उस वक़्त सुपरस्टार का दर्जा होता तो राजेंद्र कुमार होते इसके पहले हक़दार

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1947 में हुए देश के बंटवारे में लाखों लोग इधर-उधर हुए। इस अदला-बदली के कई कलाकार भी शिकार बने। ये कलाकार अपना सब कुछ एक तरफ छोड़कर दूसरे मुल्क में पनाह लेने आए थे। उसी में से एक थे बॉलीवुड के जुबली कुमार यानी एक्टर राजेंद्र कुमार। राजेंद्र ने स्टारडम की जो ऊंचाइयां छूईं वो आज तक कोई नहीं छू पाया। एक वक़्त ऐसा भी था जब उनकी अमूमन हर फिल्म सिल्वर जुबली होती थी। इसलिए लोग उन्हें प्यार से ‘जुबली कुमार’ बुलाने लगे थे। यह वह दौर था, जब भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में कोई सुपरस्टार नहीं हुआ करते थे। वैसे अगर उस वक़्त सुपरस्टार का दर्जा होता, तो राजेंद्र इसके पहले हक़दार थे। आज 20 जुलाई को उनका 90वां जन्मदिन है। इस अवसर पर आइए जानते हैं उनके बारे में कुछ दिलचस्प बातें..

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सियालकोट का अमीर परिवार भारत आकर हो गया था रिफ्यूजी

राजेंद्र कुमार का जन्म 20 जुलाई, 1929 को ब्रिटेन द्वारा जबरन गुलाम बनाए गए भारत के उत्तरी राज्य पंजाब के सियालकोट शहर (अब पाकिस्तान) में हुआ था। राजेंद्र के दादाजी मिलिट्री कॉन्ट्रैक्टर हुआ करते थे और उनके पिताजी कराची और सिंध में कपड़े का व्यापार करते थे। मतलब राजेंद्र एक अमीर परिवार से आते थे। लेकिन धर्म के नाम पर हुए मुल्क के बंटवारे ने उनके परिवार को आरामगाह छीनकर एक रिफ्यूजी में तब्दील कर दिया था। राजेंद्र कुमार के परिवार को अपना सब कुछ छोड़कर दिल्ली आना पड़ा। देश के बंटवारे ने इस खाते-पीते परिवार को एक ही रात में गरीब बनाया दिया। उनके परिवार का सारा काम-धंधा पाकिस्तान में रह गया था। अब पैसे की ज़रूरत थी और कमाने का कोई ज़रिया चाहिए था।

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फिल्म डायरेक्टर बनने के लिए घड़ी बेचकर पहुंचे थे बॉम्बे

दिल्ली आकर राजेंद्र कुमार ने सोचा जब कुछ करना ही है, तो कुछ ढंग का करते हैं। उन्होंने फिल्मों की राह पकड़ने की सोची लेकिन बतौर हीरो नहीं, एक डायरेक्टर के रूप में। लेकिन उस समय उनके पास पैसों की इतनी किल्लत थी कि ट्रेन का किराया तक जेब नहीं था। राजेंद्र कुमार ने अपने मन का काम करने के लिए अपनी कलाई से घड़ी उतारी और 65 रूपये में बेच दी। उन्होंने अपने सपनों को पूरा करने के लिए ट्रेन पकड़ी और पहुंच गए सपनों की नगरी बॉम्बे (मुंबई)। राजेंद्र मुंबई पहुंचे और किसी तरह काम पाकर मशहूर डायरेक्टर एच.एस रवैल को असिस्ट करने लगे। इस तरह उनका सिनेमाई सफ़र शुरु हुआ था।

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फिल्म ‘जोगन’ से शुरु हुआ एक्टिंग कॅरियर

राजेंद्र कुमार जब बॉलीवुड में असिस्टेंट डायरेक्टर के रूप में काम कर रहे थे, उस दौरान प्रोड्यूसर देवेन्द्र गोयल की नज़र उनपर पड़ी और उन्होंने राजेंद्र को अपनी फिल्म ‘जोगन’ में दिलीप कुमार और नर्गिस के साथ साइन कर लिया। यह वर्ष 1955 की बात है। इस फिल्म के लिए राजेंद्र को मात्र 1500 रूपए मिले थे। लेकिन उनकी यह पहली फिल्म बॉक्स ऑफिस पर हिट साबित हुई और राजेन्द्र की एक्टिंग को खूब सराहा गया। जल्द ही राजेंद्र कुमार एक स्टार की तरह उभरकर सामने आए। इसके बाद राजेंद्र ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और अपने चार दशक लंबे करियर में ढेरों सुपरहिट फ़िल्में दीं।

