कल्पना चावला: भारतीय मूल की वो पहली अंतरिक्ष यात्री जिसने आसमां को बनाया अपने सपनों की दुनिया

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Kalpana-Chawla

जब भी हमारे बीच महिलाओं द्वारा किए गए ऐतिहासिक कारनामों की बात होती है कल्पना चावला का नाम जरूर लिया जाता है। अंतरिक्ष में जाने वाली भारतीय मूल की पहली महिला कल्पना दुनिया भर के करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणा है। कल्पना का जन्म 17 मार्च, 1962 को हरियाणा के करनाल जिले में श्री बनारसी लाल चावला और संजयोती चावला के घर हुआ था। चार भाई-बहनों में सबसे छोटी होने के कारण कल्पना को घर में सब प्यार से मोंटू कहकर बुलाते थे। शुरू से ही साइंस में रूचि रखने वाली कल्पना की शुरूआती पढ़ाई टैगोर पब्लिक स्कूल करनाल से हुई जिसके बाद पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज से एरोनॉटिकल इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन किया। कल्पना चावला की 58वीं बर्थ एनिवर्सरी के मौके पर जानते हैं उनके बारे में कुछ ख़ास बातें..

घरवाले चाहते थे कल्पना बने डॉक्टर या टीचर

कल्पना चावला ने क्लास 8वीं में ही अपने पिता के सामने इंजीनियरिंग बनने की इच्छा जाहिर की, लेकिन उनके पिता शुरू से ही उन्हें डॉक्टर या टीचर बनाने का सपना संजोए थे। कल्पना बचपन में अपने पिता से कुछ ऐसे सवाल करती जिससे पिता भी उसकी दिलचस्पी को समझने लगे थे। वो अक्सर अपने पिता से पूछती कि ये अंतरिक्षयान इतना ऊपर आकाश में कैसे उड़ पाते हैं? क्या मैं भी इनकी तरह उड़ान भर सकती हूं?

पढ़ाई के साथ खेलों में भी रही अव्वल

कल्पना चावला कॉलेज के दिनों में पढ़ाई के साथ-साथ खेलों में भी सक्रिय रहती थी। वह बैडमिंटन की शौकीन थी। कल्पना ने जूड़ो-कराटे भी सीखा था। लेकिन सपनों की दुनिया में जाने के लिए कल्पना 1982 में अमेरिका गई जहां यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास से उन्होंने एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में मास्टर्स किया। आगे चलकर कल्पना ने सीप्लेन, मल्टी इंजन एयर प्लेन और ग्लाइडर के लिए कमर्शियल पायलट लाइसेंस हासिल किया।

कल्पना की कही बात एक दिन हो गई सच

41 साल की उम्र में कल्पना चावला की जिंदगी की दूसरी अंतरिक्ष यात्रा ही उनकी आखिरी साबित हुई। कल्पना ने एक बार कहा था कि “मैं अंतरिक्ष के लिए ही बनी हूं। हर पल अंतरिक्ष के लिए ही बिताया है और इसी के लिए मरूंगी।” अपने पहले सफल मिशन के बाद कल्पना ने अंतरिक्ष के लिए दूसरी उड़ान 16 जनवरी, 2003 को स्पेस शटल कोलम्बिया से भरी।

धरती से 16 मिनट दूर बिखर गई थी कल्पना चावला की जिंदगी, नासा को मिल चुके थे मौत के संकेत

16 दिन का ये मिशन आखिरकार 1 फरवरी मातम में बदल गया जब खुद कल्पना की कही बात ही सच साबित हो गई। इतिहास में आज के दिन को एक ‘युग का अंत’ माना जाता है। कल्पना चावला कोलंबिया अंतरिक्ष यान से अपने 6 साथियों की टीम के साथ पृथ्वी की कक्षा में लौट रही थी तभी उनका यान टूटकर बिखर गया। देखते ही देखते अंतरिक्ष यान के टुकड़े टेक्सास शहर पर बरसने लगे।

 

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