पंडित रविशंकर: एक सितार वादक जिन्हें तीन ग्रैमी अवॉर्ड से नवाजा गया

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भारतीय शास्त्रीय संगीत को दुनियाभर में पहुंचाने वाले सितार वादक भारत रत्न पंडित रविशंकर की 11 दिसंबर को 7वीं डेथ एनिवर्सरी हैं। उन्हें वर्ष 1999 में भारत सरकार ने देश का सवोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया था। वह तीन बार ग्रैमी अवॉर्ड से नवाजे गए थे। संगीत प्रेमी जहां उनके सितारों के सुरों से आज भी आनंदित हो उठते हैं।

डांस छोड़, सितार सीखा

पंडित रविशंकर का जन्म 7 अप्रैल, 1920 को उत्तर प्रदेश के वाराणसी में हुआ था। उन्होंने नृत्य के जरिए कला जगत में प्रवेश किया था। वह अपने बड़े भाई उदयशंकर की तरह डांसर बनना चाहते थे। युवावस्था में उन्होंने अपने भाई के साथ डांस ग्रुप के साथ यूरोप सहित अन्य देशों का दौरा किया। उन्होंने 18 साल की उम्र में सितार सीखने के लिए डांस छोड़ दिया और मैहर गए, जहां उस्ताद अलाउद्दीन खान से सितार खीखने के लिए खुद का समर्पित कर दिया। कुछ समय बाद ही सितार और पं. रविशंकर एक-दूसरे के पर्याय बन गए। दुनियाभर में प्रसिद्ध बैंड बिटल्स के साथ भी उन्होंने सितार बजाया।

वैवाहिक जीवन

उन्होंने अपना पहला सितार वादन का सार्वजनिक प्रदर्शन दिसंबर, 1939 में किया। रविशंकर ने अपने गुरु उस्ताद अलाउद्दीन की बेटी अन्नपूर्णा देवी से वर्ष 1941 में शादी की। दोनों के एक बेटा शुभेन्द्र शंकर हुआ, जो अब जीवित नहीं हैं। वह अन्नपूर्णा देवी से अलग हो गए। इसके बाद उनका संबंध प्रसिद्ध नृत्यांगना कमला शास्त्री के साथ रहा। वह नृत्यांगना कमला के साथ लिव-इन-रिलेशन में रहे। कुछ समय बाद उनके बीच दूरी बनी और रविशंकर न्यूयॉर्क की कॉन्सर्ट प्रोड्यूसर सू जोन्स के साथ रिश्ता बना कर लिव—इन—रिलेशन में रहने लगे। उनके वर्ष 1979 में एक बेटी नोरा जोन्स को जन्म हुआ। नोरा भी एक प्रसिद्ध सिंगर और सितार वादक हैं।

बाद में रविशंकर और सू के बीच संबंध टूट गया तो वह वर्ष 1981 में सुकन्या राजन के संपर्क में आए। उनके इस संबंध से सुकन्या को एक बेटी अनुष्का हुई। बेटी होने के बाद दोनों ने वर्ष 1989 में शादी की। पं. रविशंकर की विरासत को दोनों बेटियों अनुष्का शंकर और नोरा जोन्स आगे बढ़ा रही है।

अवॉर्ड और सम्मान

सितारवादक पंडित रविशंकर ने नृत्य के माध्यम से कला जगत में प्रवेश किया था। उन्हें पूरी दुनिया में शास्त्रीय संगीत में भारत का दूत माना जाता था। उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें कई सम्मान और अवॉर्ड प्राप्त हुए हैं। वह वर्ष 1986 से 1992 तक राज्यसभा के सदस्य भी रहे।

उन्हें वर्ष 1962 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, वर्ष 1967 में पद्म भूषण अवॉर्ड, संगीत नाटक अकादमी फैलोशिप (1975), पद्म विभूषण (1981) और वर्ष 1999 में भारत रत्न पुरस्कार मिले।

यह नहीं उन्हें वैश्विक स्तर पर रेमन मैग्सेसे पुरस्कार 1992, संगीत की सेवा के लिए वर्ष 2001 में एलिजाबेथ द्वितीय द्वारा मानद नाइट कमांडर ऑफ़ द ऑर्डर ऑफ़ द ब्रिटिश एम्पायर (KBE) अवॉर्ड मिला। उन्हें तीन बार ग्रैमी अवॉर्ड मिले।

निधन

भारतीय संगीत को दुनिया के कोने—कोने पहुंचाने वाले पंडित रविशंकर का 92 साल की उम्र में 12 दिसंबर, 2012 को सैन डिएगो के एक हॉस्पिटल में निधन हो गया।

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