राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश द्वारा राष्ट्रपति को लिखे पत्र को पीएम मोदी ने बताया प्रेरक, देशवासियों से पढ़ने को कहा

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Harivansh-Narayan-SIngh

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह की ओर से राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को लिखे पत्र के हर शब्द को लोकतंत्र के प्रति आस्था को नया विश्वास देने वाला बताया। पीएम मोदी ने कहा कि इसमें सच्चाई के साथ-साथ संवेदनाए भी हैं और देशवासियों को इसे जरूर पढ़ना चाहिए। पत्र का एक-एक शब्द प्रेरक भी है और प्रशंसनीय भी। वहीं, केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश के पत्र को भारत की राजनीति और लोकनीति की अमूल्य धरोहर बताया है।

हरिवंश जी ने जो पत्र लिखा, उसे मैंने भी पढ़ा: प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यसभा के उपसभापति के इस पत्र की प्रति ट्वीटर पर साझा करते हुए लिखा, ‘माननीय राष्ट्रपति जी को माननीय हरिवंश जी ने जो पत्र लिखा, उसे मैंने पढ़ा। पत्र के एक-एक शब्द ने लोकतंत्र के प्रति हमारी आस्था को नया विश्वास दिया है। यह पत्र प्रेरक भी है और प्रशंसनीय भी। इसमें सच्चाई भी है और संवेदनाएं भी। मेरा आग्रह है, सभी देशवासी इसे जरूर पढ़ें।’

गौरतलब है कि रविवार को उच्च सदन में कृषि संबंधी विधेयकों को पारित किए जाने के दौरान भारी हंगामा हुआ था। इस विरोध के बावजूद किसान उत्पादन व्यापार एवं वाणिज्य (प्रोत्साहन एवं सुविधा) विधेयक 2020 तथा किसान (सशक्तिकरण एवं संरक्षण) मूल्य आश्वासन का समझौता एवं कृषि सेवा विधेयक ध्वनि मत से पारित हुए थे। अगले दिन यानी सोमवार को अमर्यादित व्यवहार के कारण विपक्षी दलों के आठ सदस्यों को शेष सत्र के लिए निलंबित कर दिया गया, जिसके विरोध में सभी निलंबित सदस्य संसद भवन परिसर में ही अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए।

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विपक्षी सदस्यों के आपत्तिजनक आचरण पर जताई पीड़ा

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को लिखे पत्र में राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह ने विपक्षी सदस्यों के आपत्तिजनक आचरण पर गहरी पीड़ा जताई है और घोषणा की है कि वह 24 घंटे का उपवास करेंगे। पत्र में उन्होंने उम्मीद जताई कि इससे आपत्तिजनक आचरण करने वाले सदस्यों में आत्म-शुद्धि का भाव जागृत होगा। उन्होंने आगे कहा, ’20 सितंबर को राज्यसभा में जो कुछ भी हुआ, उससे पिछले दो दिनों से गहरी आत्मपीड़ा, आत्मतनाव और मानसिक वेदना में हूं। पूरी रात सो नहीं पाया। उच्च सदन में जो दृश्य उत्पन्न हुआ, उससे सदन और आसन की मर्यादा को अकल्पनीय क्षति हुई है।’

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