राजकपूर: हिंदी सिनेमा के सबसे यंगस्ट फिल्म डायरेक्टर का खिताब इस सुपरस्टार के है नाम

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राजकपूर हिंदी सिनेमा के वो करिश्माई अभिनेता थे जिन्हें ना सिर्फ देश में मोहब्बत मिली बल्कि विलायती देशों में भी खूब सम्मान और प्यार मिला। अपनी दमदार अदायगी के कारण वे हिंदी सिनेमा के शोमैन कहलाते थे। राजकपूर को हिंदी सिनेमा में महत्वपूर्ण योगदान के कारण 11 ‘फिल्मफेयर अवॉर्ड’, 3 ‘राष्ट्रीय पुरस्कार’, ‘पद्म भूषण’, ‘दादासाहेब फाल्के पुरस्कार’ और ‘फिल्मफेयर लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड’ से सम्मानित किया गया।

राजकपूर का जन्म 14 दिसंबर,1924 को पाकिस्तान के पेशावर में एक पठानी हिंदू पृथ्वीराज कपूर के घर हुआ। राजकपूर का पूरा नाम रणबीर राज कपूर उनके पिता जाने माने थियेटर आर्टिस्ट और फिल्म कलाकार थे। राजकपूर को अभिनय के गुर विरासत में मिले। राजकपूर तीन भाईयों में सबसे बड़े थे। बाकी दोनों भाई शशि कपूर और शम्मी कपूर अपने जमाने के लोकप्रिय अभिनेता थे।

राजकपूर के जन्म के पांच साल बाद 1929 में पृथ्वीराज कपूर पेशावर छोड़ मुंबई आकर रहने लगे। राज की प्रारंभिक पढ़ाई कलकत्ता और देहरादून से हुई मगर पढ़ाई में कम दिलचस्पी होने के कारण उन्होंने पढ़ाई से दूरी बना ली। राजकपूर सिने कॅरियर के शुरुआती दौर में संगीत निर्देशक बनना चाहते थे। मगर दमदार एक्टिंग के कारण उन्हें अभिनेता के रुप में लोगों स्वीकार किया।

कॅरियर की शुरुआत

राजकपूर ने कॅरियर के शुरुआती दौर में कई मुसिबतों का सामना किया। उन्होंने ‘रंजीत मूवीकॉम’ और ‘बॉम्बे टॉकीज’ प्रोडक्शन हाउस में बतौर स्पॉटब्वॉय काम किया। वहीं बतौर बाल कलाकार महज 11 साल की उम्र में फिल्म ‘इंकलाब’ फिल्म में काम किया। इस फिल्म के बाद उन्होंने मशहूर अदाकारा मधुबाला के साथ साल 1947 में आई फिल्म ‘नीलकमल’ में बतौर लीड एक्टर काम किया। उस वक्त राज कपूर की उम्र महज 24 साल थी।

सिने कॅरियर का टर्निंग प्वॉइंट

1948 में महज 24 साल की उम्र में राजकपूर ने ‘आर.के’ स्टूडियो की स्थापना की थी और इसी के साथ वे अपने समय के सबसे यंग डायरेक्टर कहलाए। अपने बैनर तले उन्होंने फिल्म ‘आग’ बनाई जिसमें अभिनय और निर्देशन राजकपूर ने किया। फिल्म में उनके अलावा नरगिस, कामिनी कौशल और प्रेमनाथ मुख्य किरदार में थे।

1949 में उन्होंने महबूब खान की हिट फिल्म ‘अंदाज़’ में दिलीप कुमार और नरगिस के साथ सह-अभिनय किया जो एक अभिनेता के रूप में उनकी पहली बड़ी सफल फिल्म थी। इसी साल राजकपूर की फिल्म ‘बरसात’ रिलीज हुई जिसकी सफलता ने राजकपूर को फिल्म इंडस्ट्री में बतौर सफल निर्माता, निर्देशक और अभिनेता के रूप में पहचान दिलाई।

इन फिल्मों के जरिए हमेशा किया जाएगा याद

‘आवारा’ (1951), ‘अनहोनी’ (1952), ‘आह’ (1953), ‘श्री’ 420 (1955), ‘जागते रहो’ (1956), ‘चोरी-चोरी’ (1956), ‘अनाड़ी’ (1959), ‘जिस देश में गंगा बहती है’ (1960), ‘छलिया’ (1960), ‘दिल ही तो है’ (1963) जैसी बेहतरीन फिल्में हैं।

शादी के बावजूद हमेशा जुड़ा को-स्टार के साथ नाम

राजकपूर के पिता पृथ्वीराज कपूर ने साल 1946 में राज की शादी अपने मामा की बेटी कृष्णा से करवाई। उस वक्त राज की उम्र महज 22 साल थी। इसके बावजूद उनका नाम उस दौर की कई मशहूर अभिनेत्री वैजयन्ती माला, नरगिस और पद्मिनी के साथ अपने रिश्ते को लेकर खबरों में रहे। राजकपूर और कृष्णा के तीन बेटे रणधीर कपूर, ऋषि कपूर, राजीव कपूर और दो बेटियां रितु नंदा और रीमा जैन हैं।

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