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60 के दशक में तो एक ऐसा वक़्त भी आया, जब राजेंद्र कुमार की 6-7 फ़िल्में एक ही समय पर सिनेमाघरों में सिल्वर जुबली (लगातार 25 हफ्ते तक सिनेमाघरों में चलना) सेलिब्रेट कर रही थीं। उनकी फिल्म ‘साजन बिना सुहागन, बिन फेरे हम तेरे, गंवार, गूंज उठी शहनाई, कानून, धूल का फूल, दिल एक मंदिर, मेरे महबूब’ जैसी उन्होंने कई हिट फिल्म दीं। राजेंद्र ने बतौर प्रोड्यूसर कई फ़िल्में भी बनाईं। उन्होंने अपने बेटे कुमार गौरव को अपने बैनर से ही बॉलीवुड में लॉन्च किया। यह फिल्म थी ‘लव स्टोरी’। वर्ष 1981 में आई यह फिल्म ब्लॉकबस्टर रही और गौरव रातों-रात बॉलीवुड स्टार बन गए। लेकिन आगे उनका करियर कुछ खास नहीं रहा।

जिस भूतिया घर में रहे उसे खरीदना चाहते थे राजेश खन्ना

समृद्ध परिवार में जन्में एक्टर राजेंद्र कुमार का सियालकोट में महलनुमा मकान था, लेकिन बंटवारे के कारण भारत आने के बाद उनके पास रहने के लिए घर नहीं था। जब वह फिल्मों में काम करने के लिए मुंबई में रहने लगे, उस दौरान उन्हें कार्टर रोड पर एक खाली बंगले के बारे में पता चला। वह तुरंत उस बंगले को खरीदने की जुगत में लग गए। उस घर को लोग भुतिया मानते थे। लोगों का कहना था कि इस घर में भूतों का निवास है। राजेंद्र के पास पैसे कमी थी, लेकिन वह उस भूतिया बंगले को खरीदने की ज़िद पर अड़े हुए थे। इसमें उनकी मदद फिल्म ​डायरेक्टर और प्रोड्यूसर बी.आर चोपड़ा ने की। चोपड़ा ने राजेंद्र को तीन फिल्मों की फीस एडवांस में दे दी, जिसमें एक बड़ी हिट ‘कानून’ फिल्म भी थी।

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इस भूतिया घर में शिफ्ट होने के बाद राजेंद्र कुमार की मानो किस्मत ही बदल गई। उनकी फिल्में लगातार हिट होती रहीं और लंबे समय तक सिनेमाघरों में चलती रहती थी। लेकिन एक वक़्त ऐसा भी आया, जब राजेंद्र की फ़िल्में चलना कम हो गई थीं। इसकी वजह थी फिल्म इंडस्ट्री में आए एक नए चेहरे, उनका नाम था राजेश खन्ना। जी हां, राजेश खन्ना की फ़िल्में उस दौर में काफी पसंद की जाने लगी थीं। राजेश खन्ना के सुपरस्टार बनने में अभी कुछ वक़्त था। फिर भी राजेश ने राजेंद्र कुमार के बंगले को खरीदने की इच्छा जता दी और यह सबको हैरान करने वाला था। कई वर्षों बाद पता चला कि राजेश खन्ना स्टारडम के लालच में वो बंगला खरीदना चाहते थे। उन्हें लगता था कि जिस घर ने राजेंद्र कुमार को अपार सफलता दिलाई थी, उस घर में जाने के बाद वो भी बड़े स्टार बन जाएंगे।

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फिल्म ‘गूंज उठी शहनाई’ में राजेंद्र ने शहनाई वादक बिस्मिल्ला ख़ां का किरदार पूरी तरह डूबकर निभाया था। इसके लिए उनकी खुद बिस्मिल्ला ख़ां ने जमकर तारीफ की थी। राजेंद्र कुमार को वर्ष 1969 में भारत के सर्वोच्च सम्मानों में से एक ‘पद्म श्री’ अवॉर्ड से नवाज़ा गया। उन्होंने 12 जुलाई, 1999 को मुंबई में आखिरी सांस ली।

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