‘जय जवान जय किसान’ को दिल से मानने वाले नेता थे लाल बहादुर शास्त्री

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भारत के निर्माण में पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के योगदान को याद किया जाता रहा है। शास्त्री ने स्वतंत्रता संग्राम में योगदान तब शुरू किया, जब वे केवल 17 वर्ष के थे। वर्ष 1965 में भारत-पाकिस्तान युद्ध में उनके नेतृत्व में ही भारत ने पाक पर शानदार जीत दर्ज़ की थी। 2 अक्टूबर, 1904 को उत्तर प्रदेश के मुग़लसराय में जन्मे लाल बहादुर शास्त्री 9 जून, 1964 को भारत के दूसरे प्रधानमंत्री बने थे। 11 जनवरी, 1966 को शास्त्री की उज़्बेकिस्तान के ताशकंद में रहस्यमयी परिस्थितियों में मौत हो गई थी। ऐसे में लाल बहादुर शास्त्री की पुण्यतिथि के मौके पर जानते हैं उनके बारे में कई दिलचस्प बातें..

LalBahadurShastri

शास्त्री के बारे में वो बातें जो शायद आपको पता नहीं..

  • लाल बहादुर शास्त्री ने अपना उपनाम ‘वर्मा’ तब छोड़ा जब वह केवल 12 वर्ष के थे।
  • उनके शिक्षक निशकामेश्वर मिश्रा ने लालबहादुर शास्त्री को आर्थिक मदद करने के लिए अपने बच्चों को ट्यूशन करने की अनुमति दी थी।
  • वह अपने शिक्षक मिश्रा की देशभक्ति से गहरे प्रभावित थे। उनके शिक्षक मिश्रा के कारण ही लालबहादुर शास्त्री ने स्वतंत्रता संग्राम में गहरी रुचि ली और इसके इतिहास और स्वामी विवेकानंद, तिलक, गांधी और एनी बेसेंट जैसी प्रसिद्ध हस्तियों के कार्यों का अध्ययन करना शुरू किया।
  • उन्होंने गांधी और पंडित मदन मोहन मालवीय द्वारा आयोजित एक सार्वजनिक बैठक में भाग लिया। महात्मा गांधी द्वारा छात्रों को सरकारी स्कूलों से हटाने और असहयोग आंदोलन में शामिल होने के आह्वान से प्रेरित होकर शास्त्री अगले दिन अपने स्कूल से निकल आए।
  • ‘शास्त्री’ शीर्षक विद्यापीठ द्वारा उन्हें प्रदान की गई स्नातक की उपाधि थी, जिन्हें लाल बहादुर के नाम से भी नवाजा गया और अब लोग उन्हें लाल बहादुर शास्त्री के नाम से ही जानते हैं।
  • शास्त्री 17 साल की उम्र में जेल गए थे। बाद में उन्हें नाबालिग होने के नाते छोड़ दिया गया था।
  • पुलिस और परिवहन मंत्री के रूप में, वे पहले मंत्री थे जिन्होंने महिला कंडक्टर नियुक्त करने की पहल की।
  • ‘जय जवान जय किसान’ 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान उनके द्वारा गढ़ा गया प्रसिद्ध नारा है।
  • यह शास्त्री ही थे जिन्होंने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठियों के बजाय पानी के जेट का इस्तेमाल करने का सुझाव दिया था।
  • 1 जनवरी 1966, ताशकंद, उज़्बेकिस्तान लाल बहादुर शास्त्री देहांत हुआ था। उनकी मृत्यु के बाद उन्हें ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया गया था।

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