स्पेशल: शादी पर समाज की नाराज़गी से लेकर सांसद बनने तक की ऐसी है प्रिंसेज दीया कुमारी की कहानी

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जयपुर राजघराने की राजकुमारी एवं बीजेपी सांसद दीया कुमारी 30 जनवरी को अपना 49वां जन्मदिन मना रही हैं। दीया जयपुर के अंतिम महाराजा सवाई भवानी सिंह और उनकी पत्नी पद्मिनी देवी की एकमात्र संतान है। ​प्रिंसेज दीया की लव स्टोरी काफ़ी मशहूर है। दीया ने वर्ष 1997 में अपने ही गोत्र के नरेंद्र सिंह से लव मैरिज की थी।

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गोत्र एक होने के कारण इन दोनों को शादी में समाज का विरोध समेत कई दिक्कतों का सामना करना पड़ा था। हालांकि, 21 साल बाद दीया ने अपने पति नरेंद्र सिंह से साल 2018 में तलाक ले लिया था। ऐसे में प्रिंसेज दीया कुमारी के जन्मदिन के मौके पर जानते हैं उनकी ज़िंदगी के अब तक के दिलचस्प सफ़र के बारे में ख़ास बातें..

Diya-Kumari-Family

समाज की नाराजगी के बावजूद की थी लव मैरिज

दीया कुमारी जयपुर की महारानी पद्मिनी देवी की इकलौती बेटी हैं। दीया कुमारी का विवादों से पुराना नाता रहा है। साल 1997 की बात है जब दीया कुमारी ने शादी करने का फैसला लिया। शादी को लेकर विवाद इसलिए हुआ क्योंकि दीया कुमारी जिस नरेंद्र सिंह से लव मैरिज करना चाहती थी वो उनके ही गोत्र के थे।

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दीया और नरेंद्र सिंह की शादी को लेकर राजपूत समाज में उस दौरान काफी नाराजगी थी। शादी का विरोध इस हद तक बढ़ा कि महाराजा भवानी सिंह को उस समय राजपूत सभा के अध्यक्ष पद से हटना पड़ा था। राजपूतों के भी राजपरिवार से रिश्ते काफी तल्ख हो गए थे। महाराजा भवानी सिंह को आजीवन कोई संतान सुख नहीं मिला इसलिए उन्होंने साल 2002 में बेटी दीया कुमारी के बेटे पद्मनाभ सिंह को गोद ले लिया और वर्ष 2011 में अपने वारिस के तौर पर पद्मनाभ का राजतिलक कर दिया।

प्रिंसेज दीया ने लंदन से की थी कॉलेज की पढ़ाई

दीया कुमारी ने अपनी शुरुआती स्कूली पढ़ाई मॉडर्न स्कूल, नई दिल्ली से की। बाद में उन्होंने महारानी गायत्री देवी गर्ल्स पब्लिक स्कूल, जयपुर में एडमिशन लिया। इसके बाद वो कॉलेज की पढ़ाई करने के लिए लंदन चली गई थी। दीया और नरेंद्र सिंह की कुल तीन संतानें हैं, जिसमें दो बेटे पद्मनाभ सिंह, लक्ष्यराज सिंह और एक बेटी गौरवी है। इन दोनों के बड़े बेटे पद्मनाभ सिंह को 12 साल की उम्र में जयपुर का सांकेतिक रूप से राजा बनाया गया था। वहीं, छोटे बेटे लक्ष्यराज सिंह ने 9 साल की उम्र में यह जिम्मेदारी संभाली। पद्मनाभ अंतर्राष्ट्रीय स्तर के पोलो खिलाड़ी है।

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पहली बार में विधायक और फिर सांसद का जीता चुनाव

राजघराने में गायत्री देवी के समय से ही राजनीति में शामिल होने की परंपरा रही है। दीया कुमारी ने साल 2013 में जयपुर में भारतीय जनता पार्टी यानि बीजेपी ज्वाइन की। पार्टी में शामिल होने के बाद दीया कुमारी को सवाई माधोपुर विधानसभा सीट से बीजेपी ने चुनाव लड़ाया और पहली बार में ही शानदार जीत दर्ज की।

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वर्ष 2018 के राजस्थान विधानसभा चुनाव में दीया ने निजी कारणों से चुनाव लड़ने से इंकार कर दिया था। बाद में साल 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने उन्हें राजसमंद सीट से टिकट दिया। दीया कुमारी ने पहली बार में ही सांसद का चुनाव रिकॉर्ड मतों से जीता। पिछले कुछ वर्षों से दीया राजनीति के जरिए समाज सेवा कर रही है।

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