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क्या था इंदिरा का गरीबी हटाओ नारा, जिस पर सभी सरकारों ने ली है चुटकी

देश में लोकसभा चुनाव की बिसात सजने वाली है। सत्ता पर आसीन लोग हों या विपक्षी खेमा हर किसी ने योजनाओं और वादों से जनता को लुभाने की कवायद शुरू कर दी है। हाल में राहुल गांधी रायपुर में एक रैली को संबोधित कर रहे थे जहां राहुल ने 2019 के लिए अपने वादों का झोला खोला और एक वादा जनता को थमा दिया। राहुल ने ऐलान किया कि अगर कांग्रेस की सरकार आती है तो देश के हर गरीब को न्यूनतम आमदनी दी जाएगी। हर गरीब व्यक्ति के बैंक खाते में न्यूनतम आमदनी होगी।

चुनाव के दौर में अब वादे और ऐलान तुरंत चर्चा का विषय बन जाते हैं। राहुल गांधी के इस ऐलान के साथ भी ऐसा ही हुआ। धड़ाधड़ राजनीतिक प्रतिक्रियाएं आने लगी तो वहीं कईयों ने आड़े हाथों लेना शुरू कर दिया।

इसी बीच बसपा सुप्रीमो मायावती ने कहा कि कहीं यह वादा ‘अच्छे दिन’ और ‘गरीबी हटाओ’ जैसा ना निकल जाए, मतलब कहीं ना कहीं मायावती ने बीजेपी और कांग्रेस दोनों को एक जैसा बताया। इस ऐलान को अच्छे दिन के नारे से जोड़ा जा रहा है जिसकी बदौलत मोदी सरकार सत्ता में आई, तो वहीं इंदिरा गांधी के नारे गरीबी हटाओ के बराबर रख कर भी तोला जा रहा है।

ऐसे में यह जानना अहम है कि इंदिरा गांधी की ‘गरीबी हटाओ’ योजना क्या थी और क्यों उसका जिक्र हर कोई कर रहा है।

इंदिरा गांधी को अपने कार्यकाल के दौरान कई अहम फैसलों के लिए जाना जाता है। चाहे फिर वो बैंकों के राष्ट्रीयकरण का फैसला हो या फिर पाकिस्तान के विभाजन का। इंदिरा के इन्हीं फैसलों में सबसे ज्यादा लोकप्रिय ‘गरीबी हटाओ’ का नारा हुआ। इस नारे को लेकर मौजूदा सरकार से लेकर अब तक की सभी सरकारें चुटकियां लेती रही हैं।

अंदरुनी राजनीति की घुटन से निकला यह नारा

कांग्रेस का विभाजन होने के बाद इंदिरा सरकार के पास 522 सदस्यों वाली लोकसभा में महज 228 सदस्य बचे थे। सरकार को ऐसे ना चलाते हुए इंदिरा ने तय किया कि वो मध्यावधि चुनाव करवाएंगी। इसी बीच इंदिरा ने ‘गरीबी हटाओ’ का नारा उछाला और गरीबों की हमदर्द नेता की छवि बनाने में कामयाब साबित हुई।

कैसे चमका गरीबी हटाओ का नारा ?

1971 में लोकसभा चुनाव हुए जिसमें इंदिरा ने इसी नारे पर जनता से वोट मांगे। इंदिरा ने उस समय के चुनाव प्रचार के दौरान कहा कि ‘वो कहते हैं इंदिरा हटाओ, हम कहते हैं गरीबी हटाओ’। आखिरकार चुनावों में इसका असर दिखा और कांग्रेस ने दो तिहाई सीटें हासिल की। कांग्रेस ने 518 में से 352 सीटें जीतकर सरकार बनाई।

इंदिरा गांधी का यह नारा इसलिए भी इतना चमका कि उस समय गरीबों को आमतौर पर किसी भी जगह नुमाइंदगी हासिल नहीं थी।

जमीन हालात कितने बदले ?

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि 1971 में गरीबी 57 प्रतिशत पर थी। इंदिरा ने ‘गरीबी हटाओ’ का नारा देकर गरीबों के लिए कई अहम योजनाओं की शुरूआत की। सभी योजनाओं का मुख्य उद्देश्य गांव के लोगों का जीवन स्तर ऊपर उठाना था लेकिन ‘गरीबी हटाओ’ का नारा जुमला ही निकलता हुआ दिखा। 1973 में मंहगाई के विरोध में पूरे देश में प्रदर्शन होने लगे। 1975 में आपातकाल लग गया तब इंदिरा गांधी ने गरीबी हटाने के लिए ’20 सूत्री’ कार्यक्रम सामने रखा। हालांकि गरीबी दर में कुछ गिरावट जरूर आई लेकिन इसको बाद में नाकाफी ही माना गया। जब 1977 में इंदिरा सरकार गई तब गरीबी दर 52 प्रतिशत दर्ज की गई थी।

इंदिरा गांधी के इस नारे के करीब 45 साल बाद भी हाशिये पर धकेले जा चुके लोगों की हालत में कुछ खास सुधार नहीं आया है। अब वर्तमान सरकारें 2030 तक गरीबी खत्म करने की बात करती है। भारत को इस समस्या की गंभीरता देखते हुए जरूरी कदम उठाने चाहिए। इसके साथ ही गरीबी को देखने के चश्मे को भी बदलने की जरूरत है।

sweta pachori

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