लोकसभा चुनाव: कर्नाटक में नए लोग मैदान में, टिक पाएगी JD(S)-कांग्रेस की नांव?

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लोकसभा चुनावों में सभी की नजरें गठबंधन पर टीकी हुई हैं। ऐसे में पार्टियां सीट शेयरिंग पर खासा ध्यान दे रही हैं। हम बात कर रहे हैं JD(S) और कांग्रेस की जो आगामी चुनावों के लिए अपनी अंतिम योजना की ओर हैं। ऐसे में इस योजना में एक अभिनेता और मुख्यमंत्री का बेटा, एक अभिनेत्री और एक पूर्व सांसद की पत्नी को मुख्य भूमिका में देखा जा रहा है।

दक्षिणी कर्नाटक में मांड्या निर्वाचन क्षेत्र वोक्कालिगाओं का गढ़ है यह इस क्षेत्र का एक प्रमुख समुदाय माना जाता है। इसी सामुदाय से पूर्व प्रधानमंत्री एच. डी. देवेगौड़ा आते हैं। कांग्रेस की भी यहां पकड़ रही है। जबकि दोनों दलों के नेताओं ने स्पष्ट किया है कि मांड्या लोकसभा क्षेत्र JD(S) के पास होगा।

nikhil-gowda
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पिछले दो दशकों में सीट के लिए हुए छह चुनावों में JD(S) ने तीन बार जीत दर्ज की जिसमें 2018 उपचुनाव, 2014 और 2009 के चुनाव शामिल हैं इसके अलावा कांग्रेस ने यहां 2013 उपचुनाव, 2004 और 1999 चुनावों में जीत दर्ज की है। भाजपा का सबसे अच्छा प्रदर्शन 2018 उपचुनाव में आया था जब कांग्रेस ने JD(S) के सहयोगी के लिए उम्मीदवार नहीं उतारा था।

बीजेपी ने यहां फिलहाल पैर जमा लिए हैं इसीलिए शायद JD(S) और कांग्रेस ने इस बार एक अलग निर्णय लिया है और कहा जा रहा है कि मांड्या से देवेगौड़ा के पोते और कर्नाटक के सीएम एच. डी. कुमारस्वामी के बेटे फिल्म अभिनेता निखिल कुमारस्वामी (34) को मैदान में उतारा जा सकता है।

prajwal revanna
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एक तरह से निखिल चुनावी राजनीति में गौड़ा परिवार के छठे सदस्य बन जाएंगे। परिवार के एक अन्य पोते प्रज्वल रेवन्ना भी लोकसभा चुनाव लड़ने की उम्मीद कर रहे हैं। कुमारस्वामी के अलावा राज्य की राजनीति में उनके भाई और मंत्री एच. डी. रेवन्ना और पत्नी व विधायक अनीता भी हैं। भाजपा ने सोमवार को जेडी (एस) पर राजनीति को “एक पारिवारिक व्यवसाय” में बदलने का आरोप लगाया।

जद (एस) की योजनाओं पर चिंता जताते हुए मांड्या के एक स्थानीय नेता ने कहा कि अगर हम एक उम्मीदवार को मैदान में नहीं उतारते हैं तो राज्य में अगले विधानसभा चुनावों तक निर्वाचन क्षेत्र में हमारा समर्थन आधार पूरी तरह से समाप्त हो जाएगा।

मांड्या से कई कांग्रेस कार्यकर्ता स्वर्गीय फिल्म स्टार एम एच अंबरीश की पत्नी अभिनेत्री सुमलाथा के मामले को आगे बढ़ा रहे हैं। अंबरीश ने मांड्या में तीन बार जीत दर्ज की। कांग्रेस के टिकट पर दो बार और एक बार जनता दल के उम्मीदवार के रूप में जीता था। सुमलता किसी भी राजनीतिक अनुभव की कमी के बावजूद उत्सुक हैं। कुछ दिनों पहले, उन्होंने कहा था कि कुछ कांग्रेसी नेता अन्य पदों की पेशकश करके मुझे समझाने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन मुझे केवल कांग्रेस का टिकट चाहिए। कांग्रेस अपना रुख जब साफ कर लेगी तो बाद मैं निर्दलीय के रूप में चुनाव लड़ने पर विचार करूंगी।

