सीके नायडू: भारत का वो क्रिकेटर जिसका सिक्स दूसरे शहर में जाकर गिरा था

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14 नवंबर को भारतीय क्रिकेट टीम के प्रथम कप्तान कर्नल सीके नायडू की 52वीं पुण्यतिथि हैं। उनका निधन 14 नवंबर, 1967 को मध्य प्रदेश के इंदौर में हुआ था। सीके नायडू की बचपन से ही खेलों में जबरदस्त दिलचस्पी रहीं। क्रिकेट के साथ ही वे कई अन्य खेलों के भी अच्छे खिलाड़ी थे। उनका पूरा नाम कोट्टारी कनकैया नायडू है। कर्नल सीके नायडू का जन्म 31 अक्टूबर, 1895 को नागपुर में हुआ। नायडू ने वर्ष 1915 में क्रिकेट खेलना शुरू कर दिया था जो अगले 5-6 दशक तक तक जारी रहा।

वर्ष 1933 में उन्हें प्रसिद्ध पत्रिका ‘विजडन’ ने वर्ष के टॉप पांच खिलाड़ियों की सूची में शामिल किया था। वे विजडन में स्थान पाने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बने थे। कर्नल नायडू इंग्लैंड में एक सीजन में 32 छक्के लगाने वाले एकमात्र और ख़ासकर विदेशी किक्रेटर हैं। ऐसे में इस लीजेंड भारतीय क्रिकेटर की पुण्यतिथि के अवसर पर जानते हैं उनके बारे में कुछ दिलचस्प बातें..

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महाराजा होल्कर ने बुलाया था इंदौर

6 फीट से ज्यादा लंबे सीके नायडू को मजबूत कद-काठी और जबरदस्त फिटनेस के लिए जाना जाता था। इसका सबसे बड़ा उदाहण यह है कि उन्होंने 68 वर्ष की उम्र तक खेला। नायडू दाएं हाथ के विस्फोटक बल्लेबाज और ऑफ स्पिनर थे। जोरदार स्ट्रोक और तेज हिट के दम पर वे विरोधी टीमों का दवाब कम कर देते थे। उनकी मजबूत शारीरिक बनावट से प्रभावित होकर महाराजा तुकोजी राव होल्कर ने साल 1924 में उन्हें इंदौर बुलाया था। महाराजा होल्कर ने उन्हें अपनी सेना में कैप्टन बनाया, यहीं से वे कर्नल सीके नायडू बन गए। वर्ष 1926-27 में उन्होंने मुंबई में हिंदू टीम की ओर से खेलते हुए इंग्लैंड के ख़िलाफ़ 100 मिनट में 187 गेंदों का सामना करते हुए 153 रन जड़ दिए थे। जिसमें 11 लंबे-लंबे सिक्स और 13 चौके शामिल थे। इस पारी ने उन्हें पहचान दिला दी थी।

लंबे-लंबे छक्के मारने में मास्टर थे नायडू

उस दौर में जब मैदानों की 95 यार्ड्स की बाउंड्री होती थीं, वे उसके भी 15 फीट बाहर छक्के मारते थे। नायडू के छक्कों का कोई मुकाबला नहीं था। जबकि उस जमाने में अच्छे बैट नहीं होते थे। उन्होंने एक बार बॉम्बे यूनिवर्सिटी के मैदान पर खेलते हुए इतना लंबा सिक्स मारा कि गेंद मैदान को पार करती हुई राजाबाई क्लॉक टावर पर लगी घड़ी पर जा लगी और वो टूट गई थी। एक बार जब सीके नायडू इंग्लैंड गए थे, उन्होंने वहां खेलते हुए इतना लंबा​ सिक्स जड़ा कि गेंद दूसरे शहर में जाकर गिरी। वो मैच इंग्लैंड की दो काउंटी वॉरविकशायर और वॉस्टरशायर के बॉर्डर पर स्थित एक मैदान में खेला गया। इन दोनों शहरों के बीच एक नदी बहती थी। सीके नायडू ने उस मैच में ऐसा छक्का मारा कि वो नदी पार कर गया था। इस तरह उनके बैट से निकला सिक्स नदी पार करते हुए दूसरे शहर में जाकर गिरा था।

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37 साल की उम्र में बने भारत के पहले कप्तान

आज के दौर में जिस उम्र में क्रिकेटर रिटायर हो जाते हैं, उस उम्र में कर्नल सीके नायडू भारतीय क्रिकेट टीम के पहले कप्तान बने थे। उस वक़्त उनकी उम्र 37 वर्ष थी। यह ऐसा दौर था जब अधिकांश राजा-महाराजा ही क्रिकेट खेला करते थे और कप्तानी भी उनके हाथों में होती थी। साल 1932 में भारत टेस्ट दर्जा हासिल करने वाला छठा देश बना था। इसी साल टीम इंडिया को पहली बार टेस्ट खेलने के लिए इंग्लैंड दौरे पर जाना था। उस वक़्त टीम के कप्तान पोरबंदर के महाराजा हुआ करते थे। इंग्लैंड दौरे पर जाने से पहले अचानक वे बीमार हो गए और कर्नल सीके नायडू को देश का पहला कप्तान बनने का गौरव प्राप्त हुआ।

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ऐसा रहा कर्नल सीके नायडू का क्रिकेट कॅरियर

टीम इंडिया के पहले कप्तान कर्नल सीके नायडू ने अपने अंतर्राष्ट्रीय कॅरियर में बहुत कम मात्र 7 टेस्ट मैच खेले थे। उन्होंने भारत के लिए खेले इन मैच की 14 पारियों में कुल 350 रन बनाए, जिसमें उनके 2 अर्धशतक भी शामिल हैं। नायडू की गेंदबाजी की बात करें तो उन्होंने टेस्ट में 9 विकेट अपने नाम किए। कर्नल नायडू ने भारत के लिए अपने डेब्यू मैच सन् 1932 से लेकर साल 1936 तक क्रिकेट खेला था।

सीके नायडू ने होल्कर टीम के अलावा आंध्र प्रदेश और उत्तर प्रदेश का रणजी क्रिकेट में प्र​तिनिधित्व किया। क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद नायडू भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के उपाध्यक्ष तथा चयन समिति के अध्यक्ष भी रहे थे। क्रिकेट में उनके अतुलनीय योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने कर्नल सीके नायडू को साल 1955 में तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘पद्मभूषण’ से सम्मानित किया। नायडू भारत के पहले ऐसे क्रिकेटर थे जिन्हें सरकार से इस सम्मान से नवाज़ा था।

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