डॉ. कैलाश वाजपेयी: ‘हवा में हस्ताक्षर’ काव्य संग्रह के लिए मिला था साहित्य अकादमी पुरस्कार

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हिन्दी साहित्य के प्रसिद्ध कवि और लेखक डॉ. कैलाश वाजपेयी की 11 नवंबर को 83वीं बर्थ एनिवर्सरी हैं। वाजपेयी दार्शनिक मिजाज के कवि थे। उन पर अद्वैतवाद और बौद्ध दर्शन का गहरा प्रभाव दिखाई पड़ता है। उन्हें साहित्य अकादमी सहित कई पुरस्कारों से नवाजा गया था। वाजपेयी दैनिक समाचार पत्र अमर उजाला के लिए कॉलम भी लिखते थे। उनकी कविताओं का कई भाषाओं में अनुवाद हुआ है। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी कविताओं की प्रस्तुति दी थी।

वर्ष 1960 के दशक बाद नई कविता से अलग ‘सन साठ के बाद की कविता’ कहा गया। इस कविता के प्रमुख रचनाकारों में रघुवीर सहाय, कुंवर नारायण, श्रीकांत वर्मा, सर्वेश्वर दयाल सक्सेना, केदारनाथ सिंह और कैलाश वाजपेयी ने हिंदी की आधुनिक कविता को नई बुलंदियों पर पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की।

जीवन परिचय

कैलाश वाजपेयी का जन्म 11 नवंबर, 1936 में उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले के हमीरपुर में हुआ था। उन्हें लखनऊ विश्वविद्यालय ने वाचस्पति की उपाधि प्रदान की गई। वह कई पत्र-पत्रिकाओं से जुड़े रहे। उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से संबंधित शिवाजी कॉलेज में अध्यापन कार्य किया और वर्ष 2004 में सेवानिवृत्त हुए।

कैलाश वाजपेयी ने हिंदी कविता में अपना योगदान दिया। उनका पहला कविता संग्रह ‘संक्रांत’ वर्ष 1964 में प्रकाशित हुआ था। इस समय उनकी उम्र 28 वर्ष थी।

उनको काव्य संग्रह ‘हवा में हस्ताक्षर’ के लिए वर्ष 2009 में साहित्य अकादमी पुरस्कार दिया गया था। वर्ष 2008 से 2013 तक साहित्य अकादमी की सामान्य परिषद के सदस्य भी रहे।

उनकी पहचान भारतीय संस्कृति के मर्मज्ञ और कवि के रूप में उनकी ख्याति अधिक थी। उन्होंने दिल्ली दूरदर्शन पर कबीर, हरिदास स्वामी, सूरदास, जे. कृष्णमूर्ति, रामकृष्ण परमहंस और बुद्ध के जीवन-दर्शन पर फिल्में बनाई। वह दूरदर्शन की हिंदी सलाहकार समिति के सदस्य भी रह चुके।

वाजपेयी ने वर्ष 1960 में टाइम्स ऑफ इण्डिया प्रकाशन संस्थान, मुंबई में नौकरी कर ली। लेखन के साथ ही उन्होंने स्पेनिश, अंग्रेजी और जर्मन में भी अनुवादित हुई हैं।

उनके द्वारा लिखित एवं प्रकाशित कृतियां

कविता संग्रह : संक्रांत (1964), देहांत से हटकर, तीसरा अँधेरा (1972),
महास्वप्न का मध्यान्तर (1980), प्रतिनिधि कविताएं, सूफ़ीनामा, सूफ़ीनामा (द्वितीय संस्करण-1998), भविष्य घट रहा है, हवा में हस्ताक्षर (2005), शब्द संसार, अनहट

दर्शन

द साइंस ऑफ़ मंत्राज़ (1981, अंग्रेज़ी और स्पेनिश भाषाओं में)
एस्ट्रा-कॉम्बिनेशंस (1987, अंग्रेज़ी में)

शोधप्रबन्ध

आधुनिक हिन्दी-कविता में शिल्प (1963)

निबंध संग्रह

समाज दर्शन और आदमी (1995)
आधुनिकता उत्तरोत्तर (1996)
एन एंथालिजि ऑफ़ माडर्न हिंदी पोएट्री (1996)

नाटक

युवा संन्यासी, विवेकानन्द – 1991 सार : आख्यायिकाएँ (1994)

प्रबंध काव्य

पृथ्वी का कृष्णपक्ष (1995)

पुरस्कार और सम्मान

डॉ. कैलाश वाजपेयी को लेखन के क्षेत्र दिए उनके योगदान के लिए कई पुरस्कार और सम्मान मिले थे। उन्हें वर्ष 1995 में हिन्दी अकादमी सम्मान, वर्ष 2000 में एसएस मिलेनियम अवॉर्ड, वर्ष 2002 में व्यास सम्मान और वर्ष 2005 में ह्यूमन केयर ट्रस्ट अवॉर्ड मिले है। वर्ष 2009 में उन्हें उनके काव्य संग्रह ‘हवा में हस्ताक्षर’ के लिए स‌ाहित्य अकादमी पुरस्कार मिला।

निधन

हिंदी के प्रसिद्ध कवि डॉ. कैलाश वाजपेयी का हृदयाघात आने से 1 अप्रैल, 2015 को निधन हो गया। उनके परिवार में पत्नी डॉ. रूपा वाजपेयी और पुत्री अनन्या वाजपेयी हैं।

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