देश के दो बार कार्यवाहक पीएम रहे गुलज़ारीलाल नंदा कभी थे अर्थशास्त्र के प्राध्यापक

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Gulzarilal-Nanda-Biography

देश की आजादी और श्रमिकों की समस्याओं के समाधान के लिए लड़ने वाले राजनेता और शिक्षाविद गुलजारीलाल नंदा की आज 24वीं पुण्यतिथि है। गुलजारी लाल भारत के दो बार कार्यवाहक प्रधानमंत्री रहे थे। नंदा बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। उनके जीवन का सिद्धांत सादा जीवन और उच्च विचार था। वह श्रमिकों की समस्याओं को लेकर हमेशा जागरुक और तत्पर रहे व उन समस्याओं के निदान का खूब प्रयास भी किया। ऐसे में इस खास मौके पर जानिए उनके जीवन के बारे में कुछ अनसुनी बातें…

गुलज़ारी लाल नंदा का प्रारंभिक जीवन

गुलज़ारी लाल नंदा का जन्म 4 जुलाई, 1898 को पंजाब के सियालकोट (वर्तमान पाकिस्तान) में हुआ था। इनके पिता बुलाकी राम नंदा तथा माता श्रीमती ईश्वर देवी नंदा थी। इनकी प्रारंभिक शिक्षा सियालकोट में पूरी हुई, जिसके बाद नंदा ने लाहौर के फोरमैन क्रिश्चियन कॉलेज और इलाहाबाद विश्वविद्यालय में अध्ययन किया। वह अध्ययन करने के लिए आगरा और अमृतसर भी गए। उन्होंने कला वर्ग में स्नातकोत्तर किया और क़ानून की स्नातक (एल.एल.बी) उपाधि प्राप्त की। इनका विवाह सन् 1916 में 18 वर्ष की अवस्था में लक्ष्मी देवी के साथ संपन्न हुआ। उनके दो बेटे और एक बेटी थी। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय (1920-1921) में श्रम संबंधी समस्याओं पर एक शोध अध्येता के रूप में कार्य किया एवं वर्ष 1921 में नेशनल कॉलेज (मुंबई) में अर्थशास्त्र के प्राध्यापक के पद पर कार्य करने लगे।

राजनैतिक व सार्वजनिक जीवन

गुलजारी लाल ने देश की आजादी में बढ़ चढ़कर भाग लिया और वर्ष 1921 में महात्मा गांधी द्वारा चलाए गए असहयोग आन्दोलन में शामिल हो गए। वर्ष 1922 में वह अहमदाबाद टैक्सटाइल लेबर एसोसिएशन के सचिव बने जिसमें उन्होंने 1946 तक काम किया। उन्हें 1932 में सत्याग्रह आंदोलन के दौरान कारावास की सजा काटनी पड़ी। वर्ष 1942 में भारत छोड़ो आन्दोलन के दौरान आंदोलन में भाग लेने के कारण उन्हें गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया गया और वर्ष 1944 तक जेल में कैद रहे।

गुलजारी लाल को वर्ष 1937 में बम्बई विधानसभा से निर्वाचित किया गया और वह वर्ष 1937 से 1939 तक मुंबई सरकार के संसदीय सचिव (श्रम एवं उत्पाद शुल्क) के पद पर कार्यरत रहे। बाद में, मुबंई सरकार के श्रम मंत्री (1946 से 1950 तक) के रूप में उन्होंने राज्य विधानसभा में सफलतापूर्वक ‘श्रम विवाद विधेयक’ को सफलता पूर्वक पास कराया। उन्होंने कस्तूरबा मेमोरियल ट्रस्ट में न्यासी के रूप में, हिंदुस्तान मजदूर सेवक संघ में सचिव के रूप में एवं बाम्बे आवास बोर्ड में अध्यक्ष के रूप में कार्य किया। वे राष्ट्रीय योजना समिति के सदस्य भी रहे। इन्होंने ‘इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस’ के गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और बाद में वह इसके अध्यक्ष भी बने।

वर्ष 1947 में उन्हें जेनेवा में हुए अंतर्राष्ट्रीय श्रम सम्मेलन में एक सरकारी प्रतिनिधि के रूप में भाग लेने के लिए भेजा गया। उन्होंने सम्मेलन द्वारा नियुक्त ‘द फ्रीडम ऑफ़ एसोसिएशन कमेटी’ पर कार्य किया एवं स्वीडन, फ्रांस, स्विट्जरलैंड, बेल्जियम एवं इंग्लैंड का दौरा किया ताकि वे उन देशों में श्रम एवं आवास की स्थिति का अध्ययन कर सकें। वर्ष 1950 में उन्हें योजना आयोग के उपाध्यक्ष के लिए चुना गया और उन्हें वर्ष 1951 में केंद्र सरकार में योजना मंत्री का पद दिया गया। उन्हें सिचाई और ऊर्जा विभाग की जिम्मेदारी भी सौंपी गयी।

सन् 1952 में वे बॉम्बे से लोकसभा के लिए चुने गए और केंद्र में पुनः योजना, सिंचाई और ऊर्जा मंत्री बनाये गए। वर्ष 1957 में वह एक बार फिर लोकसभा चुनाव में विजयी हुए और पुनः केन्द्रीय श्रम, रोज़गार और योजना मंत्री का कार्यभार संभाला। इसके बाद उन्हें योजना आयोग का उपाध्यक्ष बनाया गया। सन 1962 के लोकसभा चुनाव में वे साबरकांठा से चुने गए और सन् 1962-63 में ‘श्रम और रोज़गार’ और सन 1963 से 1966 तक केन्द्रीय गृह मंत्री रहे।

कार्यवाहक प्रधानमंत्री के तौर पर

गुलजारी लाल नंदा को दो बार भारत का कार्यवाहक प्रधानमंत्री बनाया गया और दोनों बार मात्र 13—13 दिनों के लिए बने। पहली बार उन्हें तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु की मृत्यु के बाद वर्ष 1964 में और दूसरी बार लाल बहादुर शास्त्री के निधन के बाद वर्ष 1966 में कार्यवाहक प्रधानमंत्री बनने का सौभाग्य मिला।

पुस्तक लेखन

गुलजारी लाल ने अपने जीवन काल में कई पुस्तकें लिखी जिनमें प्रमुख हैं- सम आस्पेक्ट्स ऑफ़ खादी, अप्रोच टू द सेकंड फ़ाइव इयर प्लान, गुरु तेगबहादुर, संत एंड सेवियर, हिस्ट्री ऑफ़ एडजस्टमेंट इन द अहमदाबाद टेक्सटाल्स, फॉर ए मौरल रिवोल्युशन तथा सम बेसिक कंसीड्रेशन।

भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान से सम्मानित हुए

गुलज़ारी लाल नन्दा को वर्ष 1997 में देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न और दूसरे सर्वश्रेष्ठ नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया।

देहांत

देश के कार्यवाहक प्रधानमंत्री और गांधीवादी राजनेता गुलजारी लाल नंदा का देहांत 100 वर्ष की अवस्था में 15 जनवरी, 1998 को हुआ।

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