Sumalatha
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यह दर्शाता है कि वह कितनी गंभीर है। अभिनेत्री ने हाल ही में सीआरपीएफ के कांस्टेबल एच गुरु की विधवा को जमीन गिफ्ट की थी जिनकी 14 फरवरी के पुलवामा हमले में मौत हो गई थी।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डी के शिवकुमार ने कहा है कि सुमलता को मैदान छोड़ने के लिए मना लिया जाएगा। भाजपा पहले ही उनके पास पहुंच चुकी है और पूर्व डिप्टी सीएम आर अशोक ने उनसे कहा कि वे उन्हें टिकट देने के लिए तैयार हैं। जेडी (एस) ने भी इस मसले पर अपना रिएक्शन दिया। पिछले सप्ताह मांड्या में एक सार्वजनिक सभा में कुमारस्वामी ने कहा कि उन्होंने अंतिम सम्मान देने के लिए स्थानीय लोगों को अंबरीश के शव को मांड्या भेज दिया था।

एन चेलुवरयस्वामी जैसे स्थानीय नेता जिन्होंने पिछले साल जेडी (एस) छोड़ दिया था और कांग्रेस में शामिल हो गए थे कथित तौर पर सुमलथा का समर्थन भी कर रहे हैं। इस बीच रेवन्ना द्वारा पति की मौत के कुछ महीनों के भीतर चुनाव मैदान में उतरने वाली अभिनेत्री के बारे में एक निंदनीय टिप्पणी ने चारों ओर आलोचना की और सुमलाथा के प्रति सहानुभूति पैदा की।

हालांकि कांग्रेस के अन्य नेताओं ने जेडी (एस) को स्वीकार किया है कि सीट पर उनका बड़ा दावा है। एक कांग्रेस नेता का कहना है कि जेडी (एस) ने 2018 के चुनाव में मांड्या की आठ विधानसभा सीटों में से सात पर जीत हासिल की। यह स्वाभाविक रूप से उनकी सीट है।

हाल में, पूर्व सीएम और कांग्रेस-जेडी (एस) गठबंधन समन्वय समिति के अध्यक्ष सिद्धारमैया ने कहा कि मांड्या जेडी (एस) के हिस्से में ही जाएगा। सुमलता निर्दलीय के रूप में चुनाव लड़ेंगी या नहीं यह उनके ऊपर है।

जेडी (एस) नेता दानिश अली ने कहा कि कांग्रेस ने उनकी चर्चा में सीट की मांग नहीं की है। यह बस मीडिया में फैलाया गया है।

sumalatha-ambareesh
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क्या मांड्या के लिए निखिल को आगे नहीं करना चाहिए? जेडी (एस) के सूत्रों ने कहा कि उन्हें पड़ोसी मैसूरु में स्थानांतरित किया जा सकता है जिसे पार्टी के लिए एक सुरक्षित सीट भी माना जाता है। उस स्थिति में जेडी (एस) पूर्व आईएएस अधिकारी लक्ष्मी अश्विन गौड़ा को मांड्या से मैदान में उतारने की संभावना है।

दूसरी सीटें

हसन निर्वाचन क्षेत्र में भी प्रचार किया जा रहा है जिसने देवेगौड़ा को पांच बार संसद के लिए चुना है और जेडी (एस) द्वारा उनके पोते और पीडब्ल्यूडी मंत्री एच. डी. रेवन्ना के 28 वर्षीय बेटे प्रज्वल रेवन्ना को राजनीति में यहीं से लाया जा सकता है। हासन के पूर्व कांग्रेस विधायक ए मंजू द्वारा इसका विरोध किया जा रहा है।

मंजू, जो सिद्धारमैया सरकार में मंत्री थीं उन्होंने कहा है कि स्थानीय कांग्रेस कार्यकर्ता केवल देवेगौड़ा का समर्थन करेंगे और बाकी किसी भी पारिवारिक सदस्य का समर्थन नहीं करेंगे। कांग्रेसी आशंकाओं को भांपते हुए मंजू को भाजपा नेताओं के साथ देखा गया।

इस बीच, देवेगौड़ा ने स्पष्ट रूप से संकेत नहीं दिया है कि वह खुद किस सीट से चुनाव लड़ेंगे। हालाँकि यह व्यापक रूप से बैंगलोर उत्तर माना जाता है। जेडी (एस) के सूत्रों ने कहा कि पार्टी अध्यक्ष मैसूरु से भी चुनाव लड़ सकते हैं।

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