हमारे देश के केवल 6 वित्त मंत्रियों के पास ही थी अर्थशास्त्र की डिग्री, बाकी के पास अन्य विषय

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वैस तो भारतीय संविधान में जनप्रतिनिधियों के लिए कोई शैक्षिक योग्यता का जिक्र नहीं किया गया है फिर भी शिक्षित होना बहुत ही आवश्यक है जब आप एक बड़े मंत्री हो या बड़ी जिम्मेदारी निभा रहे हो। अगर बात करे हमारे देश के वित्त मंत्री पद की, तो उस पर विराजमान अब तक केवल 6 के पास ही अर्थशास्त्र की डिग्री थी, बाकी के पास अलग-अलग विषयों की डिग्री थी। भारत में वित्त मंत्री रह चुके ज्यादातर राजनेताओं के पास इस तरह का ज्ञान बिलकुल न के बराबर था।

वे वित्तमंत्री जिनके पास केवल अर्थशास्त्र की डिग्री थी
भारत देश के वित्त मंत्री की जिम्मेदारी निभा चुके अब तक के 30 मंत्रियों में से केवल 6 के पास अर्थशास्त्र की डिग्री थी। इनमें प्रमुख थे – डॉ.मनमोहन सिंह, पी.चिदंबरम, जॉन मथाई, टी.टी. कृष्णमाचारी, आर. वेंकटरमण, इंद्र कुमार गुजराल शामिल है।

वे जो आरबीआई के गवर्नर भी रहे बाद में वित्त मंत्री बने
देश में कई ऐसे वित्त मंत्री रहे हैं, जो बाद में देश के प्रधानमंत्री और आरबीआई के गवर्नर रह चुके हैं।
सर सी.डी. देशमुख आरबीआई के गवर्नर 1943-49 तक बने रहे थे और वे वित्त मंत्री के तौर पर 1950-57 तक रहे।


इनमें पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और मोरारजी देसाई का नाम प्रमुख है जो प्रधानमंत्री बनें।
मोरारजी देसाई 22 मार्च, 1958 वित्त मंत्री बने, 1967 में वे इंदिरा गांधी के मंत्रिमंडल में उप-प्रधानमंत्री एवं वित्त के प्रभारी मंत्री के रूप में शामिल हुए। वे देश के पहले ऐसे प्रधानमंत्री थे जो गैर-कांग्रेसी जनता पार्टी से थे। 24 मार्च, 1977 को प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली और 1979 तक रहे।
वहीं मनमोहन सिंह भी वर्ष 2004 से 2014 तक देश के प्रधानमंत्री रहे। वे ऐस व्यक्ति है जो देश के वित्त मंत्री, आरबीआई के गवर्नर व प्रधानमंत्री रह चुके हैं। मनमोहन सिंह पीएम बनने से पहले वित्त मंत्रालय में वित्त सचिव भी रह चुके हैं।

जेटली के पास कॉमर्स से ऑनर्स डिग्री
केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली के पास नई दिल्ली के श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स से ऑनर्स डिग्री है। वहीं मौजूदा वित्त मंत्री व रेल मंत्री पीयूष गोयल पेशे से चार्टेड अकाउंटेंट हैं।

सी.डी. देशमुख आईएमएफ की स्थापना में थी महत्त्वपूर्ण भूमिका


इनका पूरा नाम चिन्तामन द्वारकानाथ देशमुख था।
1950-57 तक देश के वित्त मंत्री रहे सीडी देशमुख अंतरराष्टीय मुद्रा कोष की स्थापना करने वाले पांच सदस्य प्रतिनिधिमंडल में शामिल हुए थे। इसी तरह वे इंटरनेशनल बैंक फॉर रिकांस्ट्रक्शन एण्ड डवलेपमेंट यानि आईबीआरडी की स्थापना भी हुई। इन दोनों संस्थानों के गवर्नर बोर्ड के सदस्य के रूप में देशमुख ने 10 वर्षों तक काम किया। उन्हें आईएमएफ के पहले एमडी बनने का ऑफर भी दिया गया था।
यह भी जानें
एक वित्त मंत्री के तौर पर मोरारजी देसाई ने सबसे ज्यादा 10 बार आम बजट पेश किया था। जिसमें से 8 बार पूर्ण बजट और 2 बार अंतरिम बजट शामिल थे। उनके बाद प्रणब मुखर्जी, पी. चिदंबरम, यशवंत सिन्हा, वाई.बी. चव्हाण और सी.डी. देशमुख का स्थान आता है। इन सभी ने सात-सात बार बजट पेश किया।

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