स्पेशल: यश चोपड़ा को जाता है किंग खान को बॉलीवुड में स्थापित करने का श्रेय

Views : 2638  |  4 minutes read
Yash-Chopra-Biography

बॉलीवुड के ​सुप्रसिद्ध फिल्म निर्देशक रहे यश चोपड़ा को सिनेमाई पर्दे पर रोमांस की नई परिभाषा गढ़ने का श्रेय दिया जाता है। बॉलीवुड को ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’, ‘लम्हे’, ‘चांदनी’, ‘साथिया’, ‘रब ने बना दी जोड़ी’, जैसी कई रोमंटिक फिल्में देने वाले यश को रोमांटिक कहानियों को पर्दे पर उतारने में महारथ हासिल थी। इसीलिए उन्हें सिनेमा जगत का ‘किंग ऑफ रोमांस’ भी कहा जाता है। आज यश चोपड़ा की 8वीं पुण्यतिथि है। ऐसे मौके पर जानते हैं उनके बारे में कुछ ख़ास बातें..

यश चोपड़ा का लाहौर हुआ था जन्म

यश चोपड़ा का जन्म 27 सितंबर, 1932 को ब्रिटिश शासन के वक्त के भारत के लाहौर अब पाकिस्तान में हुआ था। उनका पूरा नाम यश राज चोपड़ा था। एक फिल्मी परिवार से ताल्लुक होने के कारण यश का बचपन से ही झुकाव सिनेमा की ओर हो गया था। पढ़ाई पूरी करने के बाद यश ने फिल्मी दुनिया में कॅरियर बनाने की दिशा में कदम बढ़ाए और यह सपना अच्छे नाम काम के साथ पूरा किया।

यश चोपड़ा को फिल्म ‘वक़्त’ से मिली थी पहचान

यश चोपड़ा अपने भाई बी.आर चोपड़ा और आई.एस जौहर के साथ बतौर सहायक निर्देशक बॉलीवुड में कदम रखा। बी.आर चोपड़ा के साथ रहकर उन्होंने फिल्म निर्माण की बारीकियां सीखीं। वर्ष 1959 में यश ने अपनी पहली फिल्म ‘धूल का फूल’ बनायी थी। बॉलीवुड में उन्हें साल 1965 में रिलीज ‘वक़्त’ से पहचान मिली।

इन फिल्मों ने पहुंचाया शोहरत की बुलंदियों पर

वर्ष 1965 में फिल्म ‘वक्त’ को मिली जबरदस्त सफलता से उत्साहित होकर यश चोपड़ा ने वर्ष 1973 में अपनी फिल्म निर्माण कंपनी ‘यश राज फिल्म्स’ की नींव रखी। यश ने ना सिर्फ हिंदी सिनेमा को बेहतरीन फिल्में दी बल्कि कई चमकते सितारों का उदय भी किया। अमिताभ बच्चन भी इन्ही में से एक हैं। अपने बैनर तले यश ने वर्ष 1973 में ‘दाग’, 1975 में ‘दीवार’, 1976 में ‘कभी कभी’, 1978 में ‘त्रिशूल’ जैसी फिल्में बनाई और हिंदी सिनेमा को बॉलीवुड का शहंशाह दिया। साल 1981 में ‘सिलसिला’, 1984 में ‘मशाल’ और 1988 में बनी ‘विजय’ यश के करियर की शानदार फिल्मों की लिस्ट में शामिल हैं।

हिंदी सिनेमा में कई नई धाराएं जोड़ने का श्रेय भी यश चोपड़ा को ही जाता है। साल 1989 में यश ने फिल्म ‘चाँदनी’ बनाई जिसने बॉलीवुड में संगीत को एक नया मुकाम दिया। साल 1991 में आई फिल्म ‘लम्हें’ को ना सिर्फ सिनेमा जगत की बल्कि यश की सबसे बेहतरीन फिल्म कहा जाता है। शाहरुख खान को बॉलीवुड में स्थापित करने का श्रेय भी यश को ही जाता है। यश ने साल 1993 में शाहरुख को लेकर फिल्म ‘डर’ का निर्माण किया। इसके बाद शाहरुख के साथ उन्होंने ‘दिल तो पागल है’, ‘वीरजारा’, ‘जब तक है जान’ बनाईं।

फिल्म निर्देशक यश चोपड़ा की निजी जिंदगी

यश चोपड़ा की शादी पामेला चोपड़ा से हुई। उनके दो बेटे उदय चोपड़ा और आदित्य चोपड़ा हैं, जो फिल्म इंडस्ट्री में सक्रीय है। आदित्य चोपड़ा फिल्म निर्माता-निर्देशक हैं, वहीं उदय चोपड़ा फिल्म अभिनेता है। साल 2012 में 21 अक्टूबर को यश चोपड़ा का आकस्मिक निधन हो गया था।

Read More: ओम पुरी का बहुत गरीबी में बीता था बचपन, मां के साथ रहते थे ननिहाल

सिनेमा में अतुल्य योगदान के लिए मिले कई बड़े सम्मान

यश चोपड़ा ने तकरीबन पांच दशक के अपने फिल्मी कॅरियर में बॉलीवुड को 50 से अधिक फिल्में दीं। हिंदी सिनेमा में अतुल्य योगदान के लिए यश को छह बार ‘राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार’, 11 बार ‘फिल्म फेयर पुरस्कार’, व वर्ष 2001 में भारतीय सिनेमा का सबसे बड़ा पुरस्कार ‘दादा साहेब फाल्के पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया। यश चोपड़ा को साल 2005 में भारत सरकार ने सिनेमा में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए देश के तीसरे सबसे प्रतिष्ठत पुरस्कार ‘पद्म भूषण’ से नवाज़ा था।

Yash-Chopra-

COMMENT