इश्क़ में हारे व्यक्ति के लिए दवा का काम करती थी बेगम अख्तर की आवाज़

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Begum-Akhtar-Biography

दादरी और ठुमरी को संगीत की दुनिया में पहचान दिलाने वाली बेगम अख्तर की आज 106वीं जयंती है। उनका जन्म 7 अक्टूबर, 1914 को उत्तर प्रदेश के भदरसा में हुआ था। बेगम अख्तर को ‘गज़ल की मल्लिका’ के नाम से भी जाना जाता है। गज़ल गायिकी का शौक रखने वाले बेगम से बखूबी परिचित हैं। उनका असल नाम अख्तरी बाई फ़ैज़ाबादी था। इश्क़ में हारे व्यक्ति के लिए बेगम अख्तर की आवाज़ दवा का काम करती थी। वे गज़ल, दादरा और हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की ठुमरी शैलियों की सबसे बड़ी गायिका मानी जाती है।

बॉलीवुड की फिल्मों में भी नज़र आई थी बेगम

बेगम अख्तर गायिका होने के अलावा अदाकारा भी थी। उन्होंने कुछ हिंदी फिल्मों में काम किया था। वर्ष 1942 में वे निर्माता-निर्देशक महबूब खान की फिल्म ‘रोटी’ में लीड रोल में नज़र आई थी। बेगम अख्तर को वर्ष 1968 में भारत सरकार ने ‘पद्मश्री’ अवॉर्ड से सम्मानित किया था। इसके बाद वर्ष 1972 में उन्हें संगीत के लिए ‘संगीत नाटक अकादमी’ पुरस्कार मिला। अख्तरी बाई को साल 1975 में ‘पद्म भूषण’ पुरस्कार से नवाज़ा गया था। ऐसे में बेगम अख्तर की जयंती के मौके पर सुनिये उनकी पांच बेहतरीन गज़लें..

1.वो जो हम में तुम में क़रार था, तुम्हें याद हो के न याद हो…

संगीतकार- खय्याम-(Khaiyyam)

गीतकार- मोमिन खान ‘मोमिन’

गायक- बेगम अख्तर

2.ऐ मोहब्बत तेरे अंजाम पे रोना आया, जाने क्यूँ आज तेरे नाम पे रोना आया…

गीतकार- शकील बदायूंनी

3.मेरे हमनफ़स, मेरे हमनवा, मुझे दोस्त बन के दगा ना दे…

संगीतकार- खय्याम

गीतकार- शकील बदायुनी

गायक – बेगम अख्तर

4. हमरी अटरिया पे आओ सवारिया, देखा देखी बालम होई जाये (दादरी)

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