पुण्यतिथि: भारत की पहली महिला डॉक्टर होने का गौरव प्राप्त है कादम्बिनी गांगुली को

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Kadambini-Ganguly-Biography

भारत की पहली महिला स्नातक और पहली महिला चिकित्सक कादम्बिनी गांगुली की आज 3 अक्टूबर को 97वीं डेथ एनिवर्सरी है। उन्हें भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में सबसे पहले भाषण देने वाली महिला का गौरव भी प्राप्त है। कादम्बिनी दक्षिण एशिया की ऐसी पहली महिला थीं, जिन्होंने यूरोपियन मेडिसिन में प्रशिक्षण लिया था। कादम्बिनी गांगुली का जन्म 18 जुलाई, 1861 को बिहार के भागलपुर में हुआ था। उनके पिता का नाम बृजकिशोर बासु था। वह एक उदार विचारों के व्यक्ति थे। उन्होंने अपनी बेटी की शिक्षा पर पूरा ध्यान दिया। यही वजह रही कि उनकी बेटी कादम्बिनी ने कई क्षेत्रों में पहली भारतीय महिला होने का गौरव प्राप्त किया।

देश की पहली महिला फिजीशियन बनीं कादम्बिनी

कादम्बिनी गांगुली ने वर्ष 1882 में ‘कोलकाता विश्वविद्यालय’ से बी.ए. की परीक्षा उत्तीर्ण की थी। यहीं से उन्होंने वर्ष 1886 में चिकित्सा शास्त्र की डिग्री हासिल की और देश की पहली महिला चिकित्सक बन गईं। इसके बाद कादम्बिनी आगे की पढ़ाई के लिए विदेश चली गई और ग्लासगो और एडिनबर्ग विश्वविद्यालय से चिकित्सा की उच्च डिग्रियां हासिल कीं और फिर वापस स्वदेश लौट आई। कादम्बिनी के रूप में 19वीं सदी में ही भारत को पहली महिला डॉक्टर मिल गई थी। कोयला खदानों में काम करने वाली महिलाओं की लचर स्थिति देखकर उन्‍हें काफी धक्‍का लगा। उन्‍होंने इन महिलाओं के विकास के लिए बहुत काम किया।

कादम्बिनी गांगुली का विवाह ब्रह्म समाज के नेता द्वारकानाथ गंगोपाध्याय से हुआ था। ब्रह्म समाज का उद्देश्य था भारत में सामाजिक कुरीतियों को दूर करना और महिलाओं का उत्थान प्रमुख कार्यों में था। द्वारकानाथ भी महिलाओं की स्थिति में सुधार के लिए लिए प्रयासरत थे। उन्हें इस क्षेत्र में कादम्बिनी का बहुत सहयोग मिला। उन्होंने बालिकाओं के विद्यालय में गृह उद्योग स्थापित करने के कार्य को बढ़ावा दिया। कादम्बिनी में देशभक्ति की भावना का संचार बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय की रचनाओं से हुआ।

कांग्रेस के इतिहास में भाषण देने वाली पहली महिला

कादम्बिनी गांगुली ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के वर्ष 1889 के मद्रास अधिवेशन में भाग लिया और कांग्रेस के इतिहास में वह भाषण देने वाली पहली महिला बनीं। वर्ष 1906 के कोलकाता कांग्रेस अधिवेशन के अवसर पर आयोजित महिला सम्मेलन की अध्यक्षता भी कादम्बिनी ने ही की थी। उस समय के विख्यात अमेरिकी इतिहासकार डेविड ने लिखा है कि ‘कादम्बिनी अपने समय की सबसे निपुण और मुक्त ख्याल वाली औरत थीं। उनके हिसाब से रिश्ते आपसी प्रेम, संवेदनशीलता और समझ-बूझ पर बनते है जो कि उस वक्त के लिए सबसे असामान्य बात थी।’

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कादम्बिनी गांगुली का निधन

भारत की विद्वान महिला कादम्बिनी गांगुली का निधन 63 वर्ष की उम्र में 3 अक्‍टूबर, 1923 को पश्चिम बंगाल के कोलकाता में हो गया था।

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