स्पेशल: कभी 300 रुपये मासिक सैलरी में पेट्रोल पम्प पर काम करते थे उद्योगपति धीरूभाई अंबानी

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रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड यानि आरआईएल की नींव रखने वाले धीरूभाई अंबानी की 28 दिसंबर को 88वीं जयंती है। उनका पूरा नाम धीरजलाल हीराचंद अंबानी था। उनके द्वारा खड़ा किया गया बिजनेस आज उनके दोनों पुत्र मुकेश अंबानी और अनिल अंबानी संभाल रहे हैं। रिलायंस इंडस्ट्रीज की स्थापना करने वाले धीरूभाई सिर्फ 10वीं तक पढ़े थे। वह अपने दृढ-संकल्प के बूते भारत के प्रसिद्ध उद्योगपति बनकर उभरे।

धीरूभाई अंबानी की सफलता की कहानी कुछ ऐसी है कि उनकी शुरुआती सैलरी महज 300 रुपये हुआ करती थी। लेकिन अपनी मेहनत के दम पर देखते ही देखते वह करोड़ों के मालिक बन गए। भारतीय बिजनेस की दुनिया के बेताज बादशाह धीरूभाई के पद चिन्हों पर चलकर ही आज उनके दोनों बेटे मुकेश अंबानी और अनिल अंबानी सफल बिजनेसमैन में शामिल हैं। ऐसे में इस ख़ास मौके पर जानते हैं उनके जीवन का संघर्ष और उनकी सफलता की कहानी..

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मात्र 500 रुपये लेकर मायानगरी आए थे धीरूभाई

धीरूभाई अंबानी गुजरात के छोटे से गांव चोरवाड़ के रहने वाले थे। उनका जन्म 28 दिसंबर, 1933 को सौराष्ट्र के जूनागढ़ जिले में हुआ था। उनके पिता स्कूल में शिक्षक हुआ करते थे। घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी, जिसके बाद उन्होंने हाईस्कूल की पढ़ाई खत्म करने के बाद ही छोटे-मोटे काम शुरू कर दिए, लेकिन इससे परिवार का पालन नहीं हो पा रहा था।

जब धीरूभाई की उम्र महज 17 साल थी तब वो पैसे कमाने के लिए वर्ष 1949 में अपने भाई रमणिकलाल के पास यमन चले गए थे। जहां उन्हें एक पेट्रोल पंप पर 300 रुपये प्रति माह सैलरी की नौकरी मिल गई। कंपनी का नाम था ‘ए. बेस्सी एंड कंपनी’। कंपनी ने धीरूभाई के काम को देखते हुए उन्हें फिलिंग स्टेशन में मैनेजर बना दिया। यहां कुछ साल नौकरी करने के बाद धीरूभाई वर्ष 1954 में वापस अपने देश चले आए। यमन में रहते हुए ही धीरूभाई ने बड़ा आदमी बनने का सपना देखा था। इसलिए घर लौटने के बाद 500 रुपये लेकर मुंबई के लिए रवाना हो गए।

बाजार की बखूबी पहचान रखते थे धीरूभाई

धीरूभाई अंबानी बाजार के बारे में बखूबी जानने लगे थे और उन्हें समझ में आ गया था कि भारत में पोलिस्टर की मांग सबसे ज्यादा है और विदेशों में भारतीय मसालों की। उन्हें बिजनेस का आइडिया यहीं से आया। उन्होंने दिमाग लगाया और एक कंपनी रिलायंस कॉमर्स कॉरपोरेशन की शुरुआत की, जिसने भारत के मसाले विदेशों में और विदेश का पोलिस्टर भारत में बेचने की शुरुआत कर दी। देखते ही देखते वर्ष 2000 में वह देश के सबसे रईस व्‍यक्ति बनकर उभरे।

10 घंटे से ज्यादा काम नहीं करते थे

धीरूभाई अंबानी ने अपने ऑफिस की शुरुआत 350 वर्ग फुट का कमरा, एक मेज, तीन कुर्सी, दो सहयोगी और एक टेलिफोन के साथ की थी। वहीं दुनिया के सबसे सफलतम लोगों में से एक धीरूभाई की दिनचर्या भी तय होती थी। वह कभी भी 10 घंटे से ज्यादा काम नहीं करते थे। धीरूभाई कहते थे, ‘जो भी यह कहता है कि वह 12 से 16 घंटे काम करता है। वह या तो झूठा है या फिर काम करने में काफी धीमा।’

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धीरूभाई को कतई पसंद नहीं थी पार्टी और ट्रैवलिंग

भारत के नंबर वन उद्योगपति रहे धीरूभाई अंबानी को पार्टी करना बिलकुल पसंद नहीं था। वह हर शाम अपने परिवार के साथ बिताते थे। यहां तक कि उन्हें ज्यादा ट्रैवल करना भी पसंद नहीं था। वह विदेश यात्राओं का काम ज्यादातर अपनी कंपनी के अधिकारियों पर टाल देते थे। धीरूभाई तब ही ट्रैवल करते, जब ऐसा करना उनके लिए अनिवार्य हो जाता था। वर्ष 2002 में 6 जुलाई को सिर की नस फट जाने के कारण भारतीय उद्योग के बादशाह धीरूभाई अंबानी का मुंबई के एक अस्पताल में देहांत हो गया।

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