विशेष: टाटा समूह को ऊंचाइयों पर पहुंचाने वाले रतन टाटा की प्रेरणादायक है कहानी

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भारत के प्रसिद्ध उद्योगपति, निवेशक और टाटा संस के रिटायर्ड चेयरमैन रतन टाटा 28 दिसंबर को अपना 83वां जन्मदिन मना रहे हैं। उन्होंने वर्ष 1991 से लेकर वर्ष 2012 तक टाटा ग्रुप के अध्यक्ष पद पर रहते हुए सेवाएं दीं। वे वर्तमान में टाटा समूह के चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष पद हैं। टाटा संस के चेयरमैन रहते हुए उन्होंने कंपनी को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। उन्हें भारत सरकार ने वर्ष 2008 में देश के दूसरे सर्वोच्च सम्मान ‘पद्म विभूषण’ अवॉर्ड से सम्मानित किया। रतन टाटा अपनी व्यावसायिक कुशलता और परोपकार के लिए जाने जाते हैं। ऐसे में इस ख़ास मौके पर जानते हैं उनके जीवन के बारे में..

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रतन टाटा का जीवन परिचय

रतन टाटा का जन्म 28 दिसंबर, 1937 को गुजरात के सूरत में हुआ था। उनके पिता का नाम नवल टाटा था, जिन्हें नवाजबाई टाटा ने अपने पति रतनजी टाटा की मृत्यु के बाद गोद लिया था। उनकी माता का नाम सोनू था। जब रतन दस साल के थे, तक उनके माता-पिता के बीच तलाक हो गया। इसके बाद उनका पालन-पोषण उनकी दादी नवाजबाई टाटा द्वारा किया गया। उनके एक सौतेला भाई है, जिसका नाम नोएल टाटा है।

मुंबई में हुई रतन टाटा की प्रारंभिक शिक्षा

रतन टाटा की आरंभिक शिक्षा मुंबई के कैंपियन स्कूल में हुई और उन्होंने अपनी मैट्रिक की परीक्षा कैथेड्रल एंड जॉन कॉनन स्कूल से पूरी की। वर्ष 1955 में वे उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर गए और रिवरडेल कंट्री स्कूल से ग्रेजुएशन की। उन्होंने वर्ष 1959 में कॉर्नेल यूनिवर्सिटी से आर्किटेक्चर में डिग्री प्राप्त की। वर्ष 1975 में रतन टाटा ने हार्वर्ड बिजनेस स्कूल से एडवांस्ड मैनेजमेंट प्रोग्राम में डिग्री ली।

शुरुआत में टाटा स्टील के शॉप फ्लोर में काम किया

भारत आने से पहले रतन टाटा ने अमेरिका के लॉस एंजिल्स, कैलिफोर्निया में जोन्स और एमोंस में कुछ समय कार्य किया। उन्होंने वर्ष 1961 में टाटा ग्रुप से अपने कॅरियर की शुरुआत की। यहां शुरुआत में उन्होंने टाटा स्टील के शॉप फ्लोर में काम किया। बाद में वे टाटा ग्रुप की और कंपनियों के साथ जुड़ते गए। वर्ष 1971 में उन्हें नेशनल रेडियो और इलेक्ट्रॉनिक्स (नेल्को) में प्रभारी निदेशक नियुक्त किया गया। वर्ष 1981 में रतन को टाटा इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष बने। उन्होंने वर्ष 1991 में जेआरडी टाटा ने ग्रुप के अध्यक्ष पद से रिटायरमेंट ले लिया तो उनके उत्तराधिकारी के रूप में जिम्मेदारी रतन टाटा को सौंपी गई।

टाटा ग्रुप का अध्यक्ष बनने के बाद रतन टाटा ने इस ग्रुप को नई बुलंदियों पर पहुंचाया। उनके नेतृत्व में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज ने पब्लिक इशू जारी किया और टाटा मोटर्स को न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध किया गया। वर्ष 1998 में टाटा मोटर्स ने पहली पूर्णतः भारतीय यात्री कार ‘टाटा इंडिका’ को पेश किया। उसके बाद टाटा टी ने टेटली, टाटा मोटर्स ने ‘जैगुआर लैंड रोवर’ और टाटा स्टील ने ‘कोरस’ का अधिग्रहण किया, जिससे टाटा समूह की साख भारतीय उद्योग जगत में लगातार बढ़ती चली गई। यही नहीं रतन टाटा के नेतृत्व में दुनिया की सबसे सस्ती कार ‘टाटा नैनो’ बनाई गईं।

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21 वर्ष तक रहे टाटा समूह के अध्यक्ष पद पर

रतन टाटा 21 वर्ष तक अध्यक्ष पद पर रहने के बाद 28 दिसंबर, 2012 को टाटा समूह की सभी कार्यकारी जिम्मेदारी से सेवानिवृत्त हुए। उनका स्थान साइरस मिस्त्री ने लिया। उल्लेखनीय है कि टाटा ने भारत की ई-कॉमर्स कंपनी स्नैपडील में अपना व्यक्तिगत निवेश किया है। इसके साथ-साथ उन्होंने एक और ई-कॉमर्स कंपनी अर्बन लैडर और चाइनीज़ मोबाइल कंपनी जिओमी में भी निवेश किया है। इसके अलावा कई प्रोजेक्ट्स को भी फंडिंग की है।

रतन टाटा को मिले अवॉर्ड और सम्मान

भारतीय उद्योग जगत में रतन टाटा के योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें वर्ष 2000 में ‘पद्म भूषण’ और वर्ष 2008 में ‘पद्म विभूषण’ अवॉर्ड से सम्मानित किया। उन्हें अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कई संगठनों ने पुरस्कृत किया और कई विश्वविद्यालयों ने टाटा को अपनी मानद डिग्रियों से सम्मानित किया है। वर्ष 2015 में एचईसी, पेरिस ने उन्हें मानद डिग्री से नवाज़ा। रतन टाटा को वर्ष 2014 में ब्रिटिश सरकार ने मानद ‘नाइट ग्रैंड क्रॉस’ से सम्मानित किया। वर्ष 2013 में एम्स्टर्डम विश्वविद्यालय ने उन्हें डॉक्टरेट की मानद उपाधि से सम्मानित किया।

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