बी के एस अयंगर: योग गुरु जिसने दुनिया को सिखाया योग से स्वस्थ रहने का पाठ

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B. K. S. Iyengar

योग के जरिए पूरी दुनिया को सेहत का पाठ पढ़ाने वाले बेल्लूर कृष्णमाचार सुंदरराजा अयंगर की 14 दिसंबर को 101 वीं बर्थ एनिवर्सरी हैं। वह प्रसिद्ध योग गुरु थे जिन्हें ‘आधुनिक योग का जनक’ माना जाता है। उन्होंने ‘अयंगर योग’ की स्थापना की। उन्होंने पहले भारत में और फिर पूरी दुनिया में योग को लोकप्रिय बनाया। बी के एस अयंगर को उनके योगदान के लिए भारत सरकार ने वर्ष 1991 में ‘पद्मश्री’, वर्ष 2002 में ‘पद्मभूषण’ और वर्ष 2014 में ‘पद्मविभूषण’ से सम्मानित किया था। उन्हें ‘टाइम’ पत्रिका ने वर्ष 2004 में दुनिया के सबसे प्रभावशाली 100 लोगों की सूची में शामिल किया था।

जीवन परिचय

बी के एस अयंगर का जन्म 14 दिसंबर, 1918 को कर्नाटक के कोलार जिले के बेलूर में एक वैष्णव परिवार में हुआ था। वह अपने माता—पिता की 13 संतानों में 11वें नंबर के थे। उनके पिता श्रीकृष्णमचार और माता शेषम्मा थे। उनके पिता स्कूल शिक्षक थे। वहां पर इंफ्लुएंजा महामारी फैली थी जिसका शिकार वह भी हो गए। वह बचपन से लेकर किशोरावस्था तक बहुत कमजोर थे।

अयंगर जब मैट्रिक की परीक्षा में अंग्रेजी विषय में फेल हो गए तो उन्होंने पढ़ाई छोड़ दी। वर्ष 1934 में जब अयंगर 15 साल के थे तो उन्हें उनके बहनोई और योग गुरु तिरुमलाई कृष्णमाचार्य ने सेहत में सुधार के लिए मैसूर बुला लिया। उन्होंने यहां पर योग और आसनों का अभ्यास किया जिससे उन्हें स्वास्थ्य लाभ हुआ। इसके बाद उन्होंने योग को ही अपना कर्म बना लिया।

जब वह योग में पूर्णरूप से निपुण हो गए तो वर्ष 1937 में कृष्णमाचार्य ने उन्हें योग की शिक्षा के प्रचार—प्रसार के लिए 18 वर्ष की आयु में पुणे भेज दिया। उन्हें शुरु में आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ा था।

दुनिया के कई प्रसिद्ध कलाकार अयंगर से जुड़े

अयंगर अपने योग की शिक्षा से धीरे-धीरे कई प्रसिद्ध हस्तियां जुड़ गई। जिनमें जिद्दु कृष्णमूर्ति, येहुदी मेनुहिन, जयप्रकाश नारायण, बेल्जियम की रानी एलिजाबेथ, एल्डास हक्सले, सचिन तेंदुलकर, करीना कपूर, ईशा शेरवानी और जहीर खान जैसी चर्चित व्यक्ति प्रमुख थे।

उनकी पहली विदेश यात्रा वर्ष 1956 में संयुक्त राज्य अमेरिका से शुरू हुई। अपनी पहली यात्रा की उनकी दोस्ती वायलिन वादक येहुदी मेनुहिन से हुई। जब पहली बार अयंगर येहुदी के पास गए, तो उन्हें बताया गया कि येहुदी वास्तव में थके हुए हैं और वह केवल पाँच मिनट तक योग कर सकते हैं। अयंगर ने येहुदी को एक आरामदायक आसन करने के लिए कहा, जिसको करते ही येहुदी एक घंटे के लिए सो गए थे। योग का अभ्यास करने से उनके वायलिन प्रदर्शन में सुधार हुआ है। येहुदी ने अयंगर को स्विट्जरलैंड आने के लिए आमंत्रित किया। बाद में अयंगर ने कई यूरोपीय देशों का दौरा किया और वहां पर अपने संस्थान खोले। इनमें अयंगर योग सिखाया जाता है।

योग पर लिखी कई पुस्तकें

बी के एस अयंगर ने योग पर कई पुस्तकें लिखी। हालांकि उनकी अंग्रेजी बहुत कमजोर थी लेकिन बाद में इस भाषा में उन्होंने ‘लाइट ऑन योगा’ नामक पहली पुस्तक लिखी जो वर्ष 1966 में प्रकाशित हुई। यह पुस्तक अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सबसे अधिक बिकने वाली पुस्तक बनी। वर्ष 2005 तक इस पुस्तक का 17 भाषाओं में अनुवाद किया गया। उनकी दूसरी पुस्तक ‘लाइट ऑन प्राणायाम’ काफी मशहूर हुई। उनकी प्राणायाम और दर्शन के पहलुओं पर आधारित यह किताब व्यापक रूप से पढ़ी गई थी और इसकी सफलता ने अयंगर को 14 शीर्षक प्रदान किए थे। उनकी 14वीं किताब ‘लाइट ऑन लाइफ’ थी।

ऑक्सफोर्ड इंग्लिश डिक्शनरी में बाकायदा योग के एक प्रकार के रूप में ‘अयंगर योगा’ का नाम दर्ज है।

अवॉर्ड

अयंगर द्वारा योग को पूरी दुनिया में तक पहुंचाने में उल्लेखनीय योगदान दिया था। उन्हें भारत सरकार द्वारा वर्ष 1991 में पद्मश्री, वर्ष 2002 में पद्मभूषण और वर्ष 2014 में पद्मविभूषण अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। उन्हें वर्ष 2004 में टाइम पत्रिका ने दुनिया के 100 सबसे ज्यादा प्रभावशाली व्यक्तियों की सूची में शामिल किया।

निजी जीवन

बी के एस अयंगर ने वर्ष 1943 में रामामणि से शादी की। उनके पांच बेटियां और एक बेटा है। उनकी पत्नी का निधन 46 वर्ष की आयु में हो गया था। बाद में अयंगर ने उनके नाम पर पुणे के योग स्कूल का नाम रखा।

निधन

दुनिया को योग के माध्यम से स्वस्थ रहने की सीख देने वाले बी के एस अयंगर का निधन 20 अगस्त, 2014 को पुणे में हो गया।

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