WEF रिपोर्ट: स्वास्थ्य और आर्थिक आधार पर लैंगिक असमानता में भारत 112वें पायदान पर, आइसलैंड अब भी शीर्ष पर

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वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (डब्ल्यूईएफ) ने वैश्विक स्तर पर महिलाओं के स्वास्थ्य और आर्थिक भागीदारी के मामले में व्यापक लैंगिक असमानता पर रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट में भारत को जेंडर गैप के मामले में 112वें पायदान पर रखा गया है, जोकि पिछले साल से चार अंक गिर गया है। डब्ल्यूईएफ ने यह रिपोर्ट 17 दिसंबर को जारी की। वैश्विक स्तर पर लैंगिक असमानता के मामले में आइसलैंड सबसे बेहतर देश है और वह पहले स्थान पर काबिज है।

डब्ल्यूईएफ की जेंडर गैप रिपोर्ट के अनुसार भारत के पड़ौसी देश बांग्लादेश 50वें, नेपाल 101वें, श्रीलंका 102वें, चीन 106वें और पाकिस्तान 151वें स्थान पर हैं। वहीं ब्राजील (92वें), इंडोनेशिया (85वें), इराक 152वें और यमन 153वें स्थान पर है।

रिपोर्ट के मुताबिक भारत में स्वास्थ्य और आर्थिक मामले में हालात खराब है, जिसके कारण भारत को इस रैंकिंग में 4 अंकों का नुकसान हुआ और वह इस साल 108वें पायदान से 112वें पायदान पर आ गया है। महिला स्वास्थ्य और उनकी जीविका के मामले में भी भारत की स्थिति पहले से खराब हुई है।

जेंडर गेप दूर करने में लगेंगे 99.5 साल

डब्ल्यूईएफ ने कहा कि ‘पहले माना जा रहा था कि वैश्विक स्तर पर लैंगिक असमानता को समाप्त होने में 108 साल का समय लग जाएगा। लेकिन वर्तमान में जिस तरह से विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है उसके बाद से कहा जा रहा है कि इस असमानता को खत्म होने में 99.5 साल लगेंगे। देश में शिक्षा, स्वास्थ्य, काम और राजनीति के क्षेत्र में महिलाओं और पुरुषों में अभी भी असमानता है। हालांकि, 2018 में स्थिति थोड़ी बेहतर हुई थी।’

वहीं अंतर्राष्ट्रीय संगठन डब्ल्यूईएफ ने कहा है कि पुरुषों और महिलाओं के मध्य राजनीतिक असमानता को समाप्त होने में अभी करीब 95 साल लगेंगे। वहीं राजनीतिक असमानता को लेकर पिछले साल कहा जा रहा था कि इसमें 107 साल लग सकता है।

डब्ल्यूईएफ के अनुसार वैश्विक स्तर पर विभिन्न संसदों के निचले सदन में महिलाओं की वर्तमान में कुल हिस्सेदारी 25.2 फीसदी हो गई है, जो पिछले साल 24.1 फीसदी थी। वहीं विभिन्न देशों में करीब 21.2 फीसदी महिलाओं को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है, जिसकी संख्या पिछले साल 19 फीसदी थी।

हालांकि, आर्थिक असमानता में अभी भी काफी गेप है। रिपोर्ट के मुताबिक, इसमें सबसे बड़ी चुनौती है क्लाउड कंप्यूटिंग, इंजीनियरिंग, डेटा और एआई जैसे क्षेत्रों में महिलाओं के प्रतिनिधित्व का कम होना।

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