कारगिल दिवस : शहीदों की चिताओं पर लगेगें हर बरस मेले, वतन पर मरनेवालों का यही बाक़ी निशाँ होगा

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आज पूरा देश कारगिल विजय दिवस मना रहा है। 20 साल पहले आज ही के दिन भारत के वीर जवानों ने कारगिल की चोटियों से 5000 पाकिस्तानी घुसपैठियों को खदेड़कर तिरंगा लहराया था।

पाकिस्तान के 5,000 सैनिकों ने घुसपैठ करके जब कारगिल की पहाड़ियों पर कब्जा कर लिया था, उसी के साथ 3 मई 1999 को कारगिल युद्ध की शुरूआत हो गई थी। जवाबी कार्यवाही में भारत सरकार ने ‘ऑपरेशन विजय’ शुरू किया।

पाक सेना और कश्मीरी उग्रवादियों ने कई बार नियंत्रण रेखा पार की और भारतीय जमीन को हथियाने की पुरजोर कोशिशें की लेकिन हर कोशिश नाकाम रही। भारत की तरफ से करीब 30 हजार सैनिक थे जो करीब पांच हजार घुसपैठियों को खदेड़ रहे थे।

आइए कुछ बातों से जानते हैं ऑपरेशन विजय के वीरता की कहानी

ताशी नामग्याल नामक एक स्थानीय चरवाहा जो कारगिल के बाल्टिक सेक्टर में अपने नए याक की तलाश में था कि उसने देखा कि सीमा पार से कुछ पाकिस्तानी घुसपैठ करने की फिराक में थे। भारतीय सेना को कारगिल में घुसपैठ की पहली जानकारी इसी चरवाहे ने दी थी।

भारतीय सेना ने मिली जानकारी के मुताबिक जब 3 मई को पहली बार गश्त की तब द्रास, काकसार और मुश्कोह सेक्टर में कुछ पाकिस्तानी घुसपैठियों को देखा गया। इसके बाद भारतीय सेना ने 9 जून को बाल्टिक क्षेत्र की 2 चौकी, फिर 13 जून को द्रास सेक्टर में तोलोलिंग तो इसके बाद 29 जून को अन्य महत्वपूर्ण चौकियों पर कब्जा जमाया।

कारगिल युद्ध के दौरान आर्टिलरी तोप का इस्तेमाल किया गया जिससे 2,50,000 गोले और रॉकेट दागे गए। वहीं 300 से अधिक तोपों, मोर्टार और रॉकेट लॉन्चरों से सेना ने हर दिन 5,000 बम फेंके।

आखिरकार 26 जुलाई 1999 को भारतीय सेना ने ‘ऑपरेशन विजय’ को सफलतापूर्वक अंजाम दिया और कारगिल को घुसपैठियों के चंगुल से आजाद करवाया।

कारगिल युद्ध में भारतीय वायुसेना का भी अहम रोल रहा। वायुसेना के मिराज के लिए 12 दिनों के अंदर लेजर गाइडेड बम तकनीक तैयार की गई। इसके अलावा वायुसेना ने मिग-27 और मिग-29 विमानों का भी इस्तेमाल किया।

कारगिल की पहाड़ियों में चले इस युद्ध में करीब 2 लाख भारतीय सैनिक शामिल हुए जिसमें से करीब 527 सैनिकों को शहादत मिली।

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