सेहत

‘हिमालयी वियाग्रा’ में आखिर ऐसा क्या है जो लोग अपनी जान पर खेलकर इसे लेने जा रहे हैं

यार्सागुम्बा नामक जड़ी-बूटी जो सामान्यत: ‘हिमालयी वियाग्रा’ के नाम से भी जानी जाती है। यह कोई साधारण जड़ी-बूटी नहीं है, बल्कि एक कामोत्तेजक गुणों के साथ अन्य बीमारियों के इलाज में भी उपयोगी है। यह दुर्लभ जड़ी-बूटी जिसे कीड़ा जड़ी भी कहते हैं, नेपाल और तिब्बत हिमालय पर दस हजार फीट से अधिक ऊंचे पहाड़ों पर पाई जाती है। पिछले कुछ समय से औषधि चर्चा का विषय है लेकिन अपने गुणों के कारण नहीं बल्कि इसकी चाहत में मरने वाले लोगों के कारण। जी हां, इस औषधि को पाने के चक्कर में लोग अपनी जान गंवा रहा हैं। हाल इसे लेने गए आठ लोगों की नेपाल के डोल्पा जिले में मौत हो गई।

गर्मियों में लेने आते हैं यह औषधि

रिपोर्ट्स के अनुसार, हर वर्ष गर्मियों के दिनों में इस बहुमूल्य औषधि को एकत्रित करने लोग आते हैं। इस बार यहां आए आठ लोगों की मौत हो गई, इनमें से पांच की मौत ऊंचाई के हिसाब से शरीर के न ढलने के कारण हुई, जबकि दो लोग खड़ी चट्टान से बूटी को इकट्ठा करते वक्त नीचे गिर गए। इनमें सबसे दर्दनाक मौत एक बच्चे की हुई, जो अपनी मां के साथ इस बूटी को इकट्ठा करने गया था। बच्चे का शरीर पहाड़ की ऊंचाई के हिसाब से ढल नहीं पाया और बीमारी से उसकी मौत हो गई।

महंगी है यह कीड़ा जड़ी

बता दें कि यार्सागुम्बा औषधि की पूरे एशिया और अमेरिका सहित अन्य देशों में मांग है। इसकी कीमत 100 अमरीकी डॉलर (करीब 7 हजार रुपये) प्रति ग्राम से भी अधिक है।

स्थानीय अधिकारियों ने यार्सागुम्बा को इकट्ठा करने वाले लोगों की सुविधा के लिए विभिन्न स्थानों पर स्वास्थ्य शिविर लगाए हैं। अधिकारियों ने कहा कि इन स्वास्थ्य शिविरों में इस काम में लगे एक दर्जन से अधिक लोग इलाज करवा रहे हैं।

क्या है यार्सागुम्बा या कीड़ा-जड़ी

यह एक जंगली मशरूम है जो कैटरपिलर्स को मारकर उस पर उग आती है। इस जड़ी का वैज्ञानिक नाम कॉर्डिसेप्स साइनेसिस है और जिस कीड़े के कैटरपिलर्स पर ये उगता है उसका नाम हैपिलस फैब्रिकस है।

वहीं स्थानीय लोग इसे कीड़ा-जड़ी कहते हैं क्योंकि ये आधा कीड़ा है और आधा जड़ी है और चीन-तिब्बत में इसे यार्सागुम्बा कहा जाता है।

यह जड़ी 3500 मीटर की ऊंचाई वाले पहाड़ी इलाकों में पाई जाती है जहां पर पेड़ उगने बंद हो जाते हैं। जब मई से जुलाई के महीनों में बर्फ पिघलती है तो इन परिस्थितियों में कैटरपिलर्स पर कवक का संक्रमण होता है जिसके बाद आर्सागुम्बा बनता है। उसकी 57 प्रजातियां हिमालय में मौजूद हैं।

इस कवक में प्रोटीन, पेप्टाइड्स, अमीनो अम्ल, विटामिन बी-1, बी-2 और बी-12 जैसे पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं।

यार्सागुम्बा जड़ी का कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता है। इस औषधि का उपयोग कामोत्तेजक के रूप में किया जाता है। लेकिन आयुर्वेद में इसका अन्य बीमारियों के इलाज के रूप में उपयोग किया जाता है। यह फेफड़े और गुर्दे संबंधी बीमारियों के इलाज में काफी उपयोगी है। यह बुढ़ापे को भी बढ़ने से रोकता है तथा शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है।

Rakesh Singh

Leave a Comment

Recent Posts

रोहित शर्मा ने कप्‍तान हार्दिक पांड्या को बाउंड्री पर दौड़ाया।

रोहित शर्मा ने सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ फील्डिंग की सजावट की और कप्‍तान हार्दिक पांड्या…

2 years ago

राजनाथ सिंह ने अग्निवीर स्कीम को लेकर दिया संकेत, सरकार लेगी बड़ा फैसला

अग्निवीर स्कीम को लेकर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने…

2 years ago

सुप्रीम कोर्ट का CAA पर रोक लगाने से इनकार, केंद्र सरकार से मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को नागरिकता संशोधन कानून (CAA) रोक लगाने से इनकार कर दिया…

2 years ago

प्रशांत किशोर ने कि लोकसभा चुनाव पर बड़ी भविष्यवाणी

चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने लोकसभा चुनाव 2024 को लेकर बड़ी भविष्यवाणी की है। प्रशांत…

2 years ago

सुधा मूर्ति राज्यसभा के लिए नामित, PM मोदी बोले – आपका स्वागत है….

आज अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के दिन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इंफोसिस के चेयरमैन नारायण मूर्ति…

2 years ago

कोलकाता हाई कोर्ट के पूर्व जस्टिस अभिजीत गंगोपाध्याय ने थामा भाजपा दामन, संदेशखाली पर बोले – महिलाओं के साथ बुरा हुआ है…

कोलकाता हाई के पूर्व जस्टिस अभिजीत गंगोपाध्याय भाजपा में शामिल हो गए है। उन्होंने हाल…

2 years ago