर पद रहते हुए राज्य की प्रगति के लिए काम किया। पीएम मोदी के अलावा कई बड़े नेता और भाजपाइयों ने दुख जताया है।

माहेश्वरी ने राज्य की प्रगति की दिशा में काम किए: मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर कहा, ‘किरण माहेश्वरी जी के असामयिक निधन से पीड़ा हुई। सांसद, विधायक या राजस्थान सरकार में कैबिनेट मंत्री के रूप में उन्होंने राज्य की प्रगति की दिशा में काम करने और गरीबों को हाशिए पर से उठाने के लिए कई प्रयास किए। उनके परिवार के प्रति संवेदना। ओम शांति।’

महिलाओं व वंचित वर्गों के अधिकारों की सशक्त आवाज थीं: बिरला

भाजपा विधायक किरण माहेश्वरी के निधन पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने भी शोक व्यक्त किया। उन्होंने ट्वीट कर कहा, राजसमंद (राजस्थान) से विधायक बहन किरण माहेश्वरी जी का निधन बेहद दुखद है। उन्होंने अपना पूरा जीवन समाज की सेवा और हितों को संरक्षित करने के लिए समर्पित किया। मेरे लिए उनका निधन व्यक्तिगत क्षति है। ईश्वर दिवंगत आत्मा को श्रीचरणों में स्थान दें। परिजनों के प्रति संवेदनाएं व्यक्त करता हूँ। साथ ही आगे लिखा कि किरण जी के साथ राजनीतिक-सामाजिक जीवन में लंबे अरसे तक काम किया। सामाजिक विषयों विशेषतः महिलाओं व वंचित वर्गों के अधिकारों की वे सशक्त आवाज थीं। दीन-दुखियों की सहायता के लिए हमेशा तत्पर रहने वाली किरण जी को उनकी निर्भीकता व स्पष्टवादिता के लिए सदैव याद किया जाएगा।’

उदयपुर मेयर के रूप में शुरू हुआ राजनीतिक कॅरियर

बता दें कि किरण माहेश्वरी का जन्म 29 अक्टूबर, 1961 को मध्य प्रदेश के रतलाम में हुआ था। उन्होंने केटरिंग कॉलेज, दादर, बॉम्बे विश्वविद्यालय और आईआईसीटी-उदयपुर से अपनी शिक्षा पूरी की। माहेश्वरी पहली बार राजनीति में 24 साल की उम्र में नज़र आई, जब उन्होंने विश्व हिंदू परिषद की गंगाजल यात्रा में भाग लिया। वर्ष 1992 में अयोध्या कार सेवा और वर्ष 1993 में दिल्ली रैली से उन्होंने राजनीति में अपनी प्रतिबद्धता दिखायी और जल्द ही वह वर्ष 1994 में उदयपुर की मेयर के रूप में चुनी गईं।

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वर्ष 2008 में जब वे राजस्थान राज्य विधानसभा के लिए चुनी गई, तो उन्होंने 5 वर्षों में 650 से अधिक प्रश्न करने का रिकॉर्ड बनाया। माहेश्वरी वसुंधरा राजे सरकार में उच्च शिक्षा मंत्री भी रहीं। वह 14वीं लोकसभा में उदयपुर संसदीय क्षेत्र से चुनाव जीतकर पहुंची थीं। 15वीं लोकसभा के चुनाव में BJP ने उन्हें अजमेर से मैदान में उतारा, लेकिन वह सचिन पायलट के सामने चुनाव हार गईं। दिसंबर 2013 में माहेश्वरी एक फिर राजसमंद सीट से विधानसभा का चुनाव लड़ी और 30,000 से अधिक वोटों से जीत दर्ज की। साल 2018 में किरण माहेश्वरी राजसमंद से फिर विधायक चुनी गईं। वह पढ़ने, लिखने और चित्रकला में विशेष रूचि रखती थी।